अगले 30 साल में हिंदू-विहीन हो जाएगा बांग्लादेश ?
   दिनांक 21-फ़रवरी-2019
- सतीश पेडणेकर                              
बांग्लादेश से जिस तरह के आंकड़े आ रहे हैं, उन्हें देखते हुए कहा जाने लगा है कि आने वाले 30 वर्ष में बांग्लादेश हिंदू-विहीन हो जाएगा। पिछले अनेक वर्ष से वहां हिन्दुओं का तेजी से गिरता आंकड़ा चिंताजनक है। 5 साल में करीब 53,00000 हिंदू वहां से पलायन कर चुके हैं
बांग्लादेश में कट्टरवादियों द्वारा ध्वस्त एक मंदिर। वहां ऐसी घटनाएं आम बात हो गई हैं।
पिछले दिनों नागरिकता संशोधन विधेयक पर टीवी पर एक बहस के दौरान उसके विरोधियों ने कहा, ‘‘इसकी कोई जरूरत ही नहीं थी। हमारे देश के बांग्लादेश के साथ अच्छे संबंध हैं और बांग्लादेश एक सेकुलर देश है। उससे यह कहा जा सकता है वह अपने देश के अल्पसंख्यकों के साथ अच्छा बर्ताव करे, तो वहां हिंदुओं का उत्पीड़न रुक सकता है। उन्हें भारत आने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।’’ ऐसा लगता है कि विधेयक के विरोधी किसी किताबी दुनिया में रहते हैं और उनका ख्याल है कि भारत के कहने भर से बांग्लादेश मान जाएगा। मगर इतिहास का अनुभव हमें बताता है कि ऐसा नहीं होता। बांग्लादेश से भारत में लंबे समय से घुसपैठ हो रही है, लेकिन बांग्लादेश उसे स्वीकार तक नहीं करता। वैसे किसी देश के संविधान के पंथनिरपेक्ष होने के मात्र से ही वह पंथनिरपेक्ष नहीं हो जाता है। वहां के बहुसंख्यक समाज के पंथनिरपेक्ष होने पर ही वह सही मायने में पंथनिरपेक्ष हो पाता है। बांग्लादेश अपने को पंथनिरपेक्ष देश कहता है, मगर किसी देश में अल्पसंख्यकों की आबादी चमत्कारिक रूप से विलुप्त होने लगे तो उसकी पंथनिरपेक्षता पर सवालिया निशान लग जाता है। यही बांग्लादेश के बारे में हो रहा है। वहां लगातार हिंदुओं और बौद्धों की संख्या कम हो रही है। इस्लामी कट्टरवादियों के उदय के बाद तो स्थिति गंभीर रूप लेती जा रही है।

 
रोजाना 632 हिंदू गायब हो जाते हैं
कुछ समय पहले बांग्लादेशी अर्थशास्त्री और कई दशकों से शोध करने वाले डॉ. अबुल बरकत ने बहुत सनसनीखेज दावा किया था। उनके अनुसार, ‘‘बांग्लादेश में रोजाना 632 हिंदू गायब हो जाते हैं, घट जाते हैं और साल में इनकी संख्या 2,30,612 हो जाती है। यानी हर साल बांग्लादेश में इतने हिंदू गायब हो जाते हैं। यह क्रम लंबे समय से निरंतर चल रहा है। इस कारण 1964 से 2013 के बीच अब तक बांग्लादेश में 1 करोड़ 10 लाख हिंदू गायब हो चुके हैं। या तो उन्हें मार दिया जाता है, या मुसलमान बना लिया जाता है या फिर वे पलायन कर जाते हैं। यदि ऐसा ही चलता रहा तो अगले 30 साल में बांग्लादेश में हिंदू रह ही नहीं जाएंगे। हिंदुओं के पलायन का मुख्य कारण मजहबी उत्पीड़न और भेदभाव रहा है।’’ ऐसा दावा करने वाले बरकत अकेले नहीं हैं। अमेरिका में रहने वाले बांग्लादेशी मूल के प्रोफेसर अली रियाज ने अपनी पुस्तक ‘गॉड विलिंग : द पॉलिटिक्स आॅफ इस्लामिज्म इन बांग्लादेश’ में यह उल्लेख किया है कि बीते 25 साल में करीब 53,00000 हिंदू वहां से पलायन कर चुके हैं।
 
ये आंकड़े इस हकीकत की ओर संकेत करते हैं कि बांग्लादेश भले ही पाकिस्तान से बगावत करके बना हो,भले ही अपने को पंथनिरपेक्ष देश कहता हो, लेकिन उसका मुस्लिम-बहुल होना उसे सहिष्णु नहीं रहने देता। पाकिस्तान की तरह वहां भी हिंदुओं को खत्म करने का षड्यंत्र लंबे समय से चल रहा है। नतीजतन बांग्लादेश में हिंदुओं की संख्या लगातार घटती जा रही है। वहां हिंदुओं पर निरंतर हमले हो रहे हैं। इन हमलों के बाद अल्पसंख्यक हिंदू परिवार दहशत के माहौल में जी रहे हैं या फिर पलायन करने पर मजबूर हैं।
9 प्रतिशत से भी कम हिंदू बचे हैं बांग्लादेश में
1947 में भारत और पाकिस्तान के विभाजन के समय पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में हिंदुओं की संख्या 28 प्रतिशत थी। 1971 में बांग्लादेश बनने के बाद 1981 में वहां पहली जनगणना हुई। उसमें हिंदू आबादी महज 12 प्रतिशत रह गई। वर्ष 2011 की जनगणना में हिंदुओं की आबादी घटकर नौ प्रतिशत से कम रह गई। इससे साफ है कि बांग्लादेश में हिंदू आबादी किस तरह विलुप्त होती जा रही है। सांख्यिकी मापदंडों, जैसे जनसंख्या वृद्धि दर और जन्मदर के आधार पर कई समाजशास्त्रियों का आकलन है कि इस आधी सदी में 40 से 80 लाख हिंदू बांग्लादेश से ‘विलुप्त’ हुए हैं।
 
हिंदुओं पर होता है अत्याचार
विभिन्न अध्ययनों और समाचार रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि वहां हिंदुओं पर अत्याचार, कन्वर्जन और उनकी भूमि हड़पने की घटनाएं इसके पीछे मुख्य कारण हैं। इसके अलावा काफी संख्या में मुस्लिम कट्टरतावादी तथा आतंकवादी संगठन हैं, जो कुछ इलाकों में उनका जीना मुहाल किए रहते हैं। अबुल बरकत के अध्ययन के अनुसार, ‘‘लगभग 12 लाख (43 प्रतिशत) हिन्दू परिवारों को इन कानूनों के जरिए प्रभावित किया गया है। इस कानून के तहत हिन्दू समुदाय के स्वामित्व की लगभग 20 लाख एकड़ जमीन को हड़प लिया गया, जो कि बांग्लादेश की जमीन का केवल 5 प्रतिशत है, लेकिन यह जमीन हिन्दू समुदाय के स्वामित्व के लगभग 45 प्रतिशत है।’’हिन्दुओं की जमीन हड़पने वालों में सत्तारूढ़ अवामी लीग सहित हर पार्टी के लोग हैं।’’ यह कानून जमीन हथियाने का मात्र एक तरीका है। किसी परिवार के एक सदस्य की मृत्यु होने या पलायन करने की स्थिति में उस परिवार की सारी संपत्ति हड़पने के लिए एक बहाने के रूप में इस कानून का प्रयोग किया जाता है। ऐसे कई उदाहरण हैं जिसमें प्रभावशाली राजनीतिक दलों, भू-माफियाओं और फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके हिन्दुओं की जमीन पर कब्जा किया गया। बांग्लादेश में हिन्दुओं की लगभग आधी से ज्यादा आबादी को अपनी जमीन से हाथ धोना पड़ा। इसलिए वे वहां से पलायन कर रहे हैं। भारत और नेपाल के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं की सर्वाधिक आबादी है। नेपाल में जहां करीब ढाई करोड़ हिंदू हैं, वहीं बांग्लादेश में करीब डेढ़ करोड़ हिंदू रहते हैं। 1947 के बाद बांग्लादेश में इस्लामीकरण के नाम पर लाखों हिंदुओं की हत्या हुई। इसे जानने के लिए तसलीमा नसरीन का उपन्यास ‘लज्जा’ पढ़ सकते हैं। एक मुस्लिम महिला और एक हिंदू महिला सहेलियां हैं। हिंदू महिला मुस्लिम महिला से कहती है कि मोहल्ले के लड़के उसकी बेटी को बहुत परेशान करते हैं तो मुस्लिम महिला कहती है मैं तुमसे कब से कह रही हूं कि मौलवी को बुला देती हूं तुम और तुम्हारी बेटी कलमा पढ़ लो। यानी मुसलमान बन जाओ। यह सब बांग्लादेश की पंथनिरपेक्षता को कठघरे में खड़ा करता है। यदि अलपसंख्यक जानमाल सुरक्षित न रहे और उन्हें देश छोड़ने को मजबूर होना पड़े तो पंथनिरपेक्षता के मायने ही क्या रह जाते हैं।