जो जंग की बात कर रहे हैं वह जरूर पढ़ें ...
   दिनांक 18-फ़रवरी-2019
यदि मोदी यह कह दें, कि मैं पाकिस्तान के खिलाफ जंग का एलान करता हूं और साथ ही देश में Army Service Compulsory यानी कि देश के हर परिवार को कुछ साल फौज में बिताने पड़ेंगे। तब देखना कितने चिल्लाते हैं कि पाकिस्तान को खत्म कर दिया जाना चाहिए |
2008 में 26/11 को मुंबई में हुए आतंकी हमले का दृश्य (फाइल फोटो) 
इतना हंगामा क्यों बरपा है ? क्या लोगों को मुंबई हमले की याद नहीं है ? उरी, पठानकोट, मुंबई, संसद भवन, जम्मू कश्मीर विधानसभा में हमला याद नहीं है क्या ? क्या लोगों को (चाहें तो गूगल कर सकते हैं) देश के तमाम शहरों जैसे- दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद ,जयपुर, अहमदाबाद, हैदराबाद में हुए बम धमाके याद नहीं हैं ? पर इस बार क्यों सोशल मीडिया पर लोग पाकिस्तान को नेस्तनाबूद करने पर तुले हुए हैं. यकीन मानिए अनगनित लोगों को आज ही पता चला होगा  जब वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया है कि हमने पाकिस्तान से Most Favored Nation का दर्जा छीन लिया है यानी कि इतने सालों से हम पाकिस्तान को खास मुल्क मानते रहे हैं अब जल्दी ही 1 या 2 दिन के भीतर देश के बड़े अखबार लिखेंगे कि इस स्टेटस को हटाने से देश में कितनी बड़ी आर्थिक क्षति हो रही है कितना नुकसान हो रहा है और इससे हमारी अर्थव्यवस्था किस तरह से चरमरा रही है । कुछ दिन तक माहौल शांत रहेगा फिर धीमे से टाइम्स ऑफ इंड़िया लिखेगा- People to People contact ही इलाज है  हुर्रियत के नेता कुछ दिन चुप रहेंगे मीडिया को 2 दिन के लिए मसाला मिल गया है रिटायर्ड जनरल्स , पूर्व राजदूतों का काम थोड़ा बढ़ गया है( आमदनी भी) लेकिन ऐसा क्या बदला है  जो पहले नहीं हुआ.
देश की राजधानी दिल्ली में पाकिस्तान की आईएसआई का सबसे बड़ा अड्डा 70 सालों से मौजूद है  जहां सारे जासूस लगाए जाते हैं. जो तमाम विरोध के बावजूद हिंदुस्तान विरोधी गतिविघियों में शामिल रहते हैं। हुर्रियत नेताओं को चाय और डिनर पर बुलाते हैं  लेकिन हम पाकिस्तान से बेहतर संबध चाहते हैं। सारे नेता और पार्टी कहते हैं कि पाकिस्तान आतंकवादियों का गढ़ है लेकिन भारत की किसी सरकार ने पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने की नहीं सोची क्या होगा यदि यह काम कर दिया जाये, यदि दूतावास बंद कर दिया जाए तो क्या आफत आ जाएगी। लेकिन नहीं, वो संस्था जो पिछले 70 सालों से देश विरोधी गतिविधि में शामिल रही है हम आज तक उसको बंद नहीं कर पाए  इन 70 सालों में हम पाकिस्तान परस्त एक ऑफिशियल पॉलिसी नहीं बना पाए हमेशा इस तरह के हमले हो जाने के बाद नेताओं के उन बयानों में बदलाव भी देखने को नहीं मिला- जब पीएम, गृहमंत्री कहें कि यह कायराना हरकत है काहे की कायराना हरकत, चुपचाप बस में यात्रा करते लोगों को घुसकर मार देना और मर जाना- कायराना हरकत नहीं है ये युद्ध कला है  ये आज की जंग के नियम है. यदि 30 सालों में भी हम नहीं समझे तो ये हमारी नाकामयाबी है, पाकिस्तान की नहीं और यकीन मानिए जो लोग सोशल मीडिया पर रो रहे हैं हिंदुस्तान की सरकार को कोस रहे हैं सरकार पर दबाव बना रहे हैं पाकिस्तान को खत्म कर देना चाहिए अगर यह सरकार पाकिस्तान से युद्ध घोषित करती है तो जंग के हालात में कीमत सबको चुकानी पड़ेगी  उसमें जान माल का नुकसान भी होगा , यही कीमत जब हम सब पर पड़ेगी तो हम चिल्लाने लगेंगे। तब लोग सरकार को कोसना शुरू करेंगे कि अरे इतने बड़े एक्शन की क्या जरूरत है काहे की लड़ाई, क्यों लड़ाई, जब इस देश के पूर्व गृहमंत्री यह बयान दे सकते हैं यह सब इसलिए हुआ क्योंकि इस सरकार ने उरी फिल्म का प्रचार बढ़-चढ़कर किया तो आप उस देश की मानसिकता समझ सकते हैं अटल बिहारी वाजपेयी का एक भाषण यूट्यूब पर है  जिसमें वो भारतवासियों की मानसिकता बताते हैं  कि प्लासी के युद्ध में जितने लोग मैदान में थे  उससे ज्यादा मैदान के बाहर युद्ध का परिणाम जानने को बेताब थे हिंदू समाज ने अपने हक को बरकरार रखने की ग्रंथि को पैदा ही नहीं किया  वसुधैव कुंटुंबकम ने अपने कुंटुम्ब का ज्यादा नुकसान किया है अचंभित नहीं था हमारा गुलाम हो जाना पहले मुगलों से बाद में अंग्रेजों से हम अपने घर से हारे किसी और की वजह से नहीं अपनी वजह से। यह पहली बार नही हुआ है और आखिरीबार भी नंही  48 घंटे बाद ये खबरों की सुर्खियों से हटने लगेगा, और फिर हम सब के दिलो दिमाग से 72 घंटे या एक हफ्ते बाद।