जौहर विश्वविद्यालय के नाम पर आजम ने किए ढेरों घोटाले
   दिनांक 12-मार्च-2019
सपा शासनकाल में आज़म खान ने कैबिनेट मंत्री रहते हुए चकरोड ,बाढ़ क्षेत्र , शत्रु संपत्ति निष्क्रांत एवं दलितों की भूमि को नियम विरुद्ध तरीके से हासिल करके उसे जौहर विश्वविद्यालय परिसर में मिला लिया
पूर्व मंत्री एवं सपा के विवादित नेता आज़म खान विवादों में बने रहने के लिए मशहूर हैं. समाजवादी पार्टी के भीतर अमर सिंह और फिल्म अभिनेत्री जया प्रदा से उनका विवाद खासा चर्चित रहा करता था. मगर इस बार वह चर्चा में हैं अपने मंत्री पद के दुरुपयोग के मामले में. सपा शासनकाल में आज़म खान ने कैबिनेट मंत्री रहते हुए चकरोड ,बाढ़ क्षेत्र , शत्रु संपत्ति निष्क्रांत एवं दलितों की भूमि को नियम विरुद्ध तरीके से हासिल करके उसे जौहर विश्वविद्यालय परिसर में मिला लिया. जौहर विश्वविद्यालय से थोड़ी दूर पर कोसी नदी है. इस आधार पर सिंचाई विभाग से भी बजट स्वीकृत करा कर उसे जौहर विश्वविद्यालय के कार्य में खर्च कराया. आज़म खान ने अपने पुत्र का दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाया. इस मामले में प्राथमिकी भी दर्ज है. आज़म खान ने मंत्री पद का दुरूपयोग करके अनिमितताओं और घोटालों की झड़ी लगा दी.
फिलहाल सबसे ज्वलंत मामला रामपुर में उर्दू गेट के ध्वस्त किये जाने का है. इस गेट के गिराए जाने के बाद आजम खान के बेटे एवं विधायक अब्दुल्ला आज़म खान ने आरोप लगाया कि “इस गेट में उर्दू शब्द का इस्तेमाल किया गया था इसलिए यह गेट गिरा दिया है. राजनीति से प्रेरित होकर यह कार्रवाई की गयी है.” सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट किया “ नफरत का आलम तो यह है कि एक समाज पर निशाना साधा, फिर एक भाषा के खिलाफ जहर उगला और फिर उस भाषा के नाम पर बने हुए एक फाटक को गिरा दिया. शायद लोग यह भूल रहे हैं जब वोट गिरते हैं तो फिर सरकारें गिरती हैं.”
सपा सुप्रीमो के इस ट्वीट का काफी मज़ाक उड़ाया गया. उनके इस ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए अरूण मिश्र नाम के व्यक्ति ने लिखा कि “ अगर आपने ऑस्ट्रेलिया की जगह इटावा के किसी अच्छे कॉलेज से पढ़ाई की होती तो आपको पता होता कि आज़म खान की यूनिवर्सिटी के उर्दू गेट को गिराने की ये कार्रवाई जिलाधिकारी और लोक निर्माण विभाग की जांच के बाद एक "अवैध निर्माण" पर हुई है, किसी भाषा या समुदाय पर नहीं.. आप भी तो अपनी बुआ और दलित महापुरुषों के सम्मान में बने पार्कों वगैरह पर सवाल खड़े करते थे, तो क्या आपको दलितों से नफरत थी?..अवैध कब्जों को अक्सर ऐसे नाम दे दिए जाते हैं ताकि उन्हें कोई हाथ न लगाए..आजम चिच्चा ने इतना तो सिखाया ही होगा आपको?”
पूर्व मंत्री आज़म खान ने रामपुर में इस उर्दू गेट को गलत तरीके से बनवाया था. उस समय नियम के विरुद्ध इस गेट की ऊंचाई को काफी कम कर दिया गया था ताकि उस रास्ते से कोई भी भारी वाहन जौहर विश्वविद्यालय की तरफ न जाने पाए. इस उर्दू गेट के बन जाने से उस मुख्य मार्ग पर भारी वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद हो गया था. उर्दू गेट की ऊंचाई कम करने की असल वजह कुछ और ही बताई जाती है. इस मामले के शिकायतकर्ता एवं भाजपा नेता आकाश सक्सेना कहते हैं " यदि कभी बवाल हो तो पुलिस और पी.ए. सी के भारी वाहन जौहर विश्वविद्यालय में ना जाने पाए इसलिए गेट की ऊंचाई को कम कर दिया गया था." गेट की ऊंचाई कम होने से भारी वाहनों को काफी लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा था जिसकी वजह से जाम लग रहा था. इस उर्दू गेट की शिकायत की गयी थी. इसकी जांच कराई गयी. जांच कराने में दो वर्ष का समय लगा. जांच में यह गेट पूरी तरह नियम विरूद्ध पाया गया. इसलिए जिला प्रशासन ने इसे ध्वस्त करा दिया.
आज़म खान के बेटे एवं विधायक अब्दुल्ला के दो जन्म प्रमाण पत्र
पूर्व नगर विकास मंत्री आज़म खान, उनके पुत्र और उनकी पत्नी पर जनपद रामपुर के थाना ‘गंज’ में कूटरचना और जालसाजी करने के आरोप में एफ.आई.आर. दर्ज है. रामपुर जनपद के भाजपा नेता आकाश सक्सेना का यह आरोप है कि आजम खान और उनकी पत्नी ने जालसाजी करके अपने पुत्र अब्दुल्ला आज़म खान का दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाया है. दोनों जन्म प्रमाण पत्रों को अलग –अलग जगह पर उपयोग करके अनैतिक लाभ लिया गया है. शिकायत पर शासन ने जांच के आदेश दिए थे. प्रारम्भिक जांच में आरोप प्रथमदृष्टया सच प्रतीत होने पर तीनों लोगों के खिलाफ आई.पी. सी. की धारा 420, 467 एवं 468 के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत किया गया. इस मामले में गिरफ्तारी किए जाने की संभावना हैं इसलिए आजम इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे हैं। न्यायलय से इस संबंध में 14 मार्च फैसला आना है
जौहर विश्वविद्यालय में अनैतिक लाभ देने के लिए अब्दुल्ला आज़म खान के दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाए गए । फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मंत्री पद का दुरुपयोग करते हुए आज़म खान ने बनवाए था. दोनों जन्म प्रमाण पत्रों में जन्म स्थान अलग – अलग दर्शाया गया है. एक जन्म प्रमाण पत्र 28 जून 2012 को नगर पालिका परिषद रामपुर से बनवाया गया है. इसमें जन्म स्थान रामपुर दर्शाया गया है. जबकि दूसरा जन्म प्रमाण पत्र 21 जनवरी 2015 को नगर निगम लखनऊ से बनवाया गया है. नगर निगम लखनऊ से जारी हुए जन्म प्रमाण पत्र में एक निजी अस्पताल का प्रमाण पत्र लगा हुआ है. पहला जन्म प्रमाण पत्र जो रामपुर नगर पालिका परिषद् से जारी किया गया है , उसी के आधार पर विधायक अब्दुल्ला आज़म खान ने अपना पासपोर्ट बनवाया है.
नियम विरुद्ध तरीके से खरीदी गयी दलितों की जमीन
जौहर विश्वविद्यालय , आज़म खान का ड्रीम प्रोजेक्ट था . यह विश्वविद्यालय, मौलाना मोहमद अली जौहर ट्रस्ट द्वारा संचालित है. मौलाना मोहमद अली जौहर ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन, बी-34 दारूल शफा लखनऊ के पते पर कराया गया है. आज़म खान, ट्रस्ट के आजीवन अध्यक्ष रहेंगे. आजम खान की पत्नी डॉ तंजीन फातमा ट्रस्ट की सचिव हैं. आज़म खान की बहन निखत अफलाक ट्रस्ट की कोषाध्यक्ष हैं. ट्रस्ट के अन्य सदस्यों में आज़म खान के दोनों बेटों का नाम लिखा हुआ है. ट्रस्ट के सदस्यों का समाज सेवा से कोई ख़ास सरोकार नहीं रहा है.
अब मामला यह सामने आया है कि जौहर विश्वविद्यालय बनाने के दौरान भूमि संबंधी कई अनियमितताएं की गयी . इन सभी घोटालों की जांच कराने के लिए रामपुर जनपद के भाजपा नेता एवं लघु उद्योग भारती संस्था के अध्यक्ष आकाश सक्सेना ने आजम खान के खिलाफ मुहीम चलाई. इनकी शिकायत का शासन ने संज्ञान लिया और जांच के आदेश दिए. जांच हुई तो पाया गया कि जौहर विश्वविद्यालय को बनाते समय आज़म खान ने अपने यहां पर काम करने वाले तीन दलितों के नाम पर दलितों के दस भूखंड की रजिस्ट्री करवा ली . यह तो नियम के अनुरूप था मगर इन तीनों अनुसूचित जाति के लोगों ने भूखंड रजिस्ट्री कराने के तुरंत बाद इन दस भूखंडों की रजिस्ट्री , जौहर विश्वविद्यालय को कर दी। जबकि नियम यह कि दलित की भूमि अगर कोई सामन्य जाति का व्यक्ति खरीदता है तो उसे जिलाधिकारी की अनुमति लेनी होती है.
शत्रु सम्पत्ति निष्क्रांत का भी है विवाद
जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में उपयोग हुई भूमि में शत्रु सम्पत्ति निष्क्रांत (ऐसी सम्पत्ति जिनके मालिक पाकिस्तान चले गए और उनका कोई भी वारिस हिन्दुस्थान में नहीं था. ऐसी जमीनों को शत्रु सम्पत्ति निष्क्रांत (कस्टोडियन भूमि) माना गया है) का भी विवाद है.
34.19 एकड़ भूमि जो राजस्व अभिलेखों में शत्रु सम्पत्ति निष्क्रांत के तौर पर दर्ज थी यह शत्रु सम्पत्ति निष्क्रांत भी चकरोड से लगी हुई भूमि थी और सार्वजनिक उपयोग के लिए इस्तेमाल होती थी. इस भूमि को चहारदीवारी बना कर विश्वविद्यालय में मिला लिया गया है. जिसकी वजह से आवगमन बाधित हो गया है। इस कारण आम जनता को मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए काफी घूम कर जाना पड़ता है.
आज़म खान ने सपा शासन कल में चकरोड और नदी के बाढ़ क्षेत्र की जमीन को भी कब्जा करके जौहर विश्वविद्यालय में मिला लिया. चकरोड की 20.95 एकड़ भूमि , रास्ते की भूमि 30 एकड़ एवं बाढ़ क्षेत्र की ज़मीन को राजस्व रिकार्ड में हेराफेरी करके जौहर विश्वविद्यालय की परिधि में ले लिया गया। ऐसा सभी नियमों को दरकिनार करते हुए किया गया।
सिंचाई , पर्यटन एवं लोक निर्माण विभाग के बजट में भी घोटाला
सिंचाई विभाग का कई करोड़ रूपये जनपद को बाढ़ से बचाने के लिए अवमुक्त किया गया था मगर मंत्री के पद पर रहते हुए आज़म खान ने सिंचाई विभाग के बजट को जौहर विश्वविद्यालय के लिए खर्च करवा दिया. जौहर विश्वविद्यालय के निकट कोसी नदी है, इसी नदी को आधार बनाकर सिंचाई विभाग के बजट का दुरूपयोग किया गया. पर्यटन विभाग के बजट का दुरुपयोग करके जौहर विश्वविद्यालय के भीतर ही एक झील का निर्माण कराया गया.
इस विश्वविद्यालय के अन्दर लोक निर्माण विभाग के स्वामित्व वाला एक गेस्ट हाउस भी है इसका रास्ता विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से होकर जाता है . इसका मार्ग भी बंद कर दिया गया है. आजम खान पर जमीन हड़पने , गलत तरीके से सरकारी पदों पर नियुक्तियों के मामले में शिकंजा कसा जाना तय है.