लोकसभा चुनाव ग्राउंड रिपोर्ट: ये बदला हुआ बागपत है
   दिनांक 27-मार्च-2019
                           
 
  केंद्रीय मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह और जयंत चौधरी चुनावी मैदान में बागपत से
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की सियासी विरासत बागपत में खतरे में पड़ गई है। इस विरासत को बचाने के लिए रालोद मुखिया अजित सिंह को सपा-बसपा की शरण में जाना पड़ा। भाजपा से दो बार करारी हार झेलने वाले अजित सिंह गठबंधन के बाद भी बागपत से खुद चुनाव लड़ने का जोखिम नहीं ले पाए और बेटे जयंत चौधरी को यहां से चुनाव में उतार दिया। अब पूर्व प्रधानमंत्री का पोता उनके संस्मरणों के सहारे चुनाव लड़ रहा है। जबकि केंद्रीय मंत्री डाॅ. सत्यपाल सिंह अपने विकास कार्यों के बल पर चुनाव मैदान में है।
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की कर्मभूमि और दिल्ली से सटे बागपत में भी लोकसभा चुनावों को लेकर गजब का माहौल है। इन लोकसभा चुनावों में बागपत की जनता के सामने कई प्रश्न खड़े हैं। इस बार पूर्व प्रधानमंत्री की तीसरी पीढ़ी जयंत चौधरी के रूप में मतदाताओं के सामने खड़ी है तो भाजपा से केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री डाॅ. सत्यपाल सिंह अपने विकास कार्यों को लेकर चुनाव मैदान में है। पांचजन्य की लाइव पड़ताल में सामने आया कि बागपत की जनता अब केवल परंपरा के नाम पर मतदान करने को तैयार नहीं है। वह विकास, राष्ट्रीय अस्मिता और राष्ट्रवाद के मुद्दों पर विकास करके अपनी सरकार चुनने को तत्पर है।
दिल्ली से महज 25 किलोमीटर दूर स्थित बागपत की तस्वीर कुछ वर्षो के मुकाबले अब बदली-बदली दिखाई देने लगी है। अभी तक विकास से कोसों दूर लगने वाले बागपत में अब विकास की किरण पहुंचने लगी है। पिछले पांच सालों में बागपत में बदलाव की बयार आई है तो लोगों का नजरिया भी बदलने लगा है। जो लोग बागपत और राष्ट्रीय लोकदल को अलग-अलग करके देखने की सोच भी नहीं सकते थे, पिछले कुछ समय में उनके सोचने का ढंग भी बदल गया है। 2019 के लोकसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है और बागपत लोकसभा सीट पर फतह हासिल करने के लिए भाजपा और सपा-बसपा-रालोद गठबंधन के सिपहसालार आमने-सामने आ डटे हैं। इस महासमर में इस बार भाजपा और रालोद के बीच कांटे की टक्कर होने जा रही है। रालोद प्रत्याशी पूर्व प्रधानमंत्री की विरासत में मिली सियासत का वजूद बचाने की जद्दोजहद में है। जबकि भाजपा प्रत्याशी के सामने यह साबित करने की चुनौती है कि 2014 में मिली जीत केवल मोदी लहर का परिणाम नहीं थी। बल्कि बागपत की जनता कामूड़ वाकई बदल गया है। 11 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले पांचजन्य संवाददाता ने बागपत लोकसभा क्षेत्र का दौरा करके वहां के कई मतदाताओं के मूड़ को भांपने का प्रयास किया।
नरेंद्र मोदी का नेतृत्व लोगों की पहली पसंद
देश का नेतृत्व करने के सवाल पर बागपत के लोगों का साफ कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में ही देश का नेतृत्व करने की क्षमता है। उनके नेतृत्व में ही पूरी दुनिया में भारत का मान बढ़ा है।
सिवालखास विधानसभा क्षेत्र के गांव रामपुर मोती निवासी किसान अरविंद चौधरी ने पांचजन्य से कहा कि देश को नरेंद्र मोदी जैसे मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है। उनके होने से ही पाकिस्तान जैसे अड़ियल देश पर लगाम कसी जा सकती है। वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रभाव बढ़ाने में सक्षम है। राष्ट्रीयता, विकास, राष्ट्रीय सम्मान चुनावों में महत्वपूर्ण मुद्दे होने चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान को दो बार करारा जवाब देना नरेंद्र मोदी के वश की ही बात थी। योगी सरकार धीरे-धीरे जनता के हित में कार्य कर रही है। केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार होनी चाहिए। भाजपा की केंद्र व राज्य सरकार ने मिलकर बेहतरीन कार्य किया है। वाराणसी और गोरखपुर की तर्ज पर बागपत में भी विकास कार्यों की आवश्यकता है। अभी विकास कार्य शुरू ही हुए हैं।
 
मेरठ रोड स्थित नेक गांव के किसान संदीप कुमार का कहना है कि देश को वास्तव में नरेंद्र मोदी जैसे सशक्त नेतृत्व की ही आवश्यकता है। चुनावों में विकास के साथ-साथ राष्ट्रवाद, राष्ट्रीयता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे होने चाहिए। देशहित से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। पाकिस्तान के अंदर घुसकर करारा जवाब देना समय की मांग थी। योगी सरकार को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना चाहिए। केंद्र में जब कांग्रेस और यूपी में पहले बसपा व फिर सपा की सरकार थी तो विकास कार्य अटक गए थे। विकास कार्यों के लिए बागपत पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए।
बागपत रोड स्थित पांचली गांव के व्यापारी युद्धवीर सिंह राणा का कहना है कि प्रधानमंत्री पद के लिए केवल नरेंद्र मोदी ही योग्य उम्मीदवार है। चुनावों में विकास के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार मुख्य मुद्दे होने चाहिए। मोदीजी ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखा और दो बार पाकिस्तान को सर्जिकल स्ट्राइक से करारा जवाब दिया। ऐसा देश में आज तक कोई नहीं कर पाया। योगी सरकार जनहित के कार्य कर रही है और जनता उनके कार्यों से संतुष्ट है। कांग्रेस व सपा सरकार के समय भ्रष्टाचार व गुंडागर्दी चरम पर थी। अब गुंडागर्दी कम हुई है। मोदी के बनारस व योगी के गोरखपुर की तरह बागपत का विकास होना चाहिए। अभी यहां विकास की शुरूआत हुई है। बहुत कार्य होना बाकी है।
 
बागपत विधानसभा के रावण उर्फ बड़ागांव निवासी किसान सत्यप्रकाश त्यागी नरेंद्र मोदी को ही देश का सर्वश्रेष्ठ नेतृत्वकर्ता बताते हैं। शिक्षा, रोजगार, विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, जनसंख्या नियंत्रण मुख्य चुनावी मुद्दे हो। पाकिस्तान को करारा जवाब देकर मोदीजी ने भारत का मान बढ़ाया है। योगी सरकार को भ्रष्टाचार पर लगाम कसनी चाहिए। केंद्र व राज्य में एक ही दल की सरकार होनी आवश्यक है, तभी वह अच्छा कार्य कर पाती है। मोदीजी ने बनारस को चमका दिया तो योगीजी गोरखपुर को चमका रहे हैं। अब बागपत की बारी भी आनी चाहिए। यहां विकास कार्य अभी शुरू ही हुए हैं। पिछली सरकारों ने कुछ नहीं किया।
खेकड़ा क्षेत्र निवासी नदीद कुमार तो मोदीजी को ही प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं। वह कहते हैं कि जनसंख्या नियंत्रण सबसे बड़ा मुद्दा होना चाहिए। इस पर नियंत्रण करके ही हम स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, विकास, भ्रष्टाचार के मोर्चे पर कामयाबी पा सकते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा की अनदेखी किसी भी कीमत पर नहीं होनी चाहिए। पाकिस्तान में दो-दो सर्जिकल स्ट्राइक से आतंकियों के हौसले पस्त हो गए हैं। योगी सरकार लोगों की उम्मीदों पर पूरी तरह से खरी उतर रही है। चुनावों में जो वायदे किए थे, वह पूरे किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने बनारस को नया रूप दे दिया है तो योगी भी गोरखपुर को संवारने में लगे हैं। एक योगी और एक मोदी की बागपत को बहुत आवश्यकता है।
बागपत लोकसभा क्षेत्र में शामिल विधानसभा
बागपत लोकसभा क्षेत्र में बागपत जनपद की बागपत, बड़ौत, छपरौली विधानसभा के साथ-साथ गाजियाबाद जनपद की मोदीनगर और मेरठ जनपद की सिवालखास विधानसभा सीटें शामिल है। इस तरह से बागपत लोकसभा सीट तीन जनपदों में फैली हुई है।
 
इस बार गन्ना मुद्दा नहीं बन रहा
बागपत में इन लोकसभा चुनावों में गन्ना कोई मुद्दा नहीं बन पा रहा है। जबकि इससे पहले के लोकसभा व विधानसभा चुनावों में गन्ना मुख्य मुद्दा बनता रहा है। इन चुनावों में केवल देश का नेतृत्व करने का मुद्दा अहम है। देश का नेतृत्व नरेंद्र मोदी के हाथों में होना चाहिए या नेतृत्व विहीन विपक्ष के हाथों में। भाजपा की राज्य सरकार ने अपनी रणनीति से गन्ने के मुद्दे को फिलहाल खत्म कर दिया है।
 
भाजपा प्रत्याशी डाॅ. सत्यपाल सिंह
2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने मुंबई के पूर्व कमिश्नर व आर्य समाजी डाॅ. सत्यपाल सिंह को टिकट दिया था। प्रचंड मोदी लहर की आंधी में उनके प्रतिद्वंदी रालोद प्रमुख अजित सिंह भी उड़ गए और तीसरे स्थान पर पहुंच गए। उस समय भाजपा प्रत्याशी को 423475 वोट हासिल हुए। दूसरे स्थान पर रहे सपा प्रत्याशी गुलाम मोहम्मद को 213609, तीसरे स्थान पर रहे रालोद के अजित सिंह को 199516 मत तथा चैथे स्थान पर रहे बसपा के प्रशांत चौधरी को 141743 वोट हासिल हुए। चुनाव जीतने के बाद भाजपा सांसद डाॅ. सत्यपाल सिंह निष्क्रिय नहीं रहे, बल्कि अपने चुनाव क्षेत्र में पूरी तरह से सक्रिय रहे। केंद्र में मंत्री बनने के बाद उन्होंने बागपत के विकास को प्रमुखता दी। वह अपनी उपलब्धियों में ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे निर्माण, दिल्ली-सहारनपुर नेशनल हाईवे, मेरठ-सोनीपत-गढ़मुक्तेश्वर नेशनल हाईवे, यमुना नदी पर छपरौली में बना पुल, बावली गांव में केंद्रीय विद्यालय बनवाना, दिल्ली-शामली रेलवे लाइन के दोहरीकरण का कार्य शुरू करवाना आदि को गिनाते हैं। अपनी लोकसभा क्षेत्र के सभी गांवों में वह अपनी उपस्थिति का दावा करते हैं।
 
सपा-बसपा-रालोद प्रत्याशी जयंत चौधरी
चौधरी चरण सिंह के पौत्र जयंत के रूप में उनके परिवार की तीसरी पीढ़ी बागपत की जनता के सामने उम्मीदवार के रूप में खड़ी है। रालोद के परंपरागत जाट वोटरों का उनके परिवार से भावनात्मक जुड़ाव रहा है। जयंत से पहले उनके पिता अजित सिंह बागपत से चुनाव लड़कर जीतते रहे हैं। अजित सिंह को भाजपा प्रत्याशियों से 1998 और 2014 में हार का सामना करना पड़ा। अजित सिंह इस बार मुजफ्फरनगर सीट से गठबंधन के प्रत्याशी है। जयंत चौधरी ने परंपरागत जाट वोट बैंक को साधने के साथ-साथ गठबंधन के वोट बैंक पर भी भरोसा जताकर चुनाव मैदान में है। खुद को पूर्व प्रधानमंत्री की विरासत का सही दावेदार बताकर वह वोटरों का दिल जीतने की जद्दोजहद में लगे हैं।