नया भारत- हम मारेंगे और घर में घुसकर मारेंगे
   दिनांक 26-फ़रवरी-2019
 
भारत ने पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर हवाई हमला कर बलिदान हुए भारत मां के वीर सपूतों का बदला ले लिया है। हमारे बलिदानी जवानों की तेहरवीं से पहले यानी 12 वें दिन ही हिसाब चुकता. भारत ने यह हमला कर बता दिया है कि या तो पाकिस्तान सुधर जाए नहीं तो हम सुधार देंगे
भारतीय वायुसेना ने दिखा दिया कि यह नया भारत है. घर में घुसकर मारेगा. गुलाम कश्मीर में पाकिस्तान फौज की हिफाजत में चल रहे एक दर्जन से ज्यादा आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त कर देने के बाद कम से कम इस्लामाबाद, मसूद अजहर जैसे लोग भूल जाएं कि वे कुछ भी करके बच सकते हैं.
हमने आपको पहले ही बता दिया कि पुलवामा हमले के बाद भारत त्रिशूल नीति पर काम कर रहा है. तीनों नीतियों की मार पाकिस्तान पर ऐसी पड़ी है कि उसकी कमर टूट गई है. 
1. पाकिस्तान में टमाटर से लेकर दाल तक के लिए हाहाकार मचा हुआ है. ये आर्थिक नाकेबंदी का नतीजा है. पाकिस्तान पर ये आर्थिक घेराबंदी आने वाले समय और भी भारी पड़ने वाली है. न के बराबर विदेशी मुद्रा भंडार के साथ अंतिम सांस ले रहे पाकिस्तान को विश्व बैंक से मदद न मिल पाए, इसके लिए नई दिल्ली पूरी कोशिश कर रही है.
2. कूटनीतिक तौर पर इससे बड़ी सफलता क्या होगी कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान के सबसे बड़े खैरख्वाह चीन को भी पुलवामा हमले की निंदा के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने पड़े. तब जबकि उसके दुलारे आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद का नाम उसमें शामिल था. अमेरिका और रूस के राष्ट्रपति भारत के जवाब देने के अधिकार की वकालत करते हैं, तो ये नये भारत की ही पहचान है.
3. हमने आपको बताया था कि भारत सैनिक कार्रवाई करेगा. उसमें भी सबसे मुफीद विकल्प हवाई हमले का है. ऐन यही हुआ भी. मिराज-2000 विमानों ने लेजर गाइडेड बमों से कारपेट बांबिंग करके आतंकवादी ठिकानों को तबाह कर दिया. भारत के अलावा इस्राइल या अमेरिका ही आतंकवादी ठिकानों पर इस तरह की कार्रवाई करते रहे हैं.
 
क्यों बढ़े इतने हौसले
बात सिर्फ एक हवाई हमले तक ही सीमित नहीं है. पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ ये निर्णायक जंग की शुरुआत है. पाकिस्तान तीन बार पहले भी आमने-सामने की जंग में मुंह की खा चुका है. बांगलादेश युद्ध के बाद पाकिस्तान की सैन्य नीति में एक अहम बदलाव आया. पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व समझ गया कि वह परंपरागत युद्ध में भारत से कभी जीत नहीं सकता. तभी से पाकिस्तान की नीति छाया युद्ध यानी प्राक्सी वार की बन गई. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को इसकी कमान दी गई. आईएसआई ने सबसे पहले पंजाब में उग्रवाद भड़काया. जब पंजाब में आतंकवाद कुचल दिया गया, तो आईएसआई ने 18 साल की अपनी तैयारी को कश्मीर में अंजाम दिया. कश्मीर से रातों-रात हिंदुओं को बेघर कर दिया गया. ये सब हो रहा था और भारत सरकार मजबूरों की तरह तमाशा देखने के अलावा कुछ नहीं कर सकी. हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर ए तैयबा, जैश ए मोहम्मद, इंडियन मुजाहिदीन, सिमी जैसे नए-नए मुखौटे लगाकर पाकिस्तान ने भारत के हर कोने में आतंकवाद और तोड़फोड़ की गतिविधियों को अंजाम दिया. 2007 से तत्कालीन यूपीए सरकार में बैठे कुछ बाजीगर मंत्रियों के चलते तो आईएसआई की लाटरी ही लग गई. देश पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से तो लड़ नहीं पा रहा था, दूसरी तरफ यूपीए सरकार के मंत्री हिंदू आतंकवाद का फर्जी जिन्न तैयार करने में लगे थे. कारगिल युद्ध के अलावा पाकिस्तान के खिलाफ कहीं भी और कभी भी हम दृढ़ निश्चय नजर नहीं आए. चाहे संसद पर हमला हो या मुंबई पर आतंकवादी हमला, हम एक पीड़ित की भूमिका में रहे. पलटकर जवाब देने की न तो कभी इच्छाशक्ति नजर आई और न ही देश को उस नेतृत्व से उम्मीद थी.
 
नया भारत
2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद देश की अपेक्षाएं ही बदल गईं. उड़ी पर हमले जैसे आतंकवादी हमलों का भारत पहले भी शिकार होता रहा. लेकिन ये पहला मौका था, जब देश चाहता था कि जवाब दिया जाए और जवाब दिया गया. भारतीय सेना के कमांडों सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देकर ये बता चुके थे कि हरकत करोगे, तो घर में घुसकर मारेंगे. लेकिन भारत विरोध के दम पर अंतिम सांसें ले रहा एक कृत्रिम देश पाकिस्तान बाज कहां आने वाला. पुलवामा में आतंकवादी हमले की हिमाकत कर बैठा. ये नया भारत है. सबको एक ही उम्मीद, एक ही अपेक्षा. सबक सिखाओ. क्या पहले कभी आपने देश की जनता में ये अपेक्षा और ये विश्वास देश के नेतृत्व पर देखा था. इससे भी बड़ी चुनौती है, इस विश्वास पर खरा उतरना. मिराज हमारे पास पहले भी थे. लेजर गाइडेड बम हमारे पास पहले भी थे. लेकिन फर्क सिर्फ इतना आया कि मजबूत इरादे के साथ बता दिया गया कि ये सिर्फ प्रदर्शनी का सामान नहीं है.
 
आगे क्या हो सकता है
गुलाम कश्मीर में चल रहे आतंकवादी शिविरों पर हवाई हमला मुझे लगता है कि शुरुआत है. ये ऐसे अभियानों की शुरुआत है, जिसमें चुन-चुन कर उन तत्वों का सफाया किया जाएगा, जो पाकिस्तान में बैठकर भारत में खून का खेल खेलना चाहते हैं. हर उस ताकत और संगठन को अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए, जिसके दिल में भारत को लेकर जरा सी भी बदी है. इसमें पाकिस्तान फौज आड़े आएगी, तो भारतीय सेना हमेशा की तरह उसे सबक सिखाने के लिए तैयार है. अंतर इस बार सिर्फ इतना है कि उन्हें पूरी छूट है.
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