'कपट युद्ध से सावधान'
   दिनांक 01-फ़रवरी-2019
 
कुम्भ नगरी में विश्व हिन्दू परिषद् ने धर्म संसद का आयोजन किया. दो दिवसीय धर्म संसद का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक श्री मोहनराव भागवत ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया. पहले दिन दो प्रस्ताव पास किये गए जिसमें पहला प्रस्ताव था सबरीमाला मन्दिर में परम्परा -आस्था की रक्षा और दूसरा प्रस्ताव हिन्दू समाज को विघटन रोकने से सम्बंधित था. दोनों प्रस्ताव संतों ने पारित कर दिए. शुक्रवार को राम मंदिर से सम्बंधित प्रस्ताव आने की उम्मीद है. गुरुवार को धर्म संसद को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि सबरीमाला मंदिर में प्रवेश को लेकर कोई विवाद नहीं है. भगवान अयप्पा का वहां पर ब्रम्हचर्य स्वरुप है. इसलिए वहां पर महिलाओं का प्रवेश वर्जित है. आश्चर्य की बात है कि वहाँ की महिलाएं भगवान अयप्पा के मंदिर में प्रवेश नहीं चाहती हैं. वो लोग परम्परा को तोड़ना नहीं चाहती हैं मगर जिन लोगों की कोई आस्था नहीं है वो लोग महिलाओं को सबरीमाला मंदिर के अन्दर लेकर आना चाहते हैं. सम्पूर्ण केरल की महिलायें मंदिर में जाने को तैयार नहीं हुई तो श्रीलंका से महिलाओं को बुलाया गया.
 
श्री भागवत ने कहा कि " कोर्ट ने अपने फैसले में उल्लेख किया है कि मंदिर 'पब्लिक प्लेस' है. इसलिए सभी को वहां प्रवेश करने का अधिकार होना चाहिए. मंदिर में सब लोग दर्शन कर सकते हैं, चाहे वो किसी भी धर्म को मानने वाले हों यह बात तो ठीक है मगर हर मंदिर , हर मठ , हर सम्प्रद्राय के कुछ अपने अनुशासन होते हैं. वहाँ की कुछ परम्पराएं होती हैं. उन प्राचीन परम्पराओं को कैसे तोड़ा जा सकता है. सबरीमाला मंदिर में अगर कोई महिला दर्शन करना चाहती और कोर्ट के आदेश पर उसे सुरक्षा दिए जाने के बारे में विचार किया जाता. तब तो उस स्थिति के बारे में एक बार सोचा जा सकता था. मगर यहाँ तो कोई महिला जाना ही नहीं चाहती है. कोई भी महिला सबरीमाला मंदिर की परम्परा को तोड़ना नहीं चाहती है. केरल का हिन्दू आज उद्वेलित है. केरल की दमनकारी सरकार के गलत रवैये के चलते ५ हिन्दूओं का बलिदान हुआ है. हजारों हिन्दू आज जेल में हैं . हिन्दू समाज लड़ रहा है. यह मामला सिर्फ केरल के हिन्दूओं का नहीं है. महिलाओं के साथ कहीं पर कोई भेदभाव नहीं है मगर कुछ लोगों के द्वारा कपट युद्ध लड़ा जा रहा है. उस युद्ध को समझना होगा.
 
धर्म संसद में सबरीमाला के प्रस्ताव पर सभी संतों ने चर्चा की और यह प्रस्ताव स्वीकृत किया गया. दूसरा प्रस्ताव ‘हिन्दू समाज के विघटन के षड्यन्त्र’ का रखा गया. यह प्रस्ताव भी संतों के द्वारा पारित किया गया इस प्रस्ताव को रखते हुए गोविन्द गिरी जी ने कहा कि हिन्दू समाज में उत्पन्न हो रहे विभेद में ऐसे समूहों एवं संगठनों का हाथ है जो विभिन्न जांच एजेंसियों के द्वारा प्रमाणित हुए हैं. केरल एवं बंगाल की सरकारें भी संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन करके हिन्दू समाज के विघटन का प्रयास कर रही हैं. पिछले कुछ समय से दलित – मुस्लिम गठजोड़ का प्रयास हो रहा है. जिन जेहादियों को बाबा साहेब आंबेडकर ने स्वयं बर्बर तथा अविश्वसनीय बाताया था. अब बाबा साहब का नाम इसेमाल करके दुष्चक्र रचा जा रहा है.

धर्म संसद में हिन्दू समाज आह्वान किया गया कि क्षेत्रवाद , भाषावाद , प्रांतवाद , जातिवाद एवं छदम धर्म निरपेक्षता के नाम पर देश को तोड़ने का जो प्रयास किया जा रहा है. हिन्दू इससे भ्रमित न हों. ऐसे कुत्सित प्रयासों का संगठित होकर प्रतिकार करें. जिन राजनीतिक दलों के द्वारा ऐसे प्रयास किये जा रहे हैं. उनसे भी सावधान रहें.