सीएए पर जागरूकता हेतु संगोष्ठी का आयोजन
   दिनांक 30-दिसंबर-2019
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संगोष्ठी में विचार व्यक्त करते श्री अशोक पांडे
 
पूर्व न्यायाधीश एवं संघ लोकसेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष श्री अशोक पांडे ने इसका विरोध करने वाले लोगों को तीन श्रेणी में बांटा।  
 
गत दिनों केशव स्मारक समिति, भोपाल में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित पूर्व न्यायाधीश एवं संघ लोकसेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष श्री अशोक पांडे ने इसका विरोध करने वाले लोगों को तीन श्रेणी में बांटा। उन्होंने कहा कि पहले वे हैं, जो सब कुछ जानते हैं, समझते हैं, परंतु अपनी राजनीति के लिए विरोध कर रहे हैं एवं लोगों को भड़का रहे हैं। दूसरे वे हैं, जो भ्रम फैला रहे हैं और उकसा रहे हैं। तीसरे वे हैं, जो कम पढ़े-लिखे हैं, उनको इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। उनके मन में उपरोक्त दोनों लोग असुरक्षा की भावना भर रहे हैं और उनको ऐसा बता रहे हैं कि यह कानून उन्हें भगाने के लिए है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 11 में स्पष्ट है कि नागरिकता से संबंधित किसी भी प्रावधान को संसद बदल सकती है। इसके अलावा कुछ लोग यह कह रहे हैं कि इसमें मुस्लिमों को क्यों शामिल नहीं किया गया। तो मेरा उनसे कहना है कि अहमदिया, कादियानी समाज अपने आपको मुसलमान मानता है। इसलिए उन पर मजहबी उत्पीड़न वाली बात लागू नहीं होती है।
 
नागरिकता संशोधन कानून में एक भी शब्द ऐसा नहीं है, जिसमें किसी भी भारतीय मुसलमान से नागरिकता हेतु एक भी कागज मांगा जाए। इसलिए देश के लोगों को समझना होगा कि यह कानून नागरिकता देने का है न कि लेने का। कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्री अरुण भट्ट ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में ब्रिगेडियर (सेनि.) रामनारायण विनायक सेवन उपस्थित रहे।