‘‘अध्यात्म एवं विज्ञान में नहीं है कोई टकराव’’
   दिनांक 22-फ़रवरी-2019
 
पुस्तिका का लोकार्पण करते (दाएं से दूसरे) श्री जयंत सहस्त्रबुद्धे एवं अन्य विशिष्ट अतिथि
‘‘देश में ज्ञान की जो प्राचीन परम्परा और विशेषता है, उससे हम थोड़ा दूर चले गए और अपने देश से ज्यादा पश्चिम को श्रेष्ठ मानने लगे हैं। अपने विज्ञान में तंत्र ज्ञान, यंत्र ज्ञान के साथ-साथ विज्ञान का आधुनिक क्षेत्र में विकास के अध्ययन की आवश्यकता है।’’
उक्त बात विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री जयंत सहस्रबुद्धे ने कही। वे पिछले दिनों जयपुर स्थित पाथेय सभागार में रज्जू भैया स्मृति व्याख्यानमाला को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विश्व धर्म सभा में स्वामी विवेकानन्द ने शिकागो में विज्ञान में भौतिक विज्ञान के साथ-साथ अध्यात्म विज्ञान के बारे में भी विश्व के सामने अपने विचार रखे थे। आधुनिक विज्ञान का सिद्धान्त, सनातन विज्ञान का प्रतिबिम्ब मात्र है।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित इसरो के वैज्ञानिक डॉ. जगदीश चन्द्र व्यास ने कहा कि भारत में धर्म एवं विज्ञान का टकराव नहीं है, जबकि पश्चिम में कहा जाता है कि धर्म और विज्ञान कभी साथ नहीं हो सकते। अध्यात्म एवं विज्ञान भारत की संस्कृति में आरम्भ से ही रहा है।