खौफ में है पाकिस्तान बस एक वार और ...
   दिनांक 28-फ़रवरी-2019
 

 
 'क्षमाशील हो रिपु-समक्ष
    तुम हुए विनीत जितना ही,
दुष्ट कौरवों ने तुमको
कायर समझा उतना ही।
सच पूछो, तो शर में ही
बसती है दीप्ति विनय की,
सन्धि-वचन संपूज्य उसी का जिसमें शक्ति विजय की।'
ये पंक्तियां भारतीय सेना के ऑफिशयल ट्विटर एकाउंट एडीजीपीआई पर शेयर की गयीं। ये कल के लिये भी थी, और भारतीय पायलट के पकड़े जाने के बाद भी सही थीं। यहां यह कहना कतई सही नहीं है कि एक दो सर्जिकल स्ट्राइक से पाकिस्तान सुधरेगा, हमको एक निर्णायक पाकिस्तान नीति बनानी होगी, जब तक हम ये मान कर नही चलेंगे कि पाकिस्तान एक दुश्मन देश है, जिसकी नीति भारत को हजार घाव देने की है, तब तक पाकिस्तान ऐसा ही करता रहेगा।
सम्मान से रहने की एक कीमत होती है, जो यह कीमत चुकाता है, उसका मान दुष्ट भी करते हैं., पाकिस्तान एक दुष्ट देश है, वो वही भाषा समझेगा जो वो जानता है, वो भाषा मारकाट की है., लिहाजा हमारे एक जांबाज पायलट को बंदी बनाए जाने से देश का विश्वास नहीं हिलना चाहिए, जंग में हिम्मत कायम रखना या हिम्मत तोड़ना ही मायने रखता है. 2 सालों में 2 सर्जिकल स्ट्राइक ने जो कर दिखाया वो इमरान खान या आसिफ गफूर का चेहरा पढ़ कर जान सकते हैं।
भारतीय वायु सेना की सर्जिकल स्ट्राइक सिर्फ एक कार्रवाई नहीं है, ये एक तीर से कई निशाने साधने वाली बात है। ये हमला पाकिस्तान में कितने अंदर तक जाकर किया गया, ये साबित करता है, कि मोदी में दम है, जो आज की हवाई लड़ाई की पेचीदिगियां समझते हैं वह जानते हैं, कि आज उस तरह के जहाज मौजूद हैं जिनके किसी जगह जाकर हमला करने की जरूरत नहीं है। बल्कि बियौंड विजुअल रेंज मिसाइलों से सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठकर भी हमला किया जा सकता है। लेकिन उसके बावजूद भी यदि मिराज-2000 विमानों ने अंदर जाकर हमला किया तो ये सामरिक रणनीति का हिस्सा है, ये वो संदेश है, जिसे भारत ने दिया कि यदि छेड़ोगे तो छोड़ेगे नहीं, भारत ने लंबे समय से खुद ही नियंत्रण रेखा को न पार करने का नियम ओढ़ा हुआ था, कारगिल में भी हम एलओसी के पार नहीं गए थे, लेकिन एलओसी को पार करने के दूरगामी सामरिक हित हैं। इससे भारतीय फौज का खौफ फैलेगा। दूसरा बड़ा लक्ष्य जो 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट हमले से मिला वो ये कि भारतीय सरकार ने पहली बार इस बात को खुलकर स्वीकार किया कि यह सर्जिकल स्ट्राइक आधिकारिक तौर पर की गई है , ये अपने आप में बड़ी बात है। सीमा पार जाकर ऑपरेशन करने के अपने खतरे हैं। यदि भारतीय सरकार स्वीकार करती है तो ये उसकी दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है. जिसका भाव पिछले 30 सालों में देखने को मिल रहा था, फौज पहले भी इस बात को मानती रही है कि छोटे ऑपरेशन सीमा पार या एलओसी के पार जाकर भारतीय फौज करती रही है, लेकिन कभी भी किसी भी भारतीय सरकार ने इस बात को स्वीकार नहीं किया। नरेंद्र मोदी सरकार को इस बात का श्रेय दिया जाना चाहिए, जिसने सर्जिकल स्ट्राइक का खौफ पाकिस्तान में पैदा किया कि यदि पाकिस्तान उसी रास्ते पर रहा तो भारत पीछे नहीं हटेगा, 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 का बालाकोट का हमला एक बानगी है
 
यदि आप गौर करें तो पायेंगे कि परमाणु हथियारों का डर दिखाकर पाकिस्तान सफलता पूर्वक भारत को हमला करने से रोकता रहा है. हम लोग इस बात से डरते रहे हैं कि पाकिस्तान का क्या है, वो तो भूखा नंगा देश है, वो तो बर्बाद होने के लिये तैयार है, लेकिन जंग की स्थिति में भारत का नुकसान ज्यादा होगा, वैसे भी हिंदुओं को अर्जुन ग्रंथि का रोग सदियों से लगा हुआ है. निर्णायक मौके पर दुश्मन के सामने शांति और भाईचारे की दुहाई देना हमारी पुरानी आदत रही है. महाभारत में वासुदेव को विराट रूप दिखाना पड़ा , आज भी दुहाई देनी पड़ती है।
बालाकोट भारतीय रणनीति के बदले चेहरे का दस्तखत है, अगर हम गौर करे तो पायेगें कि भारत पाकिस्तान दोऩो परमाणु हथियार समपन्न देश हैं। लेकिन जो हुआ वो पहले कभी नही हुआ, खासकर परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच में कभी नहीं हुआ, जिसमें एक दूसरे मुल्क में जाकर इस तरह का हमला किया गया हो , सोवियत संघ और अमेरिका के बीच में बीच शीत युदध और तनाव सालों चला, यूरोप में नाटो और सोवियत संघ की सेनाएं एक दूसरे पर हथियार ताने सालों खड़ी रहीं. लेकिन किसी भी पक्ष ने एक दूसरे के खिलाफ हवाई हमला नहीं किया था, यह माना जाता रहा कि नाटो के तमाम हथियार, जैट और विमान या फिर सोवियत संघ के परमाणु अस्त्रों का मुख एक दूसरे की तरफ रहा करता था।
 
1971 के युद्ध में भारतीय सेना ने एलओसी को पार किया था लेकिन पाकिस्तान के परमाणु बम बनाने के बाद कभी भारतीय सेनाएं सीमा पार नहीं गईं, इससे पाकिस्तान का दुस्साहस बढ़ता रहा, पिछले तकरीबन 45 साल में यह काम नहीं हुआ, पाकिस्तान लगातार धमकी देता रहा कि वो परमाणु बम से हमला कर सकता है। इस बार भी जब तनाव बढ़ रहा था तो पाकिस्तान के कई नेताओं और हुक्मरानों ने फिर वही बंदर घुड़की दिखाई। लेकिन मोदी सरकार नहीं डरी,और बहुत ही कैलकुलेटेड तरीके से इसे अंजाम दिया, इस हमले ने उस झूठ की हवा निकाल दी है
दूसरी बड़ी कामयाबी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिये अपने पक्ष में समर्थन खड़ा करना रहा, यह साबित करता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की धाक है। इस हवाई हमले के बाद कोई भी बड़ा देश पाकिस्तान के साथ खड़ा नहीं हुआ। चीन का रवैया पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका रहा, चीन का यह कहना कि भारत और पाकिस्तान को संयम बरतना चाहिये, पाकिस्तान के लिये झटका है।
चीन—पाकिस्तान में होने वाले व्यवसाय के लिए यह जरूरी है कि भारत और पाकिस्तान के बीच में शांति रहे, चीनी व्यवसाय को फायदा मिले इसके लिये जरूरी है कि शांति रहे। चीन ने हाल ही में पाकिस्तान की कुछ आर्थिक मदद की थी जिसके चलते पाकिस्तान के हालात थोड़ा बेहतर स्थिति में है लेकिन पाकिस्तान को पता है कि किसी भी तरह के युद्ध में जाने से उस पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा जो कि उसकी स्थिति पहले से खराब है यह खतरा उठाने की स्थिति में नहीं है।