फ्रांस के बाद जर्मनी की भी मसूद अजहर पर प्रतिबंध की पहल
   दिनांक 20-मार्च-2019
वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के इस कदम के कई दूरगामी परिणाम होंगे। इससे यूरोपीय संघ के 28 देशों में मसूद अजहर पर यात्रा का प्रतिबंध लग जाएगा साथ ही उसकी संपत्ति को जब्त किया जा सकेगा
 
भारत को एक और राजनयिक जीत मिली है। राजनयिक सूत्रों के अनुसार जर्मनी ने यूरोपीय संघ में जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मौलाना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने की ओर पहलकदमी की है।
सूत्रों ने बताया कि मौलाना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने के संबंध में जर्मनी ने यूरोपीय संघ के कई सदस्य देशों के साथ संपर्क किया है। वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के इस कदम के कई दूरगामी परिणाम होंगे। इससे यूरोपीय संघ के 28 देशों में उस पर यात्रा प्रतिबंध लग जाएगा और उसकी संपत्ति को भी जब्त किया जा सकेगा। जर्मनी ने अजहर को वैश्विक आतंकवादी नामित करने का प्रस्ताव पेश कर दिया है, हालांकि इस पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। प्रस्ताव पारित करने के लिए संगठन के सभी 28 देशों को इस कदम का समर्थन करना होगा क्योंकि इस तरह के मुद्दों पर संगठन सर्वसम्मति से फैसला करता है।
जर्मनी का यह कदम फ्रांसीसी सरकार द्वारा जैश प्रमुख मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने और उसकी सम्पत्तियों को जब्त किए जाने के कुछ दिनों बाद सामने आया है। फ्रांस के यूरोपीय और विदेश मामलों के मंत्रालय, आर्थिक और वित्त मंत्रालय तथा गृह मंत्रालय ने एक संयुक्त बयान में घोषणा की थी कि मौलाना मसूद अजहर की संपत्तियों को जब्त करने के अलावा फ्रांस मसूद अजहर को यूरोपीय संघ की आतंकवादियों तथा आतंकवादी संगठनों की सूची में रखे जाने की संभावनाओं पर अन्य साझेदार देशों से चर्चा भी करेगा। फ्रांस सरकार का बयान था कि, “इस फैसले के आधार पर हम मसूद अजहर को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों, समूहों और संस्थाओं की यूरोपीय सूची में शामिल करने के मुद्दे को अपने यूरोपीय साझेदारों के साथ होने वाली चर्चा में रखेंगे।”
बहरहाल, जर्मनी और फ्रांस का भारत के समर्थन में सामने आना भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता है। यह सफलता इसलिए भी बहुत अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि जर्मनी और फ्रांस का यह रुख संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के कदम पर चीन के वीटो के कुछ दिनों बाद सामने आया है। पाकिस्तानी आतंकी संगठन को चीन के कदम से थोड़ी राहत मिली होगी लेकिन अब यह स्पष्ट है कि चीन और पाकिस्तान वास्तव में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रयास को बाधित करने भर से अजहर की रक्षा नहीं कर सकते। यूरोपीय संघ में मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव ने आतंकवादी राष्ट्र के खिलाफ राजनयिक प्रयासों को पुनर्जीवित कर दिया है।
चीन से समर्थन मांग कर पाकिस्तान इस मामले में बच नहीं सकता। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद एकमात्र राष्ट्रोत्तर मंच नहीं है। भारत का दुनिया भर के अनेक देशों के साथ गर्मजोशी भरा मैत्री संबंध है, इसलिए पाकिस्तान के सामने कई मंचों पर अलग-थलग पड़ने का खतरा है। यही वजह है कि भारत पाकिस्तान पर कूटनीतिक जीतों का क्रम जारी रखे हुए है और पाकिस्तान इस बारे में बहुत कुछ कर सकने की स्थिति में नहीं है।
(इनपुट ऋतम से साभार )