कर्ज में दबा पाकिस्तान बस एक धक्के में बिखर जाएगा
   दिनांक 27-फ़रवरी-2019

 
पाकिस्तान बिखर रहा है. आर्थिक रूप से दिवालिया हो चुका है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से अगर बेल आउट पैकेज न मिला, तो पाकिस्तान अपनी अंतरराष्ट्रीय देनदारी पूरी नहीं कर सकेगा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दीवालिया घोषित हो जाएगा. ऐसे में भारत के लिए मौका है. सिर्फ भारत विरोध की कमजोर नींव पर टिका पाकिस्तान किसी दबाव को झेलने की सूरत में नहीं है. जंग हुई, तो पाकिस्तान कई मुल्कों के रूप में बिखर जाएगा. इतिहास में ऐसा मौका भारत को पहले कभी नहीं मिला. तो क्या इस नारे के साकार होने का समय आ गया है कि एक धक्का और दो, पाकिस्तान तोड़ दो...
कटोरा लेकर घूम रहा पाकिस्तान
सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का कुल 73.5 फीसद सरकारी कर्ज हो चुका है. ये अगले साल तक बढ़कर 75 फीसद हो जाने का अनुमान है. पिछले वित्त वर्ष में पाकिस्तान का करंट एकाउंट डेफिसिट (चालू खाता घाटा) जीडीपी का 5.7 फीसद हो चुका है. तीन ट्रिलियन डॉलर सर्कुलर ऋण है. सर्कुलर ऋण बड़ी मजेदार चीज है. जरा समझिए. श्रीमान बी असल में श्रीमान ए के कर्जदार हैं. लेकिन श्रीमान बी श्रीमान सी के कर्जदार हैं. श्रीमान सी असल में श्रीमान ए के कर्जदार हैं. इस प्रकार कर्ज का चक्रव्यूह है, जिसमें कर्ज लेकर कर्ज चुकाया जाता है. दुनिया भर में कटोरा लेकर घूम रहे पाकिस्तान के पास सिर्फ आईएमएफ का चारा है. आईएमएफ ने पाकिस्तान को बेल आउट के लिए कड़ी शर्तें रखी हैं. 1980 के दशक से अब तक 13 बार पाकिस्तान को इसी तरीके ने दिवालिया होने से बचाया है. लेकिन इस बार इतना आसान नहीं है. अमेरिका की एक प्रभावशाली लॉबी आईएमएफ पर पाकिस्तान को बेल आउट पैकेज न देने का दबाव बनाए हुए है. भारत भी बिना सार्वजनिक मंच पर आए, इसी कोशिश में लगा है. पुलवामा में आतंकवादी हमले के बाद तो ये कोशिश और तेज हो गई हैं.
इससे बेहतरीन मौका नहीं
भारत के लिए पाकिस्तान नाम की इस समस्या से हमेशा के लिए निजात पाने का इससे अच्छा मौका नहीं होगा. आर्थिक नजरिये से आप देख चुके हैं. पाकिस्तान एक दिन भी जंग लड़ने की आर्थिक स्थिति में नहीं है. अब जरा कूटनीतिक दृष्टि से देखें. दुनिया का हर मुल्क पुलवामा में आतंकवादी हमले के बाद भारत के समर्थन में खड़ा है. अमेरिका, रूस, नाटो देश समेत लगभग सभी ताकतें पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर भारत की कार्रवाई का समर्थन कर रही हैं. चीन भी दुनिया के मिजाज को समझ रहा है और वह अपने दोस्त के बचाव की हालत में नही है. सैन्य दृष्टि से देखें, तो भी ये सबसे माकूल मौका है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को किसी भी किस्म की सैन्य सहायता पर रोक लगाई हुई है. रूस की यह नीति भी है और भारत के साथ समझौता भी है कि वह पाकिस्तान को ऐसा कोई हथियार नहीं देगा, जो भारत के खिलाफ युद्ध में इस्तेमाल किया जा सकता हो. बस दुनिया में सिर्फ चीन बचा है, जो चोरी-छिपे पाकिस्तान को सैन्य सहायता दे सकता है. लेकिन चीन के पास अभी इतनी उन्नत तकनीक नहीं है कि पाकिस्तान बीजिंग से कोई गेमचेंजर टाइप का हथियार हासिल कर सके.
अंदरूनी हालात भी आपके हक में
पाकिस्तान में अंदरूनी हालात भी बिगड़े हुए हैं. सिर्फ फौज के दम पर पाकिस्तान एक मुल्क के रूप में खड़ा है. पश्तून वजीरिस्तान में पाकिस्तान फौज द्वारा किए गए खून-खराबे को भूले नहीं है. पचास हजार से ज्यादा पश्चून अफगानिस्तान भाग गए हैं, लेकिन वे हथियारबंद हैं और लौटने की फिराक में हैं. युद्ध की सूरत में पाकिस्तान को वजीरिस्तान में पश्तून बगावत का सामना करना पड़ेगा. जो लंबे समय से अजादी की मांग करते रहे हैं. बलूच लगातार पाकिस्तान से अलग होने की कोशिश करते रहे हैं. बलूचिस्तान की मांग को लेकर सशस्त्र और राजनीतिक आंदोलन चल रहे हैं. युद्ध की हालत में बलूचिस्तान खुद को आजाद घोषित कर दे, तो कोई ताज्जुब नहीं होना चाहिए. गिलगित बालटिस्तान में भी यही हालात हैं. पाकिस्तान फौज के जुल्म से आजिज ये इलाके आजादी चाहते हैं. सिंध में आजादी के बाद से ही आजादी की आग सुलगती रही है.
कुल मिलाकर आप देखेंगे, तो पाएंगे कि सैन्य, कूटनीतिक और आर्थिक, तीनों ही मोर्चे भारत के हक में हैं. किसी भी युद्ध को जीतने के लिए इन तीनों ही मोर्चों पर आपका ताकतवर होना जरूरी है. पुलवामा पर आतंकवादी हमले के बाद अगर भारतीय सेना ने जवाब देने के लिए 12 दिन का समय लिया, तो समझा जा सकता है कि हर स्तर पर तैयारी हो चुकी होगी. सेना का मोबलाइजेशन, हथियार, गोला-बारूद को चौकस करने का काम, तेल का भंडारण, आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता तक सब कुछ. कच्छ में जिस तरीके से भारतीय सेना जासूसी करते ड्रोन को इस्राइली मिसाइल से मार गिराया, वह भी तैयारियों का स्तर बताता है. पाकिस्तान की भारतीय वायु सीमा में घुसपैठ पर मिनटों के अंदर जवाब देने से भी पता चलता है कि हम जंग के लिए तैयार हैं. युद्ध की कला में चीनी जनरल सुन झू ने भी कहा है-कोई भी जंग शुरू होने से पहले जीती जाती है. इस बार अगर आप लड़ेंगे, तो ये शर्तिया जीती हुई जंग है, जो दुनिया का भूगोल बदल सकती है.