इजराइल साथ आया तो बौखलाया पाकिस्तान
   दिनांक 21-फ़रवरी-2019
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और प्रधानमंत्री मोदी ( फाइल फोटो ) 
पुलवामा में हुए आतंकी हमले के चलते जो प्रतिक्रिया भारत ने दी है, उससे पाकिस्तान के पसीने छूटने लगे है। वहीं इजराइल ने आतंकवाद के खिलाफ बिना किसी शर्त भारत की मदद करने को कहा है। मदद भी ऐसी कि उसकी कोई सीमा नहीं हैं। आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की कूटनीति ने पाकिस्तान को अलग—थलग कर दिया है। जैसे ही इजराइल की तरफ से भारत को सीधे तौर पर मदद देने की घोषणा हुई तो थोड़ी देर बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान सामने आए। हमले के 5 दिन बाद इमरान ने सबूत मांगे और हमले की संभावना के डर से पलटवार करने की गीदड़ भभकी भी दी। 1998 में भारत ने जब पोखरण में परमाणु परीक्षण किया उसके बाद से जरा सा भी तनाव होने की स्थिति में पाकिस्तान हमेशा से परमाणु युद्ध की धमकी देता आया है। इमरान का खान द्वारा दिया गया बयान भी ऐसा ही था उन्होंने सीधे तौर पर तो नहीं लेकिन उनका अंदाज ऐसा ही था कि जंग कहां तक जाएगी ये अल्लाह ही जानता है। हालांकि भारत ने पहले सर्जिकल स्ट्राइक कर और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सेना को खुली छूट देने की घोषणा कर मोदी से यह स्पष्ट कर दिया है कि वह पाकिस्तान की इन गीदड़ भभकियों में आने वाले नहीं हैं।
पुलवामा में जिस तरह से सीआरपीएफ के जवानों पर आतंकी हमला कर उन्हें निशाना बनाया गया उसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई या फिर फौज की मिलीभगत सीधे तौर पर नजर आती है। इस हमले के बाद आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद ने इसकी ज़िम्मेदारी ली है। जैश का मुखिया मसूद अजहर पाकिस्तान के बहादुरपुर में रहता है और पाकिस्तानी सेना के द्वारा अपना इलाज करवा रहा है लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को इसकी जानकारी नहीं है तो यह इमरान खान की नीयत को दिखाता है.
भारत को मिल रहे समर्थन से घबराया है पाक
पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद दुनिया भर से भारत को मिल रही सहानुभूति और पाकिस्तान की लानत मलामत के बाद पाकिस्तान के नेताओं और मंत्रियों के होश फाख्ता हैं। वो संभावित हमले या सर्जिकल स्ट्राइक के डर से गीद़ड भभकी भी दे रहे हैं। पाकिस्तान सरकार में रेल मंत्री शेख रशीद अहमद ने कहा है कि पाकिस्तान ने चूड़िया नहीं पहन रखी हैं. तो कोई परमाणु बम की धमकी दे रहा है. पाकिस्तान की कोशिश भारत के हमले को मुसलमानों पर हमले के तौर पर पेश करने की है, रशीद ने कहा कि पाकिस्तान मुसलमानों का किला है जिसकी ओर आज सारी दुनिया के मुसलमान देख रहे हैं. स्पष्ट है कि पाकिस्तान घबराया हुआ है लेकिन पाकिस्तान को डर क्यों लग रहा है ? शायद ये बदले भारत की तस्वीर है। पाकिस्तान हर बार क्यों परमाणु हमले की धमकी देता है। दरअसल पाकिस्तान भारत के सामने युद्ध में टिकने की स्थिति में है ही नहीं इसलिए वह बार—बार इस तरह की धमकी देता है ताकि युद्ध न हो। पाकिस्तान को यह भली भांति पता है, कि परमाणु युद्ध की स्थित में पाकिस्तान का क्या हाल होगा, ये पूरी दुनिया को पता है, अमेरिका , फ्रांस, और तमाम देशों के समर्थन के बाद जैसे ही इजराइल ने कहा कि वो भारत तो हर तरह की सहायता देने को तैयार है तो पाकिस्तान को डर सताने लगा.
सर्जिकल स्ट्राइक करने में इजराइल को महारथ हासिल है
ये पूरी दुनिया जानती है, कि छोटे टेक्टिकल या सर्जिकल ऑपरेशन करने में इजराइल को महारत हासिल है. हमास और तमाम संगठनों से इजराइली फौज लोहा लेती रही है। पुलवामा हमले ने भारत को जैसे झकझोरा है उससे आम जनता बहुत दुखी है और चाहती है कि पाकिस्तान को किसी भी कीमत पर सबक सिखाया जाए, ये सबक सैन्य ताकत के दम पर हो, गुस्सा इस बात को लेकर है कि पिछले तकरीबन 30 सालों से पाकिस्तान लगातार भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देता रहा है और तमाम चेतावनियों के बावजूद भी पाकिस्तान के रवैये मे बदलाव नहीं आया है , सन 2000 के बाद से भारत में जितनी भी आतंकवादी घटनाएं हुई हैं उसमें पत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर पाकिस्तान का हाथ रहा है, भारत में हुई सभी आतंकवादी घटनाओं में कोई घटना ऐसी नहीं है जिसमें जिसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ न रहा हो।
चाहे सीमा पार से कश्मीर में भेजे जाने वाले आतंकवादी हो या फिर पंजाब का खालिस्तान आंदोलन, या फिर नेपाल या बांग्लादेश में भी छुप कर भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हुजी या उल्फा जैसे संगठन, इन सब के पीछे आईएसआई का हाथ जरूर रहा है। कश्मीर में जिस तरह से 1989 के बाद से भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा मिला और कश्मीरी पंडितों को चुन चुन कर घाटी से भगाया गया , उसने भारत की आत्मा पर गहरा घाव छोड़ा है । उसके बाद संसद पर हमला हो या फिर जम्मू कश्मीर विधानसभा पर अटैक, अक्षरधाम मंदिर हो या हैदराबाद में बम विस्फोट, या फिर 2008 में मुंबई पर सबसे बड़ा हमला। 
इन सबने भारत में एक विचार को बल दिया है कि पाकिस्तान को बातचीत के जरिए नहीं मनाया जा सकता । लिहाजा आज भारत में संयम से काम लेने की नसीहत देने वालों को भी तिरस्कार से देखा जाता है। लोगों में बहस का स्तर खतरनाक तौर पर आक्रामक हुआ है। जो शांति की बात कर रहा है उसे कायर समझा जा रहा है। आज फेसबुक या व्हाट्सअप पर ऐसे संदेशों की बाड़ आ गई है, जिसमें इजराइल की बहादुरी की खबरें होती हैं।
कारगिल के दौरान भी इजराइल ने भारत की फौरी तौर पर मदद की थी, जब पाकिस्तानी कारगिल और द्रास की उंची चोटियों पर बैठे थे तो उनको भगाना मुश्किल हो रहा था, तब इजराइल ने हवा से जमीन में मार करने के वाली लेजर तकनीक से चलने वाली सक्षम मिसाइलें दी थीं, जिनको मिराज 2000 विमान पर लगाया गया औऱ फिर बंकरों में छिपे पाकिस्तानी धुसपैठियों को उन्हीं की कब्रगाब बना दिया गया, साथ ही इजराइल ने उन्नत तकनीक वाले अपने टोही विमानों को लगाया जो किसी भी क्षेत्र की साफ तस्वीरें ले सकते थे. रिपोर्ट्स की मानें तो इस दौरान इजरायल ने न सिर्फ मानव रहित टोही विमान बल्कि अपनी मिलिट्री सेटेलाइट से इलाके की तस्वीरें भी भारत को उपलब्ध करवाईं थीं. देखा जाए तो इजराइल की ताकत का लोहा दुनिया मानती रही है, वहां की खुफिया एजेंसी मोसाद, जिसे 13 दिसंबर 1949 में बनाया गया था। इस एजेंसी को किलिंग मशीन के नाम से भी बुलाया जाता है, जो दुनिया भर में छिपे अपने दुश्मनों को ढूंढ-ढूंढ कर मार डालने के तौर पर विख्यात है।1972 में म्यूनिख ओलंपिक के दौरान जब आतंकवादियों ने इजराइल के नौ खिलाड़ियों को मार दिया था। तब मोसाद ने हमले में शामिल हर एक शख्स को ढूंढ-ढूंढ कर मार गिराया था, उसी के बाद से आतंकी मोसाद से पंगा लेने में डरते हैं। और ऑपरेशन थंडरबोल्ट को लोग आज भी याद करते है, जब युगांडा में 1976 में इजराइल के 54 नागरिकों को किडनैप बनाया गया था। माना जा रहा था कि युगांडा की सरकार आतंकियों के साथ हैं, तब मोसाद ने अपनी ताकत से 54 लोगों को मौत के मुंह से निकाल लिया था, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू उस ऑपरेशन थंडरबोल्ट में शामिल थे, माना जाता है, कि मोसाद के कमांडो के सौ लोगों के दस्ते ने सिर्फ सौ फीट की ऊंचाई पर प्लेन उड़ा कर उस रात जो कारनामा कर दिखाया, उससे दुश्मनों के होश फाख्ता हो गए थे। ऐसे में इजराइल द्वारा भारत को बिना शर्त मदद देने की घोषणा के बाद यह समझा जा सकता है कि पाकिस्तान के पसीने क्यों छूट रहे हैं।
 
पहली बार भारत के किसी पीएम ने दिया ऐसा बयान
ऐसा पहली बार हुआ है जबकि भारत के किसी प्रधानमंत्री ने एलानियां बयान दिया हो कि पाकिस्तान ने बहुत बड़ी गलती कर दी है। हमने फौज को पूरी छूट दे दी है. एक सर्जिकल स्ट्राइक ने कश्मीर से लेकर रावलपिंडी तक हलचल मचा दी थी, लिहाजा भारत की फौज की ताकत या फिर अमेरिका और इजराइल के खुल कर साथ आ जाने से पाकिस्तान की सेना का डरना स्वाभाविक है। जंग में नुकसान दोनों तरफ होता है., लेकिन जनता के मूड ने इस बार भारत सरकार को भी संबल दिया है. मोदी आजाद हिंदुस्तान के पहले प्रधानमंत्री है, जो पाकिस्तान के परमाणु हमले की गीदड़ भभकी से डरे नहीं हैं। पाकिस्तान का यही डर उसे और डरा रहा है