राहुल जी, क्या मसूद अजहर को जी कहकर मिल जाएगी सत्ता
   दिनांक 12-मार्च-2019
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनके साथ खड़े 21 दल पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं. मसूद अजहर को जी कहकर संबोधित करते हैं. इससे साफ है कि राष्ट्रीय सुरक्षा 2019 के चुनाव का सबसे अहम मुद्दा है. भारत और पाकिस्तान की फौजे आमने-सामने हैं. एक तरफ हमारे जवान, हमारे लड़ाकू जहाज हैं और दूसरी तरफ इनकी कुव्वत पर शक करने वाले. देश का वोटर बता देगा कि पाकिस्तान परस्ती से देश की सत्ता हासिल नहीं की जा सकती.
देश में आम चुनाव की तारीख के ऐलान की अगली सुबह कश्मीर के त्राल में सुरक्षा बल दहशत गर्दों से दो-दो हाथ कर रहे थे. तीन आतंकवादी सेना ने ढेर कर दिए. इसमें दो स्थानीय और एक पाकिस्तानी आतंकवादी शामिल है. इसमें वह आतंकवादी भी था, जिसने पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमले के लिए कार मुहैया कराई थी. उसी दिन, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मसूद अजहर को जी के साथ सम्मानित तरीके से संबोधित करते हैं. यह पहला मौका नहीं है. इससे पहले उनकी पार्टी के नेता ओसामा बिन लादेन को जी, जनाब, श्री, जैसे संबोधनों से नवाज चुके हैं. चुनाव के मुहाने पर खड़े देश के लिए इन दो घटनाओं में एक संदेश है. एक तरफ पाकिस्तान परस्त ताकतें हैं. दूसरी तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा. एक तरफ हर घर से अफजल निकलने की कामना वाले हैं, दूसरी तरफ दुश्मन को घर में घुसकर मारने वाले. एक तरफ आतंकवादियों के मारे जाने पर पूरी रात आंसू बहाने वाले लोग हैं, दूसरी तरफ शहीदों का बदला लेने वाले. आपको तय करना है कि पाकिस्तान परस्ती से सत्ता हासिल की जा सकती है क्या.
2014 के मुकाबले ये चुनाव बहुत अलग है. वह दस साल पुरानी भ्रष्टाचार के आरोपों से लदी, थकी नाकाम सी सरकार के खिलाफ नरेंद्र मोदी का विजय अभियान था. कांग्रेस पार्टी 44 सीटें पाकर मुख्य विपक्षी दल बनने तक का हक खो बैठी थी. अब 2019 आते-आते पिछले पांच साल में काफी कुछ बदला है. सरकार ने जो काम किए, वह उसे करने चाहिए. अगर सिलेंडर पहुंचाए हैं या बिजली पहुंचाई है तो ये होना चाहिए. इसीलिए सरकारें चुनी जाती हैं. बस अंतर ये कि 52 साल का काम पांच साल में हुआ. यह भी हकीकत है कि छह महीने तक राफेल रक्षा सौदे पर हवाई बयानबाजी के बावजूद भ्रष्टाचार के मसले पर ये सरकार बेदाग है. मैं इसको भी उपलब्धि नहीं मानता. सरकार को भ्रष्टाचार मुक्त ही होना चाहिए. आप आकाश से लेकर पाताल तक घोटाले करने वाली पूर्ववर्ती सरकारों से इस सरकार की तुलना करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन ईमानदार होना आपका कर्तव्य है. मसले इससे बड़े हैं, गंभीर हैं और ये तय करेंगे कि नये भारत की दिशा क्या होगी.
पिछले पांच साल में अवार्ड वापसी, मुझे डर लगता है जैसे सलेक्टिव बयानों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोटने के आरोपों के बीच सबने देखा कि देश की राजधानी में जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे नारे लगाने की हिम्मत या कहिए हिमाकत हुई. कांग्रेस समेत देश का एक राजनीतिक वर्ग विरोध या हताशा में इस कदर अंधा हो गया कि टुकड़े गैंग के साथ जा खड़ा हुआ. आपको इसका नतीजा पता है. जब देश के राजनीतिक दल देशद्रोहियों के साथ खड़े होने लगते हैं, तो दुश्मन के हौसले बढ़ जाते हैं. यही हुआ है. पाकिस्तान को पता है कि उनका समर्थन भारत के अंदर मौजूद है. दुखद ये कि समर्थन राजनीतिक है और सिर्फ एक व्यक्ति के विरोध से जन्मा है. मायने ये कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हटाने के लिए पाकिस्तान को खुश करना पडे, तो ये दल करेंगे. क्या आपको ये हालात खतरनाक नहीं लगते. आपको डर नहीं लगता कि पाकिस्तान और हमारे देश की 21 राजनीतिक पार्टियां एक ही भाषा बोलती हैं. आपको डरना चाहिए क्योंकि ये राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है.
जब 2019 के चुनाव के लिए इस देश का मतदाता वोट करने जाएगा, तो उसके सामने पुलवामा में शहीद हुए 40 जवानों के परिवारों के चेहरे होंगे. उसके सामने उड़ी हमले में शहीद हुए जवानों के चेहरे होंगे. लेकिन साथ ही उसके सामने होगा नया भारत. उड़ी हमले के बाद भारतीय सेना 1971 के बाद पहली बार पाकिस्तान में घुसी. आतंकवादी शिविरों को तबाह किया. इस सर्जिकल स्ट्राइक से पहले दुनिया भारत को एक सोफ्ट स्टेट यानी कमजोर मुल्क मानती थी. हमारे पास सैन्य ताकत पहले भी थी, लेकिन नहीं था तो साहस. इस एक सर्जिकल स्ट्राइक ने दुनिया के सामने भारत का चेहरा बदल दिया. दुनिया ने सोचा भी नहीं था कि 26-11 जैसे हमले पर हायतौबा मचाकर खामोश बैठ गया भारत इस तरह से बदला लेगा. फिर 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में जैश ए मोहम्मद के फिदायीन ने सीआरपीएफ के काफिले को निशाना बनाया. भारत के प्रधानमंत्री ने कहा-बहुत बड़ी गलती कर दी. बहुत बड़ी कीमत चुकानी होगी. क्या आपने कभी इस देश के प्रधानमंत्री को इस सख्त लहजे में बात करते देखा. और जब मोदी ये कह रहे थे, तो अधिकतर भारतीयों को विश्वास था कि हम जवाब देंगे. ये विश्वास कैसे जागा. ये नेतृत्व से जागा विश्वास है. जब तक पाकिस्तान में घुसकर बालाकोट पर भारतीय वायुसेना जैश के आपरेशनल हेडक्वार्टर को तबाह नहीं कर आई, हर शख्स सुबह उठकर ऐसी ही किसी खबर की उम्मीद में टीवी खोलता था.
2019 के चुनाव में क्या होंगे सवाल
1. पाकिस्तान को हम दो बार घर में घुसकर मार चुके हैं. आपको क्या लगता है कि पाकिस्तान खामोश बैठा है. जी नहीं. वह किसी नये चेहरे, नयी साजिश के साथ भारत को नुकसान पहुंचाने की तैयारी कर रहा है. क्या उसे जवाब देने वाली सरकार नहीं होनी चाहिए..
2. अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग कर दिए गए पाकिस्तान ने जैश पर कार्रवाई का नाटक शुरू कर दिया है. पिछले दो दशक से वह दुनिया में आतंकवाद का शोर मचने पर इस तरह की कार्रवाई करता है. और फिर शोर थमते ही धीरे से वैश्विक बिरादरी में शामिल हो जाता है. क्या आप ऐसा इस बार होने देंगे...
3. हमारे देश के अंदर राजनीतिक विरोध का स्तर यहां तक पहुंच गया है कि उड़ी हमले के बाद हुई सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत मांगा गया. जब मुंहतोड़ सबूत मिला, तो खामोश बैठ गए. अब हमारी वायुसेना ने आतंकवादी शिविरों को तबाह किया है, तो हमारे देश के ही कुछ नेता चाहते हैं कि उन्हें आतंकवादियों की लाशें दिखाई जाएं. आम मतदाता अपनी वायुसेना और उसके हमले पर यकीन करता है. लेकिन शौर्य पर सवाल उठाने वालों को क्या सत्ता दी जा सकती है.
4. चीन अब जाकर काबू में आया है. डोकलाम में उसकी गीदड़ भभकी से भारत नहीं डरा. अब आए दिन चीन की सीमा पर होने वाली नौटंकियां बंद हो चुकी हैं. बीजिंग को पता है कि भारत के मौजूदा नेतृत्व को आंख नहीं दिखाई जा सकती. तो क्या उन लोगों पर भरोसा किया जा सकता है, जो चुपके-चुपके चीन के राजदूत और मंत्रियों से मुलाकात करते हैं.
इस देश का मतदाता बहुत समझदार है. वह चेहरों को पहचानता है. वह मसलों को पहचानता है. वह जानता है कि मुल्क है, तो सब मुमकिन है. ये चुनाव पाकिस्तान, पाकिस्तान परस्त आतंकवादियों से आर-पार की हद तक निपट लेने की आकांक्षा का चुनाव है. यह चुनाव कश्मीर में फैली दहशतगर्दी को कुचल देने की इच्छा का चुनाव है. यह चुनाव इस जनाकांक्षा का भी है कि भारत में रहकर पाकिस्तान परस्ती से राजनीति नहीं चलेगी.