सिब्बल के बिगड़े बोल बताते हैं कांग्रेस नेताओं की सोच
   दिनांक 11-फ़रवरी-2019
 
लगता है कि कांग्रेस को सत्ता में वापसी का भरोसा कुछ ज्यादा ही हो गया है। अगर ऐसा नहीं होता तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल अधिकारियों को चेतावनी नहीं देते। उन्होंने कहा है कि अधिकारियों को पता होना चाहिए कि सरकारें आती-जाती रहती हैं। कभी हम सत्ता में होते हैं, तो कभी विपक्ष में। हम ऐसे सभी अधिकारियों पर नजर रख रहे हैं, जो अतिउत्साही हैं और पीएम मोदी से वफादारी दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। सिब्बल को पता होना चाहिए कि संविधान सर्वोच्च है। सरकार में जो भी काम होता है संविधान के हिसाब से ही होता है।
कपिल सिब्बल का यह कथन एक तरह से अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश ही मानी जा सकती है। वे ऐसा बयान देकर एक तरह से अधिकारियों को चेताना चाह रहे हैं कि अगर उनकी सरकार बनी तो उन अधिकारियों की शामत जरूर आएगी, जो अभी भारतीय जनता पार्टी की सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नजदीक नजर आ रहे हैं।
अधिकारियों को धमकी के अंदाज में चेतावनी देने वाले कपिल सिब्बल की छवि ऐसी है कि वे संसद और पार्टी फोरम पर तो केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हैं, लेकिन अदालत में बतौर वकील उनका कदम कुछ और होता है। देश से नौ हजार करोड़ की रकम डुबोकर भाग चुके उद्योगपति विजय माल्या के प्रत्यर्पण को जब ब्रिटिश कोर्ट ने मंजूरी दी तो उनके प्रत्यर्पण के खिलाफ कोर्ट में अपील दायर करने वाले वकील कपिल सिब्बल ही रहे। वकालत के पेशे से पैसे कमाने के लिए वे अपनी पार्टी की लाइन को भी पीछे छोड़ते रहे हैं। उनके नेता राहुल गांधी करोड़ों रूपए डकार कर विजय माल्या के भागने के लिए लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमले करते रहे हैं।
बहरहाल अधिकारियों को धमकीभरी चेतावनी देकर कपिल सिब्बल एक तरह से देश के कर्मचारियों में दबाव बनाने की राजनीति कर रहे हैं। वे बताना चाहते हैं कि अधिकारी लोग उनका साथ दें, अन्यथा अगर सरकार बनी तो वे अधिकारियों को देख लेंगे। अपने संविधान में नौकरशाही को निष्पक्ष रहने और राजनीतिक तंत्र से बचाव के लिए संविधान के अनुच्छेद 311 से संरक्षण हासिल है। कांग्रेस बार-बार खुद के संविधान रक्षक होने का दावा करती है। लेकिन कपिल सिब्बल ने जिस तरह अधिकारियों को धमकी दी है, वह यह भी साबित करने के लिए काफी है कि कांग्रेस के जिम्मेदार समझे जाने वाले नेता संविधान का कितना सम्मान करते हैं।