हमेशा ऊर्जा से भरे रहने वाले पर्रिकर का जाना अपूरणीय क्षति
   दिनांक 18-मार्च-2019
                          

हमारा 35 साल पुराना साथी बिछड़ गया। सहसा, विश्वास नहीं हुआ कि मनोहर पर्रिकर जी अब हमारे बीच नहीं रहे। वो बीमार थे, लेकिन उनसे जब भी बात होती,तो उन्होंने कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि मेरी एक ऐसे व्यक्ति से बात हो रही है जो जीवन और मौत से जूझ रहा है। वह हमेशा ऊर्जा से भरे रहते थे। चर्चा के दौरान वह गोवा के विकास से जुड़े विषयों पर बात करने से कभी नहीं चूकते थे। उनकी सादगी, ईमानदारी और समर्पण सदैव याद किया जाएगा। वह देश के मन-मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ गए हैं। वह कभी न भूलने वाले व्यक्ति हैं। मनोहर पर्रिकर जी भारतीय राजनीति के विरले पुरुष थे।
हमने भारतीय राजनीति का लम्बा सफर साथ तय किया है। पर्रिकर जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जब भाजपा में आए तब मैं महाराष्ट्र भाजपा का काम कर रहा था। उस समय मुझे गोवा की जिम्मेदारी दी गई और उसी दौरान हमारी भेंट हुई थी। यह बात 1990-91 की है। गोवा में उनके साथ लम्बे समय तक काम करने का अवसर मिला। यह उस दौर की बात है जब भाजपा को देश के हर हिस्से में प्रत्येक कार्यकर्ता मजबूती देने का काम कर रहा था। गोवा में भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने में पर्रिकर जी का महत्वपूर्ण योगदान है।
वह गोवा में सदैव साधारण व्यक्ति के रुप में ही रहे। वह आडंबर से दूर जनता के भाव को समझने वाले मेहनती और लोकप्रिय थे इसलिए वह गोवा में अपराजेय थे। भाजपा के प्रति कर्मठता और जनता के प्रति समपर्ण के कारण गोवा में उनके नेतृत्व में ऐसी सरकार का गठन हुआ जो सिर्फ जनता की भलाई के बारे में सोचती थी। देश का पहला आईआईटी मुख्यमंत्री गोवा को मिला। साल 1978 में उन्होंने आईआईटी बांबे से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। साल 2001 में पर्रिकर को आईआईटी बांबे ने डिस्टिंग्विस्ड एल्यूमिनी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। गोवा के मुख्यमंत्री होने के बावजूद पर्रिकर जी सामान्य व्यक्ति की तरह सरकारी गाड़ी की जगह पर स्कूटर से चला करते थे। रक्षामंत्री रहते हुए वह इकोनॉमी क्लॉस में ही सफर करते थे। सुरक्षा घेरे से वह बहुत दूर रहते थे। उन्हें सड़क पर कभी भी साधारण व्यक्ति की तरह घूमते हुए देखा जाता था। पर्रिकर बेदाग छवि के नेता थे।
वह संघ कार्य से बहुत प्रभावित थे। इसलिए बचपन से संघ से जुड़कर स्वयंसेवक के रुप में कार्य करने लगे। 26 वर्ष की उम्र में उन्हें आरएसएस ने संघचालक बना दिया था। वर्ष 1988 में वह भाजपा में भेजे गए। आईआईटी बॉम्बे से स्नातक पास करने के बाद उन्होंने अपना निजी व्यवसाय शुरू किया था। कारोबार उनके सामाजिक कार्य में कभी रुकावट नहीं बना। उन्होंने राजनीति के रास्ते सामाजिक कार्य का मार्ग चुना था। पर्रिकर जी उस रास्ते पर अंतिम समय तक बिना डिगे चलते रहे। वर्ष 1994 में वह पहली बार गोवा विधानसभा के लिए चुने गए। वर्ष 1994 -2001 तक उन्होंने गोवा के भाजपा महासचिव और प्रवक्ता के रूप कार्य किया।
मनोहर पर्रिकर जी सादगी में विश्वास रखते हैं। मुख्यमंत्री के रुप में काम करने के अनुभव का लाभ देश को भी मिला। वह जब देश के रक्षामंत्री थे, तब उन्होंने सेना की जरूरतों को समझा, उसे पूरा करने का काम किया। पर्रिकर जी ने सेना के आधुनिकीकरण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। रक्षामंत्री के रुप में उन्होंने सबसे बड़ा कदम सितम्बर, 2016 का आतंकवाद के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक कर उठाया था। उरी घटना के बाद देश विचलित था। तब पर्रिकर ने आतंकवाद की रीढ़ तोड़ने का साहस दिखाकर दुनिया के सामने भारत की ताकत का अहसास कराया।
भाजपा ने ऐसा जमीनी कार्यकर्ता खोया है जो संघ के सिद्धांतों पर चलता हुआ भारत की अखंडता के लिए कभी आराम से नहीं बैठा। चरैवेति-चरैवेति की नीति पर चलने वाले पर्रिकर जी अब हमारे बीच नहीं हैं। यह संगठन के साथ मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। भाजपा ने एक कर्मठ कार्यकर्ता और हमने विश्वसनीय साथी खो दिया है। उनके कार्य, उनकी सादगी, उनकी उपलब्धता, उनकी शैली, उनकी सहजता सदैव स्मरणीय रहेंगे। पर्रिकर जी जैसे लोग भारतीय राजनीति में विरले होते हैं। जो यादों में सदा चिरंजीवी रहते हैं।

(लेखक केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री हैं)