लोकसभा चुनाव 2019: हारने वाले नेता अब ईवीएम की आड़ लेकर नहीं उठा सकेंगे सवाल
   दिनांक 11-मार्च-2019

 
मैदान में हारने वाला बेईमान खिलाड़ी अंपायर को और चुनाव में हारने वाला नेता ईवीएम को ही गलत बताता है। इज्जत बचाने के लिए इसके अलावा उसके पास कोई और रास्ता नहीं होता। पर इस बार होने जा रहे आम चुनाव में चुनाव आयोग ने पारदर्शिता के इंतजाम काफी पुख्ता कर दिए हैं। 2019 का ये चुनाव हारने वाले नेताओं को अब मुंह छिपाने के लिए कोई सहारा नहीं मिल पाएगा। खास तौर पर वीवीपैट की व्यवस्था हर मतदान केंद्र पर किए जाने से गड़बड़ी के आरोपों की आशंका समाप्त हो गयी है। अब जनता से ठुकराए गये नेताओं को ईवीएम की गड़बड़ी के आरोपों का कोई सहारा नहीं मिल पायेगा।
चुनाव हारने वाले नेताओं द्वारा ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाने का चलन आम हो गया था। मतदाताओं द्वारा ठुकराए जाने पर अनेक पार्टियों के नेता अपनी आबरू बचाने के लिए इस आरोप को एक तरह से हथियार के रूप में इस्तेमाल करने लगे थे। पिछले आम चुनाव में तीन दशक बाद किसी पार्टी ने पूर्ण बहुमत हासिल किया। उस समय की सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस को ऐतिहासिक पराजय के साथ सिर्फ 44 सीटें हासिल हो पाईं। बहुमत पाने वाली भाजपा उस समय भले ही सत्ता और शासन-प्रशासन से दूर रही हो, फिर भी सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस ने उस पर ईवीएम के जरिये बेईमानी कराने का आरोप मढ़ दिया था। बाद में अनेक राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में भी हारने वाली पार्टियां ऐसे ही प्रलाप करती रहीं।
शिकायतें बार-बार चुनाव आयोग और उच्चतम न्यायालय तक भी पहुंची। उच्चतम न्यायालय में याचिका पर लंबी बहस के बाद चुनाव आयोग के लिए कुछ दिशानिर्देश दिये गये। आयोग ने उन निर्देशों का पालन भी किया, पर जनता से ठुकराए गये नेताओं और पार्टियों का “रुदाली प्रलाप” जारी रहा। मजेदार बात ये रही कि पिछले पांच सालों में जहां जहां भाजपा विजयी हुई वहां ये प्रलाप तेज हो गया, पर जहां भारतीय जनता पार्टी को पराजय मिली उसे लोकतंत्र की जीत और ईवीएम को सही बताया गया। सबसे ज्यादा मजे की बात दिल्ली में देखने में आयी। दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को 70 में से 67 सीटें हासिल हुईं। ये नतीजा एक तरह से “न भूतो न भविष्यति” वाला रहा। इसके बावजूद वहां कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी ने ईवीएम पर कोई सवाल नहीं उठाया, जबकि उस चुनाव में कांग्रेस का पूरी तरह से सूपड़ा साफ हो गया था। दिल्ली पर पंद्रह साल तक राज करने वाली कांग्रेस को एक भी सीट न मिलने के बावजूद वहां ईवीएम पर कोई सवाल नहीं उठाया गया, क्योंकि जीतने वाली पार्टी भाजपा नहीं थी। उसके बाद हुए बिहार विधानसभा के चुनाव में भी भाजपा को करारी हार मिली। तब भी ईवीएम पर कोई सवाल नहीं उठाए गये। बीच-बीच में हुए तमाम उप-चुनावों में और पिछले साल हुए पांच राज्यों के चुनाव में मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस विजयी रही तो यहां ईवीएम पर कोई सवाल नहीं उठाया गया।
 
चुनाव आयोग ने की जबरदस्त तैयारी
हारने वाले नेताओं का प्रलाप देखते हुए इस बार के आम चुनाव में चुनाव आयोग ने जबरदस्त तैयारी की है। हर मतदान केंद्र पर वीवीपैट लगाने की घोषणा की गयी है। 2019 का लोकसभा चुनाव काफी हाईटेक होगा। इस चुनाव के लिए एम-3 मॉडल की मशीनें आ चुकी हैं। पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ चुनाव कराने में इस मशीन से मदद मिलेगी। इस मशीन के साथ सभी मतदान केंद्रों पर वीवीपैट का प्रयोग किये जाने की घोषणा चुनाव आयोग ने की है। अनेक राजनीतिक दलों द्वारा ईवीएम के विरोध को देखते हुए चुनाव आयोग ने नए मॉडल की ईवीएम व वीवीपैट को अपनाया है। पुरानी मशीनों में अक्सर चुनावों के दौरान मशीन में गड़बड़ी की शिकायत मिलती थी।
एम-3 मॉडल की ईवीएम मशीन
• एम-3 ईवीएम इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन की तीसरी जनरेशन है। चुनाव आयोग ने इसे मार्क-3 नाम दिया है। इसमें चिप को सिर्फ एक बार प्रोग्राम किया जा सकता है। चिप के सॉफ्टवेयर कोड को पढ़ा नहीं जा सकता। ईवीएम को इंटरनेट या अन्य किसी नेटवर्क से जोड़ा भी नहीं जा सकता है। इस मशीन से यदि छेड़छाड़ की कोशिश होती है तो मशीन अपनेआप बंद हो जाएगी। साथ ही इस मशीन से छेड़छाड़ करने वाले की फोटो भी कैद हो जाएगी।
 
जनता से ठुकराए गये नेता भले ही चुनाव आयोग पर सवालिया निशान लगाकर खुद की इज्जत बचाने की कोशिश करते रहे हों पर रविवार को आम चुनाव घोषित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोरा ने पूरे आत्मविश्वास और गर्व के साथ घोषणा की कि दुनिया के करीब चालीस लोकतांत्रिक देशों में पारदर्शिता के मामले में भारत अव्वल देशों में शामिल है। चुनाव आयोग अपनी विश्वसनीयता को बरकरार रखते हुए उच्चतम न्यायालय में इस बात के पुख्ता प्रमाण भी रख चुका है। चुनावी पारदर्शिता को अधिकतम बिंदु तक पहुंचाने का प्रयास आयोग द्वारा निरंतर जारी रहा है। इसके लिए इस बार के आम चुनाव की व्यवस्थाओं में अनेक नये आयाम जोड़े गये हैं। मसलन ईवीएम ले जाने वाली सभी पार्टियों की गाड़ियों में इस बार जीपीएस लगाने का फैसला किया गया है। किसी भी प्रकार की शिकायत के लिए ऐप लांच किया गया है। ऐसी हर शिकायत पर सौ मिनट के भीतर कार्रवाई करनी होगी। चुनाव के दौरान चौबीसों घंटे कंट्रोलरूम में शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था होगी।
हेल्पलाइन नंबर जारी किया
हेल्पलाइन नं. 1950 भी जारी किया गया है। पूरी चुनावी प्रक्रिया की अनिवार्य रूप से वीडियोग्राफी किये जाने के आदेश भी चुनाव आयोग ने जारी किये हैं। मतदाताओं की सुविधा के मद्देनजर ईवीएम में अब चुनावचिन्ह के साथ ही प्रत्याशी की फोटो भी होगी। हर प्रत्याशी के लिए अपने अपराधिक रिकार्डों को चुनाव के दौरान कम से कम तीन बार अखबारों में प्रकाशित कराना होगा।
पूरी चुनाव प्रक्रिया में 17.4 लाख वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाएगा। मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए भी चुनाव आयोग से अनेक उपाय किये जा रहे हैं पर मतदान शुरू होने के 48 घंटे पहले से लाउडस्पीकर पर रोक होगी। रात दस बजे से सुबह छह बजे तक भी लाउडस्पीकर का प्रयोग प्रतिबंधित रहेगा। हर उम्मीदवार को अपने सोशल मीडिया की जानकारी और उस पर प्रचार के खर्चों का ब्योरा भी देना होगा।