वादा तो किया पर पूरा कैसे करेंगे राहुल गांधी
   दिनांक 04-फ़रवरी-2019
पटना की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि अगर उनकी सरकार आई तो हर परिवार को 10 हजार रुपए महीना दिया जाएगा। उन्होंने वादा तो कर दिया लेकिन पूरा कैसे होगा
एक फरवरी को पेश अंतरिम बजट में केंद्र सरकार ने 12 करोड़ किसान परिवारों को छह हजार सालाना सहयोग देने का ऐलान जब किया तो विपक्ष को जैसे जवाब ही नहीं सूझ रहा था। प्रधानमंत्री मोदी विरोधी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हों या फिर कोई और, किसी को अंतरिम बजट पर प्रतिक्रिया ही नहीं सूझ रही थी। लेकिन लगता है कि अब विपक्षी नेता बजट से लगे सदमे से उबरने लगे हैं। तभी तो पटना की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कह दिया कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो हर परिवार को 10 हजार रूपए महीने की सहायता देगी। लेकिन सवाल यह है कि अगर वे भी मोदी सरकार की तरह बारह करोड़ परिवारों को ही सहायता देने योग्य मानते हैं तो यह रकम ही अकेले बारह लाख करोड़ महीना होगी। यानी राहुल गांधी की बातों पर जनता ने भरोसा किया और उन्हें सत्ता तक पहुंचा दिया तो गरीबों को हर 144 लाख करोड़ रूपए की भारतीय खजाने से देना पड़ेगा। दिलचस्प यह है कि खुद भारत सरकार ने स्वीकार किया है कि जीएसटी व्यवस्था लागू होने के बाद भारत सरकार की सालाना राजस्व वसूली बढ़कर करीब बारह लाख करोड़ हो गई है। जाहिर है कि राहुल गांधी ने पटना के गांधी मैदान में लोगों से जो वादा किया है, उसे लागू कर पाना आसान नहीं होगा। अगर वह लागू होगा भी तो कुछ परिवारों पर ही लागू हो पाएगा। फिर गरीबी के आंकड़ों में खेल होगा, भारत सरकार यह साबित करने की कोशिश करेगी कि कितने परिवार गरीब हैं? जाहिर है कि वह संख्या कुछ लाख ही होगी। राजनीतिक दलों की काम करने की जो रवायत रही है, उसे समझने के लिए मध्य प्रदेश की कृषि कर्ज माफी योजना को ही देखना चाहिए। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस ने कृषि कर्ज माफ करने का वादा किया। मध्य प्रदेश में तो यहां तक कांग्रेस ने कहा कि वह चुनाव जीतते ही हर परिवार को दो लाख रूपए बतौर कृषि कर्ज माफी दे देगी। यह वादा कर्ज में डूबी जनता और कर्ज से दूर लोगों, दोनों को ही बहुत मुफीद लगा। लेकिन सरकार बनने के बाद मध्य प्रदेश में जो हो रहा है, वह इससे इतर है। खबरें यह है कि वहां तेरह रूपए, पंद्रह रूपए तो चालीस रूपए तक कर्ज माफ हो रहे हैं। लोग दो लाख का वह चेक ढूंढ़ रहे हैं, जिसे देने का वादा कांग्रेस ने किया था। बेहतर होता कि राहुल गांधी दस हजार प्रतिमाह गरीब परिवारों को देने की जिस रकम का वादा कर रहे हैं, वह कहां से आएगी, इसका भी एक खाका पेश करते।
गरीबी को लेकर ही भारत में बहुत विवाद है। नेशनल सैंपल सर्वे की दो साल पहले आई रिपोर्ट में माना गया था कि करीब छह करोड़ लोग ही गरीब हैं। कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार के दौरान अर्जुन सेन गुप्ता समिति की रिपोर्ट आई थी कि देश के करीब 84 करोड़ लोग बीस रूपए या उससे कम पर रोजाना जिंदगी गुजारने पर मजबूर हैं। तब राहुल गांधी सांसद भले थे, लेकिन प्रकारांतर से उनके नियंत्रण वाली ही सरकार थी। ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलता कि तब उन्होंने गरीबों के लिए कोई आवाज उठाई हो। कर्नाटक तो पिछले विधानसभा चुनावों के पहले उनकी ही सरकार थी, बाद में भी जनता दल सेक्युलर के साथ उनकी ही सरकार आई। लेकिन चुनाव पूर्व किए गए कृषि कर्ज माफी के वादे पूरे ही नहीं हुए। बेशक जनता बार-बार राजनीतिक वादों को सुन बहक जाती है। लेकिन मध्य प्रदेश में जिस तरह का रवैया कांग्रेस सरकार ने दिखाया है, वह अभी ताजा है। इसलिए शायद ही लोग राहुल की बातों को स्वीकार कर पाएं।
इस स्थिति की तुलना जरा गुजरात से करें। तब गुजरात हाईकोर्ट के निर्देश पर इशरत जहां एनकाउंटर और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटरों की जांच सीबीआई ने की। बिना किसी डर और भय के एजेंसी ने गुजरात पुलिस के उच्चााधिकारियों से न सिर्फ पूछताछ की बल्कि जरूरत पड़ने पर गिरफ्तार भी किया। यहां तक कि गोधरा कांड के बाद हुए दंगों की जांच के लिए गठित एसआईटी के सामने खुद नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में छह घंटों तक पूछताछ के लिए बिना कोई हंगामा किए पेश हुए। पूरे राज्य में कहीं से कोई उपद्रव की खबर नहीं आई। संविधान का पालन करना किसे कहा जाता है ये निश्चित रूप से ममता बनर्जी को नरेंद्र मोदी से सीखने की जरूरत है।