जो कहते हैं मोदी सरकार में रोजगार नहीं मिले वह जरूर पढ़ें..
   दिनांक 14-मार्च-2019
 - आशीष कुमार 'अंशु'                              
2014 के बाद माइक्रो—स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज—MSME क्षेत्र में कुल 1 करोड़ 35 लाख से 1 करोड़ 49 लाख रोजगारों का सृजन प्रति वर्ष हुआ है
नई सरकार में कितने लोगों को रोजगार मिला है, यह एक महत्वपूर्ण सवाल है जो लगातार और बार—बार पूछा जा रहा है। भारत जैसे विशाल देश में यदि आंकड़ों की बात की जाए तो कोई ऐसा माध्यम नहीं है, जिससे हम यह ठीक—ठीक जान पाएं कि कितने लोगों को प्रति वर्ष रोजगार मिल रहा है। लेकिन कुछ ऐसे मानक हैं, जिसके माध्यम से हम भारत में रोजगार पाने वालों की एक अनुमानित तस्वीर तैयार कर सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर एक लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (माइक्रो—स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज—MSME) फर्मों के बीच एक सर्वेक्षण हुआ। सर्वेक्षण में 28 राज्यों के 305 औद्योगिक केन्द्रों से 105,347 फर्मों को शामिल किया गया। देश में पर्याप्त नौकरी न होने से परेशानी हर तरफ दिखाई देती है, ऐसे में एमएसएमई क्षेत्र में सीआईआई द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में पिछले चार सालों में 13.9% की रोजगार में हुई वृद्धि या 3.3% प्रतिशत प्रतिवर्ष दिखने वाली वृद्धि, रोजगार सृजन के क्षेत्र में सरकार के लिए राहत देने वाली खबर बन कर आई है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (कन्फेडरेशन आफ इंडियन इन्डस्ट्री—CII) द्वारा किए गए सर्वेक्षण में कहा गया है कि 2014 के बाद माइक्रो—स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज—MSME क्षेत्र में कुल 1 करोड़ 35 लाख से 1 करोड़ 49 लाख रोजगारों का सृजन प्रति वर्ष हुआ है। श्रम ब्यूरो के अनुसार इस क्षेत्र में कुल कार्यरत लोगों की संख्या 45 करोड़ है।
भारत के अंदर शीर्ष नौकरी पैदा करने वाले क्षेत्रों में अस्पताल, होटल, आतिथ्य से जुड़़े अन्य क्षेत्र और पर्यटन शामिल है, उसके बाद वस्त्र और परिधान और धातु उत्पाद क्षेत्र में रोजगार निर्माण हुआ है। फिर मशीनरी पार्ट्स, परिवहन और लाजिस्टिक क्षेत्र में बड़ी संख्या में रोजगार अवसर लोगों को मिले।
जिस उपक्रम में 20 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं, उनके लिए अनिवार्य है कि वे कर्मचारियों का पंजीकरण एम्पलॉय प्रोविडेन्ट फंड— ईपीएफ में कराएं। सितम्बर 2017 से नवम्बर 2018 तक इसमें 73 लाख नए नाम जुड़े। इसी अवधि में राष्ट्रीय पेंशन योजना— एनपीएस में 9.2 लाख नए पंजीकरण हुए। इस तरह देश में 82 लाख से अधिक लोगों को औपचारिक रोजगार प्राप्त हुआ।
इससे अलग हटकर कुछ स्वतंत्र अध्ययन भी हुए। ऐसा ही एक अध्ययन 2016—17 में चार्टर्ड एकाउंटेन्ट स्नातक छात्रों से जुड़ा है। अध्ययन के अनुसार वर्ष 2016—17 में 17,000 चार्टर्ड एकाउंटेन्ट स्नातक हुए। इनमें से 5000 से अधिक छात्रों ने स्नातक होने के ठीक बाद अपनी कंपनी प्रारम्भ की। अब एक कंपनी ने अपने यहां 25 लोगों को भी रोजगार दिया तो यह संख्या हुई एक लाख पच्चीस हजार की। इतने नए रोजगार का निर्माध चार्टड एकाउंटेट स्नातक छात्रों के माध्यम से हुआ। इसी प्रकार अधिवक्ता, प्राध्यापक, डॉक्टर, इंजीनियर, मनरेगा के अन्तर्गत काम करने वाले मजदूर, रेलवे, सड़क—इमारत निर्माण के अन्तर्गत हुए रोजगार निर्माण का यदि हम हिसाब लगाएं तो ये संख्या भी लाखों में पहुंचेगी। फिर प्रधानमंत्री का रोजगार निर्माण कार्यक्रम—पीएमईजीपी, प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना —पीएमआरपीवाई, दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना— डीडीयू—जीकेवाई, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना — पीएमकेवीवाई, प्रधानमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत लगभग 10 लाख लोगों को रोजगार मिला है।
नेशनल काउंसिल आफ एप्लाइड इकॉनामिक रिसर्च —एनसीएईआर के एक अध्ययन के अनुसार जब भवन निर्माण क्षेत्र में एक लाख रूपए का निवेश किया जाता है तो वहां 2.69 व्यक्तियों के लिए रोजगार का निर्माण होता है। 2017—18 में 6000 करोड़ रुपए निर्माण क्षेत्र पर खर्च किया गया। इस तरह 60,000 करोड़ रुपए के निवेश से लगभग 40 लाख लोगों के लिए रोजगार की व्यवस्था की गई।
यह भारत में रोजगार श्रृजन की स्थिति को स्पष्ट करने वाली एक छोटी सी तस्वीर है। इस तस्वीर को उपलब्धि मानकर ठहरने की वकालत के लिए यह आलेख नहीं लिखा गया। हमारा प्रत्येक अगला दिन हमें पिछले दिन से एक कदम आगे ले जाने के लिए प्रेरित करे। इसी उद्देश्य के साथ हम गतिशील रहें। बहरहाल, वर्तमान में रोजगार की जो तस्वीर हमारे सामने दिखाई दे रही है, उसे देखकर यही कहा जा सकता है कि हमने अपनी आर्थिक—सामाजिक स्थिति को पहले से अधिक बेहतर किया है। वर्तमान केन्द्र सरकार के काम काज के नजरिए से लगता है कि यह स्थिति आने वाले सालों में और अधिक समृद्ध होगी।