बजट 2019: जानिए आम आदमी के लिए क्यों है खास
   दिनांक 02-फ़रवरी-2019
बजट किसानों के लिए है, एक तरफ जहां बजट को लेकर यह विमर्श चल रहा है, वहीं मुंबई शेयर बाजार का संवेदनशील सूचकांक 212.74 बिंदु बढ़कर बंद हुआ। शेयर बाजार की ऐसी प्रतिक्रिया से मोटे तौर पर माना जाना चाहिए कि कारपोरेट जगत बजट को लेकर आशान्वित है। 75000 करोड़ की जो रकम छोटे किसानों की जेब में आयेगी वह अंतत तमाम वस्तुओं और सेवाओं की मांग बढ़ायेगी और अर्थव्यवस्था की सुस्ती को दूर करेगी।
असंगठित क्षेत्र के करीब दस करोड़ कामगार, करीब 12 करोड़ छोटे किसानों का भला-ऐसी बातें अंतरिम वित्त मंत्री पीयूष गुप्ता अपने 2019-20 के बजट भाषण में करते दिखे। सूट बूट की सरकार, अंबानी-अडानी की सरकार जैसे आऱोपों में घिरे होने के बाद, हाल में हिंदी भाषी क्षेत्रों के तीन महत्वपूर्ण राज्यों में सत्ता गंवाने के बाद केंद्र सरकार एकदम से जनप्रिय, किसान प्रिय,मजदूर प्रिय दिख रही है। ऐसा होने की ठोस वजहें हैं, ठीक सामने ही लोकसभा चुनाव हैं। कुल मिलाकर इस बजट की घोषणाएं उन वर्गों, उन लोगों को हाशिये से केंद्र में लाती हुई दिख रही हैं, जिनके पास वोट हैं, सरकार बदलने की ताकत है।
आयुष्मान भारत योजना की बात बजट में करते हुए पीयूष गोयल ने अपनी सधी राजनीतिक निगाह का परिचय दिया है।
किसान हिताय
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत 2019-20 के लिए 75000 करोड़ रुपये रखे गये हैं। इस स्कीम में दो हेक्टेयर तक जमीन रखनेवालों को किसानों को साल में छह हजार रुपये दिये जायेंगे। यह योजना दिसंबर 2018 से शुरु मानी जायेगी, और इसकी पहली किश्त यानी दो हजार प्रति किसान अगले महीने किसान को दे दी जायेगी। करीब बारह करोड़ किसानों को इस स्कीम का लाभ मिलने की उम्मीद है। किसानों को इस स्कीम का लाभ पहुंचाने के लिए सरकार इतनी तत्पर है कि दिसंबर 2018 से लागू की जायेगी। यह बात बताते हुए पीयूष गोयल यह भी याद कराना ना भूले कि 2022 तक किसानों की आय दो गुनी हो जायेगी। किसानों के राजनीतिक महत्व को हाल के वक्त में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के सी राव समझ औऱ समझ चुके हैं। उनकी रैयत बंधु स्कीम के तहत भी किसानों के खाते में रकम ट्रांसफर की जाती है। किसान के खाते में सीधे रकम जाये, तो बीच में लूटपाट का खतरा खत्म हो जाता है। साल में छह हजार रुपये से किसानों का कितना भला औऱ कितना दीर्घजीवी उद्धार होगा, यह  तो आगे देखा जायेगा। पर यह बात साफ होती है कि हाल की चुनावी हारों औऱ 2017में गुजरात विधानसभा चुनाव में भी ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा के खराब प्रदर्शन से केंद्र सरकार को समझ में आया कि किसानों के लिए कुछ ऐसा किया जाना जरुरी है जो उन्हे भी होता हुए दिखे। 
यह स्कीम केंद्र और राज्य सरकार के संबंधों में ना उलझे, इसलिए इस स्कीम का पूरा खर्च केंद्र सरकार ही उठायेगी। 75000 करोड़ रुपये की रकम खासी बड़ी रकम है, मोटे तौर पर इसे यूं समझा जा सकता है कि जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स संग्रह एक महीने में औसतन करीब एक लाख करोड़ रुपये के आसपास रहता है। तो करीब एक महीने के जीएसटी संग्रह के पिचहत्तर प्रतिशत के करीब रकम किसानों को हस्तांतरित की जानी है।
असंगठित के लिए
असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए अंतरिम वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने फिक्र दिखायी है। घोषणाओं के मुताबिक दस करोड़ असंगठित क्षेत्र के कामगारों को तीन हजार प्रति माह की पेंशन मिलेगी, अगर असंगठित कामगार 18 साल की उम्र में पेंशन स्कीम में आकर सिर्फ 55 रुपये प्रति माह का भुगतान करें या 29 साल की उम्र में पेंशन स्कीम में आकर सिर्फ100 रुपये प्रति माह का भुगतान करें। पीयूष गोयल का अनुमान है कि आनेवाले पांच सालों में यह स्कीम विश्व में असंगठित कामगारों के लिए सबसे बड़ी पेंशन स्कीम बन जायेगी। असंगठित क्षेत्र का विस्तार लगातार हो रहा है। दरअसल अब अर्थव्यवस्था में एक प्रवृत्ति साफ तौर पर देखने में आ रही है। वह यह है कि अर्थव्यवस्था का विकास हो रहा है, तो काम करने के लिए लोगों की जरुरत है।
 
पर अब इन लोगों को पक्की नौकरी नहीं दी जा रही है। नौकरियां हैं पर पक्की नहीं हैं। ऐसी सूरत में असंगठित क्षेत्र के कामगारों की वृद्धावस्था को लेकर भारी चिंताएं हैं। यह स्कीम एक हद तक उन चिंताओं को दूर सकती है। जाहिर है आगामी चुनावी भाषणों में किसान और मजदूर प्रिय होने का दावा भाजपा कर पाये, ऐसे इंतजाम इस बजट में कर लिये गये हैं।
पांच लाख तक वाले का भला
मध्य वर्ग की चिंता हर बजट के बाद यही रहती है कि उसकी आय में से कितना कर जानेवाला है। हाल के बरसों में तनख्वाहें लगातार बढ़ी थीं, पर सरकार बजट में वेतनभोगी वर्ग को आम तौर पर राहत देने के लिए तैयार नहीं दिखती थी। बल्कि एक बजट के बाद साक्षात्कार में वित्त मंत्री अरुण जेटली के बयान का आशय यह था कि मध्यवर्ग को अपने आप ही खुद को संभालना चाहिए,सरकार से राहतों की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। इस बार अंतरिम वित्तमंत्री वेतनभोगी मध्यवर्ग की सुनी है। कर योग्य आय की सीमा बढाकर पांच लाख हुई है यानी अब पांच लाख रुपये तक की आमदनी कर मुक्त होगी और कर बचत करनेवाले छह लाख पचास हजार रुपये की आमदनी कर मुक्त रख पायेंगे। पांच लाख रुपये सालाना आय का मतलब करीब 42000 रुपये प्रति माह कमानेवाले भी कर मुक्त रह पायेंगे। मुखर मध्यवर्ग के लिए यह खासी राहत है और सरकार के लिए भी। मुखर मध्यवर्ग की आवाज मीडिया में जल्दी और ज्यादा जगह पा जाती है।
 
आगे और बजट है
कुल मिलाकर ये सारी घोषणाएं बतौर ट्रेलर ही देखी जानी चाहिए क्योंकि फाइनल बजट तो लोकसभा चुनावों के बाद आनेवाली सरकार ही पेश करेगी। अगर भाजपा को बजट पेश करने का मौका मिला तो निश्चय ही ये घोषणाएं फाइनल ही होंगी अगर कोई और पार्टी बजट पेश करती है, तो भी साफ है कि किसानों मजदूरों औऱ मध्यवर्ग के लिए जो भी घोषणाएं हुई हैं, उन्हे वापस लेने का साहस किसी पार्टी में ना होगा। क्योंकि भाजपा तब एक मजबूत विपक्ष के तौर पर इन्हे वापस लेना आसान नहीं होने देगी। कुल मिलाकर किसान,मध्यवर्ग और असंगठित क्षेत्र के मजदूर कुछ हासिल करने की उम्मीद बांध सकते हैं। किस राजनीतिक पार्टी के अच्छे दिन आयेंगे, यह तो अभी साफ नहीं है पर किसान और मजदूर थोड़ी बेहतरी की आस कर सकते हैं। हाल के चुनाव परिणामों में जो चोट भाजपा को पहुंची है, उसके परिणामों की साफ छाप इन घोषणाओं में देखी जा सकती है।