हिंदुत्व को न मानने वाले राहुल केरल जाकर लड़ेंगे चुनाव
   दिनांक 24-मार्च-2019
14 अगस्त 2018 की बात है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हैदराबाद में थे। अभी जनेऊ दिखाकर अपना गोत्र बताने वाले राहुल गांधी ने संपादकों से हुई बातचीत में कहा था कि वह किसी हिंदुत्व पर विश्वास नहीं करते। अमेठी सीट को अपनी बपौती समझने वाली कांग्रेस को वहां से अपनी हार का डर लगने लगा है। इसलिए राहुल गांधी केरल के वायनाड से भी चुनाव लड़ेंगे। राहुल उस राज्य से चुनाव लड़ेंगे जहां कांग्रेसियों ने सरेराह सड़क पर गाय काटी गई थी। जहां की वामपंथी सरकार की हिंदू विरोधी मानसिकता सभी जानते हैं।
गाय काटने वाला कांग्रेसी कार्यकर्ता रिजिल मकुलती राहुल गांधी के साथ 
अब जरा 2014 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी की वो तस्वीर याद करें जब राहुल गांधी सारे नियम—कायदों को ताक पर रखकर अमेठी में एक मतदान केंद्र के अंदर प्रवेश कर गए थे। हार के डर से विचलित राहुल गांधी ने मतदान केंद्र के अंदर मतदाताओं से बातचीत की और वोट देने के लिए प्रार्थना की. किसी तरह राहुल गांधी अमेठी से चुनाव जीत तो गए लेकिन इस बार उन्हें हार का पूरा डर है। उन्हें डर है कि वह अमेठी से चुनाव हार जाते हैं तो लोकसभा में प्रवेश करने के लायक नहीं बचेंगे।
दरअसल राहुल गांधी और संपूर्ण कांग्रेस को इस सचाई के बारे में पता है कि वंशवाद का खूंटा अब अमेठी से उखड़ चुका है. राहुल गांधी के वहां से चुनाव जीतने की संभावना नहीं है। कहीं रही सही मिट्टी भी पलीद न हो जाए तो उन्होंने केरल का रुख किया है। स्वयं को ‘दत्तात्रेय गोत्र’ का ब्राहमण बताने वाले राहुल गांधी हाल ही में केरल में उसी कांग्रेसी कार्यकर्ता रिजिल मकुलती के साथ दिखाई दे चुके हैं जिसने सरेराह गाय काटी थी। दरअसल, राहुल गांधी के अमेठी लोकसभा सीट छोड़कर भागने की पर्याप्त वजह है. राहुल गांधी और उनके परिवार ने अमेठी की जनता के साथ दशकों तक भावनात्मक खिलवाड़ करके जीत हासिल की है. चुनाव जीतने के बाद पांच वर्ष तक कभी अमेठी और रायबरेली में झांकने नहीं गए. यह सिलसिला आजादी के बाद आज तक जारी है. याद करिए, राजीव गांधी जब अमेठी से चुनाव लड़ने गए थे, कांग्रेसियों ने प्रचार किया था कि इनके पिता फ़िरोज़ गांधी की मृत्यु हो चुकी है और माता इंदिरा गांधी की हत्या हो गयी है. कांग्रेस पार्टी ने बिना माता पिता के बेटे के लिए जनता से आशीर्वाद मांगा था. राजीव गांधी चुनाव जीत कर लोकसभा पहुंचे. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जबदस्त हमदर्दी की लहर में राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने. राजीव गांधी की हत्या के बाद राहुल गांधी ने भी हमदर्दी का मायाजाल बुनकर अमेठी की जनता से वोट लिया और चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे. आज़ादी के बाद से अभी तक गांधी परिवार के किसी सांसद ने अमेठी का कोई विकास नहीं किया.
अमेठी बेहद पिछड़ा जनपद है. पिछली लोकसभा के कार्यकाल में भी राहुल गांधी ने यहाँ कोई विकास कार्य नहीं कराया. वर्ष 2004 से 2014 तक केंद्र में यूपीए की सरकार थी. कोई बड़ी योजना से अमेठी को नहीं जोड़ा गया. रेल या सड़क मार्ग में भी कोई प्रगति नहीं की गयी. वहीं भाजपा ने अमेठी में खूब विकास किया। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी लगातार वहां लोगों जाकर लोगों के साथ मिलती रहीं।
राहुल गांधी पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं. गुजरात के चुनाव में उन्होंने जनेऊ पकड़ कर फोटो खिंचवाई. उन्होंने जनेऊधारी होने का दावा किया. इसके बाद उनके गोत्र पर सवाल उठा. गोत्र पर विवाद बढ़ा तो उन्होंने अपना गोत्र “दतात्रेय” और जाति ब्राहमण बताई. राहुल गांधी के दादा – फ़िरोज़ गांधी - पारसी थे. ऐसे में इनका गोत्र “दत्तात्रेय” कैसे हो सकता है ? गुजरात विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद उनके जनेऊधारी होने की पोल भी खुल गयी. हैदराबाद में संपादकों के साथ बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने कहा “ मुझे किसी प्रकार के हिन्दुत्व में विश्वास नहीं है, न तो सॉफ्ट हिन्दुत्व में और न ही किसी और प्रकार के हिन्दुत्व में।” स्वयं को जनेऊ धारी बताने वाले राहुल अब केरल की हिन्दू विरोधी सरकार की शरण में लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. सभी हिन्दू जन मानस को अब यह ज्ञात हो गया है कि राहुल गांधी को हिन्दुत्व में कोई विश्वास नहीं है.