''घोटाले में संलिप्त लोगों को बचाने में लगी हैं ममता''
   दिनांक 08-फ़रवरी-2019
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पश्चिम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय कहते हैं,''ममता बनर्जी का एक आईपीएस अधिकारी के पक्ष में खुलकर सामने आना, काफी कुछ कहता है। इसके पीछे साफ है कि वे जिस अधिकारी को बचा रही हैं, उसके पास चिटफंड कंपनियों के ऐसे दस्तावेज हैं जो ममता और उनके परिवार के सदस्यों को फंसा सकते हैं। इसीलिए वे बौखलाई हुई हैं।'' पश्चिम बंगाल के राजनीतिक हालात पर पाञ्चजन्य संवाददाता अश्वनी मिश्र ने उनसे विस्तृत बात की। प्रस्तुत हैं बातचीत के संपादित अंश:-
 
 
संवैधानिक संस्थाओं की आड़ लेकर ममता बनर्जी का केन्द्र सरकार पर निशाना साधना क्या दर्शाता है?
देखिए, ममता बनर्जी को कानून-व्यवस्था, संविधान और न्यायालय पर कोई विश्वास नहीं है। समानांतर तंत्र और लोकतंत्र पर भी उनका कोई भरोसा नहीं है। ऐसे में मैं समझता हूं कि वह संघीय ढांचे की जो एक परंपरा और व्यवस्था है, उसे बाधित करने का काम उन्होंने किया है। अब देखिए कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि सीबीआई सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर घोटाले की जांच कर रही है, लेकिन ममता उन सीबीआई अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार करवा रही हैं। और जो सीबीआई अधिकारियों के रडार पर राज्य के अधिकारी हैं, उनके समर्थन में वे धरने पर बैठी हुई थीं। इस पूरे घटनाक्रम से मैं यह समझता हूं कि लोकतंत्र में ऐसे नेता किसी कलंक से कम नहीं हैं। इसलिए अगर लोकतंत्र को बचाना है तो कहीं न कहीं ऐसे नेताओं के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करते हुए इनके मनोबल को गिराना ही पड़ेगा।
भाजपा का कोई नेता पश्चिम बंगाल जाता है तो उसके हेलीकॉप्टर को उतरने नहीं दिया जाता, प्रशासन द्वारा सभाओं की अनुमति नहीं दी जाती और हिंसा का माहौल पैदा किया जाता है। जबकि अन्य दलों के नेता कभी भी कहीं भी जाते हैं तो राज्य सरकार को कोई आपत्ति नहीं होती। आखिर ममता भाजपा से इतनी डरी क्यों हैं?
बिल्कुल। ममता भाजपा से डरी ही नहीं खौफ खाए हुए हैं। क्योंकि राज्य में भाजपा के पक्ष में जनज्वार उमड़ रहा है। अभी कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री की रैली में उमड़ा जनसैलाब और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की सभाओं को बंगाल के लोगों का मिलता प्रेम ममता की नींद उड़ाए हुए है। इसलिए वे भाजपा के नेताओं पर झूठे आरोप लगा रही हैं। वे चाहती हैं कि किसी भी तरह भाजपा की गतिविधियां राज्य में बंद हो जाएं। इसलिए वे भाजपा नेताओं को फंसाने के लिए षड्यंत्र रच रही हैं और गिरफ्तारी की तैयारी भी कर रही हैं। उनका यह डराने-धमकाने का काम काफी दिनों से चल रहा है। लेकिन उन्हें पता होना चाहिए कि भाजपा का कार्यकर्ता मिशन के लिए कार्य करता है। इसलिए वे इस गीदड़ भपकी से डरने वाले नहीं हैं।
कोलकाता के पुलिस आयुक्त पर घोटाले से जुड़े साक्ष्य नष्ट करने, घोटाले में संलिप्तता के आरोप है और सीबीआई इसकी जांच कर रही है। ऐसे समय में राज्य की मुख्यमंत्री के एक पुलिस अधिकारी के पक्ष में खुलकर सामने आने की वजह क्या है?
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि ममता सरकार का चिटफंड घोटाले में संलिप्त लोगों को पूरा संरक्षण है और वे ऐसे लोगों को बचाने में लगी हुई हैं। जिस अधिकारी के पक्ष में वे खुलकर सामने आई हैं, सीबीआई ने उन्हें बाकायदा कई बार नोटिस भेजा है। लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज किया। ऐसे में जब सीबीआई अधिकारी उनके पास गए तो स्थानीय पुलिस ने उन्हें रोका ही नहीं बल्कि हिरासत में लेकर दुर्व्यवहार किया। यह पूरा नाटक बड़ा शर्मनाक है। क्योंकि कोई भी आईपीएस अधिकारी किसी भी सरकार का हिस्सा नहीं हो सकता। दूसरी बात वह तब क्यों चुप थीं जब उनकी ही पार्टी के सांसदों को गिरफ्तार किया गया? सुदीप बंद्योपाध्याय, तापस पाल, मदन मित्र कौन हैं? लेकिन वे अब एक अधिकारी को ही बचाने के लिए क्यों खड़ी हुई हैं? इसके पीछे साफ है कि वे जिस अधिकारी को बचा रही हैं, उसके पास चिटफंड कंपनियों के ऐसे दस्तावेज हैं जो ममता और उनके परिवार के सदस्यों को फंसा सकते हैं।
ममता का आरोप है कि केन्द्र सरकार सीबीआई का सियासी इस्तेमाल करके बंगाल में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का काम कर रही है। विपक्ष के आरोप में कितना दम है?
देखिए, एक चीज स्पष्ट है कि सीबीआई की जो भी जांच चल रही है वह सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर चल रही है। इसलिए केन्द्र को वे कैसे दोषी ठहरा सकती हैं? इसलिए उनके आरोप बेबुनियाद हैं। अब उनका राज खुलने लगा है तो वे कुतर्कों का सहारा ले रही हैं और केन्द्र सरकार पर आरोप मढ़ रही हैं।
पहले बंगाल वामपंथी हिंसा से प्रभावित रहा। राज्य की जनता ने तृणमूल को जब सत्ता की बागडोर सौंपी तो आशा थी कि ममता बनर्जी राज्य को न केवल हिंसा से मुक्ति दिलाएंगी बल्कि राज्य को विकासपथ पर आगे बढ़ाएंगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके पीछे आप क्या कारण मानते हैं?
ममता बनर्जी ने राज्य के लोगों को ठगा है। उनसे झूठे वादे किए हैं। पहले जो वाम पार्टी में थे और हिंसा करते थे, वे अब तृणमूल में अपनी परंपरा और संस्कृति के साथ आए हैं। और मजेदार बात यह है कि सीपीएम ने अपने गुंडों को नेता नहीं बनाया था, लेकिन ममता ने तो अपनी पार्टी में ऐसे गुंडों को नेता बनाया है। इसके अलावा ममता बनर्जी ने बंगाल में तुष्टीकरण की ऐसी विषबेल बोई है कि आज हिन्दुओं के लिए पग-पग पर संकट है। ऐसे में विकास की बात सिर्फ खामख्याली है।