मनोहर पर्रिकर को आखिरी सैल्यूट- जोश इज वैरी हाई...
   दिनांक 18-मार्च-2019
जरा आंख बंद कीजिए और याद कीजिए मनोहर पर्रिकर को. क्या नजर आया-क्रीजदार पेंट, आधी बाजू की बाहर निकली शर्ट. चेहरे पर सदा खेलती मुस्कान. फिर आपको नजर आएगा नाक में नली लगाए पूरे जोश के साथ गोवा की विधानसभा में बजट पेश करता एक जीवट वाला शख्स. 17 मार्च को गोवा का ये लाडला दुनिया से विदा हुआ, तो पीछे जोश, साहस और नेतृत्व की मिसाल छोड़ गया.
28 जनवरी को पणजी में अटल सेतु के लोकार्पण का मौका था. पेंक्रियास कैंसर से लड़ते गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर नाक में जीवनदायी नली लगाए मंच पर थे. ऐसा शख्स जो जानता था कि उसकी जिंदगी चंद दिन है. जनता से पूछा-हाऊ इज द जोश... उरी:द सर्जिकल स्ट्राइक फिल्म का ये मशहूर डायलाग. गोवा की दीवानावार जनता अपने साहसी मुख्यमंत्री को देखकर पूरे जोश में चिल्लाई-वैरी हाई सर... ये एक वाकया आपको मनोहर पर्रिकर के पूरे व्यक्तित्व से रूबरू करा देने के लिए काफी है. उरी सर्जिकल स्ट्राइक का ये नायक 17 मार्च को इस नश्वर देह को त्याग कर अनंत यात्रा पर रवाना हुआ, लेकिन जीवन को आखिरी क्षण तक जिंदादिली से जनता के लिए जीने का संदेश देकर.
 
जरा आंख बंद कीजिए और याद कीजिए मनोहर पर्रिकर को. क्या नजर आया-क्रीजदार पेंट, आधी बाजू की बाहर निकली शर्ट. चेहरे पर सदा खेलती मुस्कान. फिर आपको नजर आएगा नाक में नली लगाए पूरे जोश के साथ गोवा की विधानसभा में बजट पेश करता एक जीवट वाला शख्स. मुंबई के लीलावती अस्पताल में सर्जिकल ऑन्कॉलाजी डिपार्टमेंट के हेड डा. पी. जगन्नाथ बेहद आहत हैं. पर्रिकर का इलाज करने वाले जगन्नाथ कैंसर से लड़ने वाले दुनिया के सबसे बेहतरीन सर्जन में से हैं. किसी मरीज की मृत्यु उनके लिए नई बात नहीं. लेकिन ये महज एक मरीज की मौत नहीं थी. खुद डॉक्टर जगन्नाथ के शब्दों में-मैंने अपने करियर उनसे ज्यादा पॉजिटिव मरीज नहीं देखा. वह उस दिन को याद करते हैं, जब पहली बार पर्रिकर जांच के लिए अस्पताल आए थे. बिल्कुल तरोताजा और अपनी सदाबहार मुस्कान के साथ पर्रिकर को देखकर लगता ही नहीं था कि वह जानलेवा बीमारी की आखिरी स्टेज पर हैं. पेंक्रियास के कैंसर का इलाज शुरू हुआ, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देखने के लिए पहुंचे. प्रधानमंत्री जब पर्रिकर से मिले, तो उनके चेहरे पर परेशानी साफ झलक रही थी. मोदी ने कहा-दुनिया में जहां सबसे बेहतरीन इलाज हो सकता है, वहां इलाज कराया जाए. न्यूयार्क ले जाया गया. लगातार पर्रिकर की निगरानी ऱखने वाले डा. जगन्नाथ कहते हैं, अस्पताल का बेड हो या न्यूयार्क. पर्रिकर कभी राज्य के कामकाज से दूर नहीं हुए. पर्रिकर ने इतनी गंभीर बीमारी के बीच न तो कभी हताशा का इजहार किया और न ही कभी दर्द की शिकायत. डा. जगन्नाथ के शब्दों में, मैं कभी इतने पॉजिटिव और आंतरिक रूप से मजबूत व्यक्ति से नहीं मिला.
 
आया राम गया राम वाले गोवा के राजनीतिक इतिहास में अगर मनोहर पर्रिकर को राजनीतिक स्थिरता देने वाले सबसे ज्यादा लोकप्रिय मुख्यमंत्री के रूप में याद किया जाएगा, तो रक्षा मंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल भी ऐसे फैसलों वाला था, जो ऐतिहासिक थे.
- 2015 में बतौर रक्षा मंत्री पर्रिकर सेना में वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) लागू करने की घोषणा की. 45 साल से सेना से रिटायर होने वाले जवान इस मांग को करते रहे थे. इस न्यायसंगत मांग की 45 साल पुरानी विरासत मोदी सरकार को मिली थी, लेकिन इसे तार्किक रूप से लागू करने में पर्रिकर के नेतृत्व में रक्षा मंत्रालय ने डेढ़ साल से भी कम समय लगाया.
- भारतीय सेना ने इतिहास में पहली बार सरहद लांघकर दुश्मन को सबक सिखाया, तो इसके नायक भी पर्रिकर ही थे. 18 सितंबर 2016 में पाकिस्तान से आए आतंकियों ने उरी में सेना के कैंप पर हमला बोला. पूरे देश में आक्रोश था. लेकिन हमले दर हमले झेलते आए देशवासियों के लिए 29 सितंबर 2018 को आई खबर एक सपने सरीखी थी. सरकार ने ऐलान किया कि उड़ी हमले का बदला लेने के लिए भारतीय सेना ने सरहद पार आतंकवादी शिविरों को तबाह कर दिया है. भारतीय जवान सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देकर जब तक वापस नहीं आ गए, पर्रिकर जागते रहे.
- अमेरिका के साथ लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरंडम ऑफ एग्रीमेंट पर्रिकर की बहुत बडी उपलब्धि थी, हालांकि इसकी चर्चा कम होती है. इस समझौते के तहत किसी आपात परिस्थिति में भारत और अमेरिका एक-दूसरे के सैन्य ठिकाने इस्तेमाल कर सकते हैं. चीन की चुनौती के लिहाज से यह संधि बेहद महत्वपूर्ण है और इस पर बीजिंग काफी भड़का भी.

नहीं लेने दिया राहुल और कांग्रेस को बीमारी का फायदा
गोवा में कांग्रेस किसी भी सूरत में सत्ता हथियाने की फिराक में रही. गोवा में जब राजनीतिक संकट पैदा हुआ तो, पर्रिकर की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि तमाम दलों ने कह दिया था-पर्रिकर मुख्यमंत्री बनेंगे, तभी समर्थन देंगे. पर्रिकर के बीमार होने के बाद कांग्रेस गोवा की सत्ता को हथियाने के लिए तमाम दाव-पेंच खेलती रही, जिन्हें बीमार रहते हुए पर्रिकर ने नाकाम कर दिया. आज पर्रिकर के निधन पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कह रहे हैं कि वह गोवा के सबसे लोकप्रिय नेता थे. लेकिन क्या वह गोवा की जनता और पर्रिकर की आत्मा को इस बात का जवाब दे सकते हैं कि जीवन के अंतिम दिनों में उनके बेदाग राजनीतिक जीवन पर राहुल गांधी ने झूठ बोलकर कलंक लगाने की कोशिश की. पर्रिकर को देखने के बहाने उनसे मुलाकात करके लौटे राहुल गांधी ने कहा कि पूर्व रक्षा मंत्री ने उन्हें बताया है कि राफेल सौदे पर उन्हें अंधेरे में रखा गया. पर्रिकर बीमार थे, लेकिन लाचार नहीं. उन्होंने तुरंत इसका मुंहतोड़ जवाब दिया. साथ ही उन्होंने राहुल गांधी के अनैतिक कृत्य का खुलासा करते हुए खुला पत्र लिखकर यह कहते हुए बेनकाब कर दिया कि पांच मिनट की मुलाकात में स्वास्थ्य के अलावा राहुल गांधी से उनकी कोई बातचीत नहीं हुई. यह देखना भी दुखद है कि पर्रिकर का अभी अंतिम संस्कार नहीं हुआ है और कांग्रेस उनके जाने से पैदा हुए वैक्यूम को सत्ता पाने के मौके के रूप में देख रही है. कांग्रेस पार्टी ने राजकीय सम्मान से मुख्यमंत्री के अंतिम संस्कार का भी इंतजार नहीं किया और सरकार बनाने का दावा ठोक दिया है. लेकिन पर्रिकर अपने पीछे एक जोशीली विरासत छोड़ गए हैं. वह गोवा के लोगों और वहां के भाजपा नेतृत्व को सिखा गए हैं कि इन चालबाजियों का सामना कैसे करें. पर्रिकर न होकर भी गोवा में भाजपा का मार्गदर्शन कर रहे हैं.