जिसके लिए परिवार से लड़े अब उसी अंसारी के लिए अखिलेश मांगेगे वोट
   दिनांक 26-मार्च-2019
जिन अंसारी बंधुओं के लिए अखिलेश यादव ने अपने चाचा को पार्टी से निकाला , पिता को अपदस्थ कर स्वयं राष्ट्रीय अध्यक्ष बने - उसी माफिया छवि वाले अंसारी के लिए अब अखिलेश वोट मांगते नजर आएंगे
 
सपा के वरिष्ठ नेता एवं उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राम गोविन्द चौधरी का यह कथन कम से कम उनकी अपनी पार्टी के लिए बिल्कुल सटीक है. वह कहते हैं कि ‘राजनीति में हमेशा के लिए कोई दोस्त और दुश्मन नहीं होता है.’ वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गाजीपुर के मुख्तार अंसारी और अफजाल अंसारी के मामले पर पार्टी के भीतर तूफ़ान खड़ा कर दिया था. अखिलेश यादव उस समय अंसारी बंधुओं को ‘फूटी आंख’ से भी नहीं देखना चाहते थे. अब वही अखिलेश यादव गाजीपुर लोकसभा सीट पर अफजाल अंसारी का प्रचार करेंगे. यही नहीं, अखिलेश यादव बसपा से गठबंधन करके अपने पिता मुलायम सिंह यादव की भी काफी फजीहत करा रहे हैं. मैनपुरी लोकसभा सीट , अभी तक मुलायम सिंह यादव की अपराजित सीट रही है. गठबंधन होने के बाद मायावती, मैनपुरी लोकसभा सीट पर मुलायम सिंह यादव का चुनाव प्रचार करने जायेंगी.
याद होगा वर्ष 2017 ! विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्य सचिव को हटाने के मामले अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल की तनातनी काफी बढ़ चुकी थी. अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल यादव के सभी विभाग छीन लिए थे. इसके बाद शिवपाल ने अखिलेश से कहा कि “ कुछ विभाग मेरे पास छोड़ दिए हैं. उसको भी वापस ले लो.” इस पर अखिलेश यादव का उत्तर था कि ‘उन विभागों में कोई काम नहीं है. उसको आप अपने पास बनाये रखिये.’
मुलायम सिंह यादव ने भी अखिलेश यादव से शिवपाल के विभाग को बहाल करने के लिए कहा. मगर अखिलेश यादव ने उनके विभाग उन्हे नहीं लौटाये. इसके बाद मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा कर शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया. पार्टी का प्रत्याशी तय करने में सपा के प्रदेश अध्यक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, चुनाव नजदीक था. शिवपाल यादव ने अपने प्रदेश अध्यक्ष के अधिकार का प्रयोग करते हुए जेल में बंद बाहुबली मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का सपा में विलय करा दिया. माफिया मुख्तार अंसारी को पार्टी में लिए जाने के बाद अखिलेश यादव आपे से बाहर हो गए. विवाद एकदम सड़क पर आ गया. पार्टी की एक बड़ी बैठक बुलाई गयी. जिसमे अंसारी बंधुओं का पक्ष मुलायम सिंह यादव ने भी लिया. इसी दौरान जब अखिलेश यादव बोल रहे थे तब शिवपाल यादव ने अखिलेश के हाथ से माइक छीन लिया और कहा कि ‘मुख्यमंत्री झूठ बोल रहे हैं, ये झूठे हैं.’
इस बैठक के बाद , अखिलेश यादव ने अपने दूसरे चाचा राम गोपाल यादव से मिलकर पार्टी की बैठक बुलाई और स्वयं को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित करा लिया. अखिलेश यादव ने अपने पिता को ही राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से अपदस्थ कर दिया. यह सब बवाल पार्टी के भीतर अंसारी बंधुओं के नाम पर हुआ था. बसपा ने गाजीपुर लोकसभा सीट पर अफजाल अंसारी को प्रत्याशी बनाया है. अब गाजीपुर में जनसभा संबोधित करने अखिलेश यादव जायेंगे और अफजाल अंसारी को सबसे अच्छा प्रत्याशी बता कर वहां की जनता से वोट मागेंगे.