मोदी पांव पखारते हैं और वो पांव छुआते हैं
   दिनांक 25-फ़रवरी-2019

 
कुंभ स्नान के बाद स्वच्छता कर्मियों के पैर पखारते हुए प्रधानमंत्री  
गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या श्राप के कारण पत्थर की हो गई थी. भगवान श्री हरि के चरण क्या लगे, दोबारा जीवन आ गया. नारायण एक बनवासी के भेष में थे. और कहते हैं- न जाने की भेष में नारायण मिल जाए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब कुंभ में स्नान के बाद सफाई कर्मचारियों के पांव पखारे, तो ये सनातन धर्म की नई करवट थी. ऐसी करवट, जिसके लिए महात्मा गांधी प्रयास करते रहे. लेकिन ऊंच-नीच, छूआछूत पर यह प्रधानमंत्री की सर्जिकल स्ट्राइक थी. जाहिर है, जिस देश में पैऱ छुआने वालों का राज रहा हो, उन्हें इस से मिर्च लगेगी. भारतीय मानस और सनातन धर्म को लेकर नासमझ कांग्रेस पार्टी सिर्फ सियासत पर जिंदा है और उसे जाहिर तौर पर इसमें सियासत नजर आएगी.

 
मोदी बुजुर्ग महिला के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हुए (बाएं) राहुल गांधी बुजुर्ग महिला से पैर छुआते हुए 
आज देश में क्या माहौल है. सब लोग बखूबी वाकिफ हैं. हम जंग के मुहाने पर हैं. जम्मू-कश्मीर में आयरन हैंड (लौह प्रहार) नीति के साथ सुरक्षा बल डट गए हैं. देश को लूटने वाले कानून के शिकंजे में हैं. ऋण लेकर घी पीने वालों की संपत्तियां जब्त हो रही हैं. कांग्रेस, पाकिस्तान और हाफिज सईद एक सुर में बोल रहे हैं और राष्ट्र दूसरे सुर में. ऐसे समय में प्रधानमंत्री रविवार को कुंभ स्नान के लिए प्रयागराज पहुंचे. कुंभ की डुबकी के बाद उन्होंने अपनी रुद्राक्ष की माला का पवित्रीकरण किया. ये फर्जी जनेऊ पहनने वालों की समझ से बाहर होगा कि रुद्राक्ष की माला का पवित्रीकरण गंगा स्नान के समय करना जरूरी होता है. ये भी शायद देश ने पहली बार देखा कि मोदी रुद्राक्ष की माला धारण करते हैं. ऐसा इसलिए कि वह इसे कोट के ऊपर नहीं पहनते. स्वाभाविक है, ये आस्था का मामला है, प्रदर्शन का नहीं. फिर इसके बाद जो हुआ, उसकी कल्पना भी भारतीय राजनीति में नहीं की जा सकती. दलितों, शोषितों और वंचितों के नाम पर राजनीति करने वाले, वोट बटोरने वाले तो सोच भी नहीं सकते कि देश का प्रधानमंत्री कुंभ में सेवा कार्य करने वाले सफाई कर्मचारियों के पांव पखारेगा.

 
नवजोत सिंह सिद्धु सोनियागांधी के पैर छूते हुए
राजनीतिक दृष्टि से भी देखें, तो समझ पाएंगे कि सियासत के मायने बदल गए हैं. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बहुत खास से आर.के. धवन. लेकिन थे एक सरकारी नौकर. लेकिन इंदिरा की कैबिनेट के कई मंत्री धवन के पैर छूते थे. क्यों ? इसलिए कि इंदिरा की पसंद की लिस्ट धवन तैयार करते थे. धवन जानते थे कि इंदिरा कब क्या सोच रही हैं. ऐसी तमाम तस्वीरें आपके सामने इस आर्टिकल के साथ पेश की जा रही हैं, जो दर्शाती हैं कि चरण छुओ राजनीति कैसे और कब पनपी. कैसे अब देश की राजनीति एक परिवार की चरण वंदना से सफाई कर्मचारी के प्रधानमंत्री द्वारा पैर पखारने तक पहुंच गई है.

 
राहुल गांधी के पैर छूते हुए एक अन्य व्यक्ति 
स्वच्छता अभियान हो या समरसता. मोदी ने गांधी के काम को सही मायने में आगे बढ़ाया है. गांधी को विदेश में पढ़ाई के लिए जाने के कारण मोढ़ बनिया समाज ने बिरादरी बाहर कर दिया था. दक्षिण अफ्रीका में अपने रंग के कारण गांधी को स्टेशन पर गोरे के हाथ मार खानी पड़ी थी. गांधी ने अस्पृश्यता को अनुभव किया था. ठीक उसी प्रकार नरेंद्र मोदी भी देश के दिल में तो बस गए, लेकिन तथाकथित सेक्युलर, लिबरल्स के लिए हमेशा अछूत बने रहे. मोदी का ये कदम एक तरह से देश की जनता और खासतौर पर उनकी पार्टी के लिए संदेश है.