ट्रिपल तलाक: फिर दिखी कांग्रेस की कट्टरपंथी मानसिकता
   दिनांक 09-फ़रवरी-2019
- सिद्धेश्वर शुक्ल                     

सरकार बनी तो ट्रिपल तलाक कानून को रद्द करने की घोषणा के साथ ही कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर से अपना असली चेहरा दिखा दिया है. यह घोषणा किसी साधारण मंच से नहीं हुई है. यह घोषणा अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की अल्पसंख्यक मोर्चा के अधिवेशन में गुरुवार, को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी की उपस्थिति में कांग्रेस की महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुष्मिता देव ने एक वादे के रूप में किया.
कांग्रेस ने यह वादा उस दिन किया जिस दिन बरेली की एक मुस्लिम महिला द्वारा अपने शौहर के अब्बा और भाई पर ट्रिपल तलाक के बाद बारी बारी से ‘हलाला’ की आड़ में दुष्कर्म करने का आरोप लगाने वाली खबर देश के सभी समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी. यह समाचार यह प्रमाणित करता है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी ट्रिपल तलाक के नाम पर महिलाओं का शोषण और हलाला के नाम पर उनका बलात्कार जारी है.
पीड़ित महिला की और से उसकी बहन ने न्यायालाय में दिए अपने एफिडेविट में कहा है कि उसका विवाह 5 जुलाई 2009 को हुआ था. दो साल बाद ही उसके पति और उसके परिवार वाले उसे संतान पैदा करने के लिए परेशान करने लगे और उसको कई दिनों तक बिना भोजन – पानी भी नहीं देते थे और कमरे में बंद करके रखते थे. अंततः महिला को उसके पति ने 15 दिसम्बर 2011 को तलाक दे दिया. पीड़ित ने हलाला से जब इनकार किया तो उसे बेहोशी का इंजेक्शन देकर उसके ससुर ने दस दिनों तक हलाला की आड़ में उसके साथ दुष्कर्म किया. बाद में उसके शौहर ने फिर से उसी महिला से निकाह कर लिया. महिला का आरोप है कि जनवरी 2017 में शौहर ने पीड़ित महिला को दुबारा तलाक दे दिया. इस बार शौहर के छोटे भाई ने पीड़ित के इनकार करने पर भी हलाला के नाम पर जबरन बलात्कार किया. अंततः पीड़ित महिला की और से उसकी बहन ने ‘ट्रिपल तलाक अध्यादेश’ के तहत न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है.
वहीं कांग्रेस की ओर से सुष्मिता देव ने तर्क दिया कि यह कानून मुस्लिम महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए नहीं बल्कि मुस्लिम पुरुषों को दण्ड देने के लिए लाया गया है. उन्होंने राहुल गांधी की उपस्थिति में कहा कि यह मोदी सरकार ने ट्रिपल तलाक बिल निर्दोष मुस्लिम पुरुषों को जेल भेजने का एक बहाना है.
मजहबी कट्टरता को बढ़ावा देना कांग्रेस की राजनीति का अभिन्न अंग रहा है. कांग्रेस के इस एलान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वोट बैंक की राजनीति के लिए मजहबी कट्टरता को ऑक्सीजन देना कांग्रेस ने न कभी छोड़ा है और न ही छोड़ेगी.
 
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)