मिराज उसी कंपनी ने बनाया जिसने बनाया राफेल
   दिनांक 27-फ़रवरी-2019
राफेल डील पर लगातार सवाल उठा रही कांग्रेस को पता होना चाहिए मिराज उसी कंपनी ने बनाया है जिसने राफेल। मिराज का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के आतंकी संगठनों को तबाह कर भारत ने दुनिया को दिखा दिया है कि अब बस। अब भारत चुप नहीं रहेगा। जिस भाषा में बात होगी उसी भाषा में जवाब मिलेगा
देश बदल रहा है और देश की रणनीति भी बदल रही है। पहले पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों के हमले की कड़ी निंदा की जाती थी लेकिन अब आतंकियों को उन्हीं की भाषा में जवाब दिया जा रहा है। अब भारत पाकिस्तान के घर में घुस कर आतंकियों को मार रहा है। भारत ने पुलवामा में 14 फरवरी को हुए आतंकी हमले के 12 वें दिन मंगलवार तड़के पहला हिसाब करते हुए पाकिस्तान के होश उड़ा दिए। भारतीय वायुसेना के 12 मिराज-2000 विमानों ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से लेकर अंदरूनी प्रांत खैबर पख्तुनख्वा के बालकोट में स्थित आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए- तोएबा व हिजबुल मुजाहिदीन के कैंपों को तबाह कर दिया। इन कैंपों में सो रहे लगभग 350 आतंकी वहीं ढेर हो गए। इन पर मिराज विमानों से 1000 किलो के बम गिराए गए। भारत की इस जवाबी कार्रवाई से आतंकवादियों और पाकिस्तान दोनों में हडकंप मच गया है।
मिराज-2000 विमान का जलवा
इस ऑपरेशन के लिए हमारी वायुसेना ने मिराज- 2000 डीप पेनिट्रेशन स्ट्राइक एयरक्राफ्ट (लड़ाकू विमान) का इस्तेमाल किया है। इस लड़ाकू विमान की सबसे खास बात है कि यह किसी भी देश की सीमा के अंदर जाकर मार कर सकता है। यह बड़ी सटीकता के साथ सीमा के अंदर धुसकर अपने टारगेट को ध्वस्त करने का दमखम रखता है। ये हवा से जमीन पर मार कर सकता हैं। इसके साथ ही यह अपने साथ एयर टू सर्फेस मिसाइल भी संभाल सकता है। मिराज- 2000 लड़ाकू जिसे भारतीय वायु सेना ने वज्र नाम दिया है, का निर्माण फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने किया है। यह वही कंपनी जिसने राफेल को बनाया है। मिराज-2000 सिंगल इंजन फाइटर प्लेन विमान की लंबाई 14.36 मीटर है। विमान का वजन 7500 किलो है। मिराज-2000, 6000 किलोग्राम वजन की मिसाइल के साथ 2495 किमी प्रतिघंटा की अधिकतम स्पीड से उड़ान भर सकता है। यह 59 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है। मिराज-2000, 125 राउंड गोलियां प्रति मिनट दागता है। यह 68 मिमी के 18 रॉकेट प्रति मिनट दागता है। इसी मिराज 2000 लड़ाकू विमान ने कारगिल युद्ध में बड़ी भूमिका निभाई थी। अक्तूबर 1982 में भारत ने 36 सिंगल सीटर सिलेंडर मिराज 2000 और 4 ट्वीन सीटर मिराज 2000 का ऑर्डर दिया था। इसे 1986 में औपचारिक रूप से वायुसेना में शामिल किया गया था। साल 2015 में अपग्रेडेड मिराज-2000 को भारतीय वायुसेना को सौंपा गया। अपग्रेडेड विमानों में नए राडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगा है। इससे इन विमानों की मारक और टोही क्षमता में भारी इजाफा हो गया है। पहली बार 1970 में उड़ान भरने वाला मिराज 2000 फ्रेंच मल्टीरोल, सिंगल इंजन चौथी पीढ़ी का फाइटर जेट है। ये फाइटर जेट विभिन्न देशों में सेवा दे रहा है। मिराज-2000 एक साथ हवा से जमीन और हवा से हवा में भी मार करने में सक्षम है।
 
विमान की विशेषता
खरीद के साढ़े तीन दशक बाद वायुसेना का लड़ाकू विमान मिराज एक बार फिर अपनी काबिलियत को साबित करने में सफल रहा है। करगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाले मिराज लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान पर ऐसा कहर बरसाया है, जिसका जवाब पाकिस्तान में बैठे आकाओं के पास नहीं है।
सोची समझी रणनीति का हिस्सा था मिराज का इस्तेमाल
ऑपरेशन में 12 मिराज-2000 विमान का इस्तेमाल वायुसेना ने कुछ खास वजहों से भी किया है। हमले के लिए वायुसेना द्वारा मिराज-2000 विमानों का चयन करना भी सोची समझी रणनीति का हिस्सा था। भारतीय वायुसेना की रीढ़ समझे जाने वाले मिराज- 2000 लड़ाकू विमान डीप पेनिट्रेशन स्ट्राइक करने की क्षमता रखते हैं।
मिराज 2000 में उन्नत एवियोनिक्स, आरडीवाई रडार और नए सेंसर और कंट्रोल सिस्टम का उपयोग करके नए कई निशानों को एक साथ साधना, हवा से जमीन और हवा से हवा में भी मार करने में माहिर है। यह पारंपरिक और लेजर गाइडेड बम को भी गिराने में सक्षम है। मिराज 2000 सिंगल-सीटर या टू-सीटर मल्टीरोल फाइटर के रूप में उपलब्ध है। इस विमान के कॉकपिट में नियंत्रण के लिए थ्रोटल और स्टिक का प्रयोग किया जाता है। मिराज 2000 में थेल्स वीईएच 3020 हेड-अप डिस्प्ले और पांच कैथोड रे ट्यूब मल्टीफ़ंक्शन एडवांस्ड पायलट सिस्टम इंटरफ़ेस (एपीएसआई) डिस्प्ले लगे हुए हैं। इसके कॉकपिट में लगी स्क्रीन में उड़ान नियंत्रण, नेविगेशन, लक्ष्य को साधने और हथियार फायरिंग से संबंधित डेटा प्रस्तुत करने की शानदार क्षमता है। सेंसर और सिस्टम प्रबंधन डेटा दो रंगीन डिस्प्ले पर दिखता है।
 
मिराज 2000 में हथियारों को ले जाने के लिए नौ हार्डपॉइंट दिए गए हैं। जिसमें पांच प्लेन के नीचे और दो दोनों तरफ के पंखों पर दिया गया है। सिंगल-सीट संस्करण भी दो आंतरिक हैवी फायरिंग करने वाली 30 मिमी बंदूकों से लैस है। हवा से हवा में मार करने वाले हथियारों में मल्टीगेट एयर-टू-एयर इंटरसेप्ट और कॉम्बेट मिसाइलें शामिल है। इसके अलावा भी यह कई प्रकार के हथियार ले जाने में सक्षम है।
कुल मिलाकर मिराज-2000 ने भारतीय वायुसेना की रक्षा पंक्ति न सिर्फ मजबूत किया है बल्कि दुश्मनों को मुहतोड़ जवाब देने में हर समय सक्षम है।
 
(लेखक राजस्थान की मेवाड़ यूनिवर्सिटी में डायरेक्टर और टेक्निकल टूडे पत्रिका के संपादक हैं )