सपा में एक टिकट भी नहीं दिला सकते मुलायम
   दिनांक 20-मार्च-2019
जिस समाजवादी पार्टी को मुलायम सिंह यादव ने खड़ा करने में अपना जीवन लगा दिया आज वह अपनी ही पार्टी में किसी को एक टिकट दिलवाने की स्थिति में नहीं हैं
समाजवादी पार्टी में परिवारवाद को बढ़ावा देने की नींव मुलायम सिंह यादव ने रखी. मुलायम सिंह यादव ने कभी सपने में भी नहीं सोचा रहा होगा कि परिवारवाद का जो वट वृक्ष उन्हें तैयार किया है. उसका सबसे बड़ा नुकसान उन्हीं को होगा. परिवारवाद की बुनियाद तैयार करके मुलायम सिंह यादव ने अपने बेटे को मुख्यमंत्री बनवाया. उन्हीं अखिलेश यादव ने उनकी एक टिकट की सिफारिश को ठुकराने में तनिक भी देर नहीं लगाई. अखिलेश यादव ने कहा कि अपर्णा यादव को टिकट देकर हम परिवारवाद को बढ़ावा नहीं दे सकते हैं. समाजवादी, कभी कांग्रेस के परिवारवाद का विरोध करते थे. मगर जब मुलायम सिंह यादव की उम्र बढ़ने लगी तब उन्होंने अपने बेटे अखिलेश यादव को राजनीति में उतारने का मन बना लिया. पार्टी के भीतर अखिलेश यादव का विरोध न हो इसके लिए मुलायम सिंह यादव ने बहुत ही बेहतरीन रणनीति अपनाई . मुलायम ने पहले अपनी पार्टी के बड़े नेताओं के परिवार के लोगों को टिकट देकर राजनीति में ‘लांच’ किया ताकि जब वह अखिलेश यादव के नाम की घोषणा करें तो कोई भी नेता इसका विरोध न करें. उस समय मुलायम सिंह यादव ने यह तर्क दिया कि अगर “मै नौजवानों को टिकट नहीं देता तो समाजवादी पार्टी बूढ़े लोगों की पार्टी बन जाती.” नतीजा यह हुआ कि मुलायम सिंह यादव के सभी भाई , भतीजे पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े और निर्वाचित होकर जन प्रतिनिधि बन गए. समाजवादी पार्टी के कुछ महत्वपूर्ण नेताओं के बेटों को भी टिकट दिया गया. वो सब लोग भी चुनाव लड़ कर निर्वाचित हुए.
मुलायम सिंह यादव ने नरेश अग्रवाल के पुत्र नितिन अग्रवाल , सपा के वरिष्ठ नेता बलराम यादव के पुत्र डॉ. संग्राम यादव, आजम खान के पुत्र अब्दुल्ला आज़म खान, बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद के भाई खालिद अज़ीम उर्फ़ अशरफ को टिकट दिया. ये सभी चुनाव जीत कर विधायक बने. मुलायम सिंह यादव ने वर्ष 2017 का विधानसभा चुनाव अपने नाम पर लड़ा. उस चुनाव में कहीं पर भी अखिलेश यादव का नाम मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट नहीं किया गया था. उस चुनाव में अपने पिता की मदद के लिए अखिलेश यादव पश्चिमी उत्तर प्रदेश से एक रथयात्रा लेकर चले थे. उस रथ के माध्यम से अखिलेश यादव चुनाव प्रचार किया करते थे.
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने अपनी दूसरी पत्नी की बहू अपर्णा यादव को सपा के टिकट पर चुनाव लड़वाया. मगर अपर्णा यादव चुनाव हार गईं. इस बार भी अपर्णा यादव चुनाव लड़ना चाहती हैं. अपर्णा यादव ने अपने ससुर मुलायम सिंह यादव से सिफारिश करवाई. मगर अखिलेश ने अपने पिता की सिफारिश को खारिज करने में तनिक भी देर नहीं लगाई. जिस मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी की स्थापना की. पार्टी बनाने के कुछ ही समय बाद सत्ता भी हासिल कर ली। उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री और एक बार देश के रक्षा मंत्री रहे. मुलायम सिंह यादव ने वर्ष 2012 में स्वयं मुख्यमंत्री बनने के बजाय अपने पुत्र अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाया. उन्हीं अखिलेश यादव ने उन्हें स्पष्ट मना कर दिया कि उनके कहने से टिकट नहीं मिलेगा।
अखिलेश ने अपने पिता को तर्क दिया कि अपर्णा को टिकट देते हैं तो उन पर परिवारवाद का आरोप लगेगा. मैनपुरी लोकसभा सीट से मुलायम सिंह यादव चुनाव लड़ेंगे. आजमगढ़ लोकसभा सीट से इस बार अखिलेश यादव चुनाव लड़ सकते हैं. कन्नौज लोकसभा सीट से अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव चुनाव लड़ेंगी. अखिलेश यादव के चचेरे भाई बदायूं लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे. इन सभी के लिए पार्टी में जगह है. मगर अपर्णा यादव को वह टिकट नहीं देना चाहते।