इस कहानी पर प्रियंका गांधी हुईं ट्रोल
   दिनांक 22-मार्च-2019

 
झूठ बोलने की परम्परा को राहुल गांधी के बाद अब प्रियंका गांधी भी आगे बढ़ा रही हैं. प्रियंका गांधी ने अपनी दादी इंदिरा गांधी की छवि को भुनाने के लिए स्वराज भवन में दादी के कमरे की तस्वीर लगा कर ट्वीट किया कि "स्वराज भवन के आंगन में बैठे हुए वह कमरा दिख रहा है . जहां मेरी दादी का जन्म हुआ. रात को सुलाते हुए दादी मुझे ‘जोन ऑफ आर्क’ की कहानी सुनाया करती थीं. आज भी उनके शब्द दिल में गूंजते हैं. कहती थीं- निडर बनो और सब अच्छा होगा." जबकि तथ्यात्मक सचाई यह है कि पहली बार इंदिरा गांधी वर्ष 1966 में प्रधानमंत्री बन गयीं थीं. प्रियंका गांधी का जन्म वर्ष 1972 में हुआ. प्रियंका गांधी के जन्म के 6 वर्ष पहले ही वह नई दिल्ली आ चुकीं थीं. प्रधानमंत्री बनने के बाद इंदिरा गांधी कभी भी स्वराज भवन में नहीं रही. अब ऐसे में प्रियंका गांधी को उन्होंने "जोन आफ आर्क" की कहानी कब सुनायी थी ! प्रियंका गांधी यह जताने का प्रयास कर रहीं हैं कि वह इंदिरा गांधी से बहुत ज्यादा प्रभावित हैं.
इस झूठे ट्वीट के चलते प्रियंका गांधी ‘सोशल मीडिया’ पर काफी ट्रोल हुईं. डॉ. रमाकान्त राय ने सोशल मीडिया पर लिखा कि " श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा 'दत्तात्रेय ब्राह्मण' ने बीते दिन एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने स्वराज भवन के बारे में अपनी स्मृतियां साझा की. यह बहुत भावुक और दिल छू लेने वाला ट्वीट था. लगभग 35 हजार लोगों ने इसे पसंद किया. हम भी थोड़े सेंटी हो गये. स्वराज भवन को 1970 में राष्ट्रीय संग्रहालय बना दिया गया और प्रियंका गांधी का जन्म 1972 में हुआ था. 1984 में हत्या होने के पहले तक इन्दिरा गांधी प्रधानमंत्री रहीं. ‘जोन आफ आर्क’ की कहानी सुनने की उम्र से लेकर 1984 के बीच इन्दिरा गांधी अपने समूचे परिवार के साथ कितने दिन स्वराज भवन (एक राष्ट्रीय संग्रहालय) में रहीं, यह सहज अनुमन्य है. एक दिन भी नहीं. इस तरह एक झूठ गढ़ लिया श्रीमती प्रियंका गांधी ने. ‘जोन आफ आर्क’ की कहानी (अगर कहानी सुनाती रहीं हों तो) की बजाय इन्दिरा गांधी ने भारत और उसकी कहानियां सुनाई होती तो शायद यह बच्चे थोड़ा अधिक सयाने होते और नानी, दादी को लेकर झूठी कहानियां न गढ़ते."
 
स्वराज भवन में इंदिरा गांधी का कमरा 
विकिपीडिया पर ‘जोन आफ आर्क’ के बारे में दर्ज विवरण के अनुसार "संत जोन ऑफ़ आर्क या ऑर्लियन्स की कन्या का कहना था कि उन्हें ईश्वर से आदेश मिले कि वे अपनी जन्मभूमि को अंग्रेजों से मुक्त कराएं. इंग्लैण्ड ने फ्रांस के काफी भू-भाग पर कब्जा कर लिया था. कॉम्पियैन में इन्हें अंग्रेजों ने पकड़ लिया था और चुड़ैल करार देते हुए जीवित जला दिया. उस समय यह केवल 19 साल की थीं. चार्ल्स सप्तम के अनुरोध पर पोप कॅलिक्स्टस तृतीय ने इन्हें निर्दोष ठहराया और शहीद की उपाधि से सम्मानित किया. 1909 में इन्हें धन्य घोषित किया गया और 1920 में संत की उपाधि प्रदान की गई.
ट्वीटर पर कीर्ति तिवारी ने लिखा है कि यह दुनिया की सबसे प्यारी पोती है . 24 घंटे अपनी दादी के बारे ही सोचती रहती हैं. वैसे कभी फुरसत मिले तो मम्मी के बारे में भी सोच लिया करो. कमल लोचन ने लिखा कि “जान आफ आर्क की कहानी सुनने वाली को इस देश की सभ्यता और संस्कृति कैसे पता होगी.”
बहरहाल, यह स्पष्ट है कि देश की जनता में झूठ बोलकर भ्रम पैदा करने का अभियान जारी है. पहले राहुल गांधी झूठ बोलने का जिम्मा अकेले संभाले हुए थे. अब बहन प्रियंका भी उस काम में सहयोग कर रहीं हैं