आखिर क्यों बौखलाई सी हैं ममता
   दिनांक 13-फ़रवरी-2019
   
                
आखिर सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई को चिटफंड घोटाले में कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से शिलांग में पूछताछ करने की इजाजत दे दी। लेकिन ममता बनर्जी जिस तरह एक पुलिस अधिकारी के पक्ष में खुलकर सामने आर्इं और धरना दिया, उससे कई सवाल खड़े हो गए हैं
 - अश्वनी मिश्र एवं अंबा शंकर वाजपेयी कोलकाता से                     
सीबीआई अधिकारियों को बंधक बनाकर पुलिस स्टेशन ले जाती कोलकाता पुलिस
आज के हालात में चिटफंड घोटालों का नाम सुनते ही किसी के कान खड़े होते हों या न होते हों, लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जरूर यह नाम सुनते ही परेशानी और बौखलाहट से भर उठती हैं। उनकी इस बौखलाहट और परेशानी का कारण जायज है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर चिटफंड घोटालों की जांच कर रही सीबीआई जिस तरह से एक के बाद एक उनके करीबी नेताओं, पुलिस अधिकारियों की इसमें संलिप्तता को उजागर कर रही है, गिरफ्तार करके सलाखों के पीछे भेज रही है, ऐसे में उन्हें डर सता रहा है कि कहीं अगला नंबर उनका तो नहीं... इसीलिए वे बार-बार केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहती हैं,ह्यह्यकेन्द्र की भाजपा सरकार हमारे खिलाफ सीबीआई का सियासी इस्तेमाल कर हमें डरा रही है लेकिन मैं डरने वाली नहीं हूं। मोदी सरकार ने ह्यसंविधान और संघीय ढांचे  की भावना का गला घोंटा है। इसलिए मैं ईमानदार पुलिस अधिकारी के समर्थन में आई हूं।ह्णह्ण ज्ञातव्य है कि 3 फरवरी को सीबीआई अधिकारियों की एक टीम चिटफंड घोटाले के संबंध में कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार के मध्य कोलकाता स्थित लाउडन स्ट्रीट आवास पर पूछताछ करने गई थी लेकिन वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें अंदर जाने से न केवल रोका बल्कि स्थानीय प्रशासन ने सीबीआई अधिकारियों को हिरासत में लेकर उनके साथ दुर्व्यवहार किया और नजरबंद तक कर दिया। मामले की खबर लगते ही ममता बनर्जी तुरंत पुलिस आयुक्त के समर्थन में उतर आईं और अपने आला अधिकारियों के साथ राजीव कुमार के सरकारी आवास का दौरा किया, फिर धरमतल्ला स्थित मैट्रो चैनल पर धरने पर बैठ गर्इं। राजीव कुमार भी उनके साथ धरने पर बैठे नजर आए। यह सियायी ड्रामा यहीं नहीं थमा। ममता बनर्जी ने कहा, सीबीआई बिना अनुमति के राजीव कुमार से पूछताछ कर रही है।  मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीबीआई के अधिकारियों का भी बयान आया। कोलकाता में सीबीआई के संयुक्त निदेशक पंकज श्रीवास्तव ने इस मामले में कहा,ह्यह्यपुलिस आयुक्त ने बार-बार समन भेजने के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया है। चिटफंड घोटाले के कई सबूत और दस्तावेज गायब हैं या उन्हें नष्ट कर दिया गया है। सीबीआई की टीम इसी बारे में पूछताछ के लिए राजीव कुमार के घर गई थी। उन्होंने राज्य प्रशासन की कार्यशैली पर कहा कि कोलकाता पुलिस बीते दो साल से सीबीआई के कामकाज में बाधा पहुंचाने का प्रयास कर रही है। सीबीआई के अधिकारियों को बेवजह परेशान किया जाता है।  उल्लेखनीय है कि सीबीआई 2014 से ही सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर चिटफंड घोटाले की जांच कर रही है। लेकिन ममता द्वारा यह कहा जाना कि सीबीआई केन्द्र सरकार के इशारे पर काम कर रही है, किसी के गले नहीं उतर रहा।
गौरतलब है कि राज्य का यह घोटाला राजनीतिक उथल-पुथल का कारण बनता जा रहा है। बीते लगभग छह साल में समय-समय पर उठने वाली इसकी लहरों ने राजनीति और पत्रकारिता क्षेत्र के बड़े-बड़े दिग्गजों को धराशायी किया है। बीते समय में सीबीआई ने राज्य के एक वरिष्ठ पत्रकार और आनंद बाजार समूह के अलावा टाइम्स समूह के बांग्ला दैनिक के संपादक रहे सुमन भट्टाचार्य को गिरफ्तार किया। उन पर एक चिटफंड कंपनी आई-कोर समूह से पैसे लेने का आरोप है। इसके अलावा संपादक एवं तृणमूल के नेता कुणाल घोष भी सारदा समूह के चिटफंड घोटाले के सिलसिले में जेल की सलाखों के पीछे रह चुके हैं। दरअसल अप्रैल, 2013 में सारदा समूह के चिटफंड घोटाले के खुलासे ने बंगाल की राजनीति में भूचाल पैदा कर दिया था। इस घोटाले में तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं की हिस्सेदारी और संलिप्तता के बाद विपक्षी दलों ने ममता सरकार को निशाने पर ले लिया था। तो वहीं पूरे राज्य में ठगे गए हजारों निवेशक भी सड़कों पर उतर आए थे। निवेशकों और एजेंटों समेत लगभग एक दर्जन लोगों ने तो अपनी गाढ़ी कमाई डूब जाने के गम में आत्महत्या तक कर ली थी।
 सीबीआई जांच के विरोध में धरने पर बैठी ममता बनर्जी एवं कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार (बाएं से दूसरे) 
हजारों करोड़ का है घोटाला
चिटफंड घोटाला लगभग 40,000 करोड़ रु. का है। ये कंपनियां कम्युनिस्ट शासन के दौरान शुरू हुईं, जिसमें सरकार पोंजी स्कीम (योजना) बाजार में लेकर आई। इस योजना के तहत आम लोगों- मुख्य रूप से झुग्गी-झोंपड़ियों में रहने वाले गरीबों एवं मध्यमवर्गीय परिवारों से यह कहते हुए पैसा एकत्र किया गया कि जमा धन पर बैंक से भी ज्यादा दर पर ब्याज देंगे। शुरुआत में दिखाने के लिए कुछ लोगों को अधिक ब्याज देकर पैसा वापस भी किया गया। इसे देख जब लोगों का विश्वास इस पर बढ़ने लगा तो लाखों लोग इसके जाल में फंसते चले गए और अपने धन को पोंजी योजना में लगाने लगे। रोजवैली, सारदा, आई-कोर, सिलिकान जैसी लगभग 100 से ज्यादा कंपनियां बाजार में आ गईं, जिन्होंने आम लोगों से करोड़ों रुपए जुटाए। इन सभी को सत्ताधरी नेताओं का खुला संरक्षण था। शुरू में चिटफंड का काम धीमी गति से चला लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी के राजनीतिक उदय ने चिटफंड के कारोबार को और गति दी। क्योंकि इन्हीं चिटफंड कंपनियों ने सिंगूर और नंदीग्राम आन्दोलन के समय ममता बनर्जी को फंडिंग की थी। 2009 के लोकसभा चुनाव में राज्य में टीमएसी की जीत से एक बात स्पष्ट हो गयी थी कि प्रदेश में भी अब उसकी सत्ता आने वाली है तो चिटफंड कंपनियां टीएमसी के लिए निवेश करने लगीं। चिटफंड से लगभग 15-16 समाचार पत्र (बांग्ला स्टेट्समैन, प्रतिदिन आदि) और 5-6 टीवी चैनल (चैनल-10, कोलकाता टीवी) राज्य में लॉन्च किए गए। ये अखबार व टीवी चैनल टीएमसी के सबसे बड़े हिमायती बन गए और सत्ता के संरक्षण में इन्होंने चिटफंड के पैसे को इधर से उधर करने का कार्य किया। लेकिन 2013 में चिटफंड की असलियत सामने आने लगी, जब लोगों को यह पता चला कि उनके द्वारा चिटफंड में निवेश किया गया पैसा डूब गया है। प्रदेश में हलचल मचने लगी तो ममता अचानक नाटकीय ढंग से सक्रिय हो गर्इं और घटना की असलियत सामने न आ पाए, इसके लिए तुरत एसआईटी गठित कर दी। सारदा के मालिक सुदिप्तो सेनगुप्ता और टीमएसी के राज्यसभा सदस्य कुणाल घोष को पकड़ा गया। राज्य सरकार ने सुदिप्तो सेन और कुणाल घोष को पकड़ कर चीजों को रफा-दफा करने की पूरी कोशिश की, ताकि लोगों का ध्यान इससे हट जाये और उनकी संवेदना मिले। लेकिन बिकास रंजन भट्टाचार्य व अब्दुल मन्नान ने सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की और इसकी जांच सीबीआई से करवाने का निवेदन किया। न्यायालय ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया। जब जांच शुरू हुई तो चिटफंड की असलियत परत दर परत खुलने लगी। 12 दिसंबर, 2014 को ममता बनर्जी के करीबी परिवहन मंत्री मदन मित्र की गिरफ्तारी यह बताने के लिए काफी है। वे 21 महीने सलाखों के पीछे रहे। इसके अलावा टीमएसी के नेता शृंंजॉय बसु को भी सीबीआई की पूछताछ का सामना करना पड़ा। ऐसे ही रोजवैली चिटफंड घोटाले के सिलसिले में पार्टी के दो सांसदों- सुदीप बंद्योपाध्याय और तापस पाल को जेल में रहना पड़ा था। सीबीआई ने रोजवैली के मालिक गौतम कुंडू को भी गिरफ्तार किया। सीबीआई 2019 के शुरू में ही कोलकाता फिल्म इंडस्ट्री के बड़े नाम श्रीकांत मोहता के घर तक पहुंच गयी तो ममता बौखला गईं। इसके पीछे कारण साफ था। ममता के मंच पर जितने भी फिल्म कलाकार दिखाई देते थे, वह श्रीकांत ही जुटाते थे। खबरों की मानें तो जिस दिन सीबीआई ने श्रीकांत मोहता को गिरफ्तार किया उस दिन भी कोलकाता पुलिस ने सीबीआई अधिकारियों को 2 घंटे तक बैठाकर रखा और पूछताछ की थी। इतना ही नहीं, सीबीआई के जिन अधिकारियों ने जांच की उनका न केवल उत्पीड़न किया गया बल्कि एक अधिकारी के घर में कोलकाता पुलिस ने चोरी का इल्जाम लगाकर तलाशी तक ली थी।
ममता की बौखलाहट के पीछे की वजह
ममता बनर्जी की बौखलाहट का सबसे बड़ा कारण है सीबीआई की जांच का उनकी देहरी तक पहुंचना। दूसरा कारण, उनके करीबी लोगों घोटालों में एक-एक करके पकड़ा जाना और ममता का देखने के सिवा कुछ न कर पाना। तीसरा कारण, राज्य की जनता का उनसे मोहभंग होना। क्योंकि 19 जनवरी को उन्होंने कोलकाता में जो रैली की उसमें मुश्किल से 60-70 हजार लोग ही जुट पाए। जबकि प्रधानमंत्री की रैली में जनसैलाब उमड़ रहा है। यह ममता को सबसे ज्यादा खटक रहा है। ऊपर से जब नरेंद्र मोदी ममता को भ्रष्टाचार के मामले में घेरते हैं तो यह बौखलाहट और बढ़ जाती है। बीते दिनों पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर की विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा भी था,ह्यह्यसीबीआई अधिकारियों को बंगाल आने से राज्य सरकार मना कर रही है। अगर दीदी ने कुछ गलत नहीं किया तो डरने की जरूरत क्या है? मैं जब गुजरात का मुख्यमंत्री था तो केन्द्र की ओर से भेजी गई जांच एजेंसी मुझे 10-12 घंटे बैठाकर पूछताछ करती थी। लेकिन हमने कभी संस्थाओं को अपमानित नहीं होने दिया और न ही कभी गुजरात से सीबीआई को निकालने का निर्णय किया। हमने उस समय केन्द्र से कहा जिसको भेजना भेजो, हम ईमानदार हैं, हमें किसी का डर नहीं।
ये ठगबंधन है!
महागठबंधन के जरिए केन्द्र में प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब देख रहीं ममता बनर्जी ने बीते दिनों कोलकाता में रैली तो की, लेकिन इस रैली में न तो बसपा प्रमुख मायावती शामिल हुईं और न ही तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव। ऐसे में महागठबंधन को न केवल झटका लगा बल्कि आपस की दरार भी खुलकर सामने आ गई। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पश्चिम बंगाल स्थित मालदा की रैली में ममता बनर्जी पर जमकर हमला बोला और गठबंधन की कोशिशों का मखौल उड़ाया। उन्होंने कहा,ह्यह्यममता बनर्जी महागठबंधन में लगी हुई हैं। भाजपा विरोधी नेता मंच पर जुटा रही हैं। लेकिन जो नेता एक-दूसरे का हाथ पकड़कर खड़े दिखाई दे रहे हैं उनके बीच आपसी टकराव, मनमुटाव और राजनीतिक होड़ की कहानियां किसी से छिपी नहीं हैं।  वहीं पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं,ह्यह्यसबसे मजेदार बात यह है कि इस महागठबंधन रैली में जितने भी दल और उनके नेता शामिल हुए वे सभी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं। कोई अपने को किसी से कम नहीं आंक रहा है। इससे समझा जा सकता है कि आने वाले दिनों में इस महागठबंधन की हालत क्या होने वाली है।
बहरहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति को करीब से देखने वाले कहते हैं कि मौजूदा समय में ममता बनर्जी को स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि राज्य की सत्ता उनके हाथों से खिसक रही है तो वहीं भाजपा राज्य में बढ़ते जनाधार और सत्ता के निकट अपने को देख रही है। इसलिए वह भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए हर संभव कोशिश करती दिखाई देंगी।
कब-कब क्या हुआ
अप्रैल, 2013- पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा सारदा घोटाले की जांच के लिए एसआईटी का गठन। राजीव कुमार को एसआईटी प्रमुख बनाया गया जो उस समय बिधाननगर पुलिस आयुक्त थे। सारदा के मालिक सुदिप्तो सेन एवं कार्यकारी निदेशक देवयानी मुखर्जी गिरफ्तार
नवंबर, 2013 एवं जनवरी, 2017- तृणमूल सांसद कुणाल घोष, तापस पाल एवं सुदीप बंद्योपाध्याय एवं राज्य के तत्कालीन परिवहन मंत्री मदन मित्र गिरफ्तार
अगस्त, 2017- सीबीआई द्वारा राजीव कुमार (अब कोलकाता के पुलिस आयुक्त) को घोटाले के बारे में विस्तार से सवाल-जवाब के लिए समन
अक्तूबर, 2017-सीबीआई द्वारा राजीव कुमार को दूसरा समन
मार्च,2018- राजीव कुमार को तीसरा समन
जुलाई,2018- सीबीआई ने राजीव कुमार के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। राजीव ने अपना पक्ष रखा। अदालत ने सीबीआई को उच्च न्यायालय जाने को कहा
दिसंबर, 2018 - तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सीबीआई द्वारा समन, जिसके विरोध में अधिकारियों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया
3 फरवरी, 2019 - कोलकाता पुलिस ने सीबीआई टीम को बंधक बनाया, दुर्व्यवहार किया, जब वह राजीव कुमार से पूछताछ करने उनके घर गई थी
5 फरवरी, 2019 - सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई को शिलांग में पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से पूछताछ करने की इजाजत दी
सारदा घोटाला 
क्या है सारदा घोटाला?
हजारों करोड़ रुपए का है सारदा घोटाला
लाखों गरीब और मध्यमवर्ग के लोगों को उनके पैसे कई गुना करके वापस देने का लालच दिया गया था
कंपनी पैसे लेकर फरार हो गई
2014 में सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की सीबीआई जांच कराने के आदेश दिए और उसके बाद से जांच जारी है
घोटाले की जांच के लिए कांग्रेस और वामपंथी दल भी न्यायालय पहुंचे थे
घोटाले में टीएमसी सांसद अहमद हसन इमरान, सांसद अर्पिता घोष से जहां पूछताछ की गई वहीं टीएमसी के पूर्व राज्यसभा सांसद शृंजॉय बोस,पूर्व टीएमसी सांसद सोमेन मित्रा एवं राज्य के कपड़ा मंत्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी घोटाले के घेरे में घिरे हुए हैं
राज्य के पूर्व परिवहन मंत्री मदन मित्रा को भी इस संबंध में गिरफ्तार किया गया। इस समय जमानत पर हैं