अमेठी के स्थानीय कांग्रेसी नेता छोड़ रहे कांग्रेस
   दिनांक 12-फ़रवरी-2019

प्रियंका गांधी चुनाव के समय पहले भी प्रचार के लिए अमेठी और रायबरेली में जाती रही हैं। ये बात अलग है कि चुनाव खत्म होने के बाद फिर कभी लौट कर वहां नहीं जातीं. इस बार का उनका चुनाव प्रचार कोई नया नहीं है. बस बदलाव है तो सिर्फ इतना कि वो अब वह पूरे पूर्वांचल में चुनाव प्रचार करेंगी.
अमेठी के निवासी गोविन्द शुक्ल कहते हैं कि प्रियंका चुनाव के अलावा कभी भी क्षेत्र में नज़र नहीं आती हैं और राहुल गांधी भी जब अमेठी का दौरा करने निकलते हैं तो उनको कुछ खास किस्म के बड़े नेताओं से ही मिलवाया जाता है. आम जनता उन तक नहीं पहुंच पाती हैं. यही वजह है कि उपेक्षा का शिकार हो रहे जमीनी नेता कांग्रेस का साथ छोड़ रहे हैं.
अभी हाल में अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री मोहसिन रजा की उपस्थिति में अमेठी के 13 सभासदों ने कांग्रेस पार्टी को छोड़ कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली. अल्पसंख्यक समुदाय के अन्य लोगों ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।. अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री मोहसिन रजा ने कहा कि अब मुसलमान तेजी से भाजपा के साथ जुड़ रहे हैं. कांग्रेस ने अभी तक मुसलमानों को डराने का काम किया. कांग्रेस ने समाज में मुसलमानों को डरा कर राजनीति की है।
लखनऊ में रोड शो के ठीक पहले राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि “ अब जमीनी नेताओं को जोड़ना होगा और इसकी जिम्मेदारी प्रियंका गांधी , ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं राज बब्बर पर है.” मगर जमीनी सच्चाई काफी मुश्किल भरी है. रायबरेली और अमेठी जो नेहरू परिवार का गढ़ माना जाता रहा है वहां के लोकप्रिय नेता कांग्रेस का साथ छोड़ कर भाजपा का दामन थाम चुके हैं. 
रायबरेली और अमेठी क्षेत्र से इंदिरा गांधी , राजीव गांधी , सोनिया गांधी और राहुल गांधी चुनाव जीत कर सांसद निर्वाचित होते रहे हैं. मगर रायबरेली और अमेठी विकास की बाट जोहता रह गया. स्वतन्त्रता के बाद पहली बार रायबरेली के गांवों को अन्धेरे से मुक्ति मिली. वहां के गांवों का विद्युतीकरण भाजपा की सरकार आने पर संभव हो पाया. भाजपा के शासनकाल में तेजी से हो रहे विकास को देख कर वहाँ की जनता को कांग्रेस का छलावा समझ में आ गया है।
उल्लेखनीय है कि परम्परागत कांग्रेसी एवं विधान परिषद् सदस्य , दिनेश सिंह भी कुछ माह पहले भाजपा में शामिल हो चुके हैं. दिनेश सिंह ,रायबरेली में कांग्रेस के सबसे महत्वपूर्ण नेता माने जाते रहे हैं. दिनेश सिंह का रायबरेली और अमेठी के आस-पास काफी लोकप्रिय हैं. वर्ष 2010 में जब बसपा की सरकार थी और विधान परिषद् का चुनाव हो रहा था. उस समय मात्र एक सीट पर कांग्रेस को जीत हासिल हुई थी. कांग्रेस के प्रत्याशी के तौर पर दिनेश प्रताप सिंह विजयी हुए थे. उस चुनाव में एक सीट पर कांग्रेस को विजय हासिल हुई थी शेष सभी सीटों पर बसपा का कब्जा था . इसी प्रकार वर्ष 2016 में विधान परिषद् के चुनाव में सपा की सरकार थी. सपा ने अपनी पूरी ताकत लगा कर अपने प्रत्याशियों को जितवाया . उस समय भी कांग्रेस के टिकट पर मात्र दिनेश सिंह ही विधान परिषद् सदस्य के पद पर विजयी हुए . कांग्रेस के खराब दिनों में भी कांग्रेस पार्टी से विधान परिषद सदस्य निर्वाचित होते रहे.
विधान परिषद सदस्य दिनेश सिंह ने पांचजन्य कहते हैं कि " वर्ष 2014 में मेरी वजह से राहुल गांधी को लोकसभा चुनाव में जीत हासिल हुई थी, इस बार वह संसद का मुंह नहीं देख पाएंगे.” अमेठी लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले दो विधानसभा क्षेत्र - तिलोई विधानसभा और सलोन विधानसभा में दिनेश सिंह का जबर्दस्त जनाधार है. इन्ही दोनों विधानसभाओं से राहुल गांधी को खासी बढ़त मिली थी. रायबरेली के स्थानीय लोगों का कहना है कि सोनिया गांधी की जब से इलाज करा कर विदेश लौटीं है तब से उनका रायबरेली आना एकदम कम हो गया. पिछला दौरा उनका एक अरसे बाद हुआ था. राहुल और प्रियंका को लोग कौतुहल वश देखने के लिए आते हैं.