भारतमाता का गौरव कांग्रेस की आंख में खटकता क्यों है
   दिनांक 28-मार्च-2019
अंतरिक्ष में भारत का महाशक्ति बन जाना हर भारतवासी के लिए गौरव का क्षण है, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए ये थियेटर भर है. कांग्रेस के लिए यह भले ही थियेटर हो लेकिन देश के लिए यह गौरव का पल है
27 मार्च. दिन बुधवार. दोपहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की-हम अंतरिक्ष महाशक्ति बन गए हैं. एंटी सेटेलाइट मिसाइल ने तीन मिनट में अंतरिक्ष में पृथ्वी की परिक्रमा करते सेटेलाइट को मार गिराया. हर भारतवासी का मस्तक गर्व से ऊंचा हो गया. लेकिन कांग्रेस को देश का मान, अभिमान, प्रतिष्ठा, सुरक्षा, गौरव, सेना सुहाते कहां हैं. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया. वर्ल्ड थियेटर डे की शुभकामनाएं. क्या भारत की ये ताकत एक थियेटर है. क्या आपका महाशक्ति बन जाना कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नौटंकी है. जी हां. जिस परंपरा से वह आते हैं, वहां राष्ट्र, शक्ति, गौरव के कोई मायने नहीं हैं.
दो घटनाओं पर गौर कीजिए. ये कांग्रेस का चरित्र समझने के लिए जरूरी हैं. पाकिस्तान परमाणु बम बनाने की ताकत हासिल करने के कगार पर था. तमाम इस्लामिक देशों की नजर पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम पर थी. प्रचार भी यही था कि इस्लामिक बम तैयार हो रहा है. इस्राइल ने पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों पर हवाई हमला करके तबाह कर देने की तैयारी कर ली. इस्राइल ने भारत की मदद मांगी. तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इस्राइल की इस पेशकश का ये सिला दिया कि पाकिस्तान की तत्कालीन प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो को इस्राइल के इरादों की खबर दे दी. इस परिवार के पाकिस्तान प्रेम का नतीजा है कि पाकिस्तान की एटमी मिसाइलें किसी भी क्षण भारत को निशाना बनाने के लिए तैनात हैं.
दूसरी घटना आपके सामने इस समय घट रही है. ए-सेट पर जब पूरा देश इस शक्ति को पाकर अभिभूत है, कांग्रेस ने भ्रमित कर देने की चाल चली. कांग्रेस का दावा है कि वर्ष 2012 में ही हम ये क्षमता हासिल कर चुके थे. कांग्रेस आला कमान के दुलारे शशि थरूर का बयान सुनिए-हमने (यानी यूपीए सरकार) 2012 में ही ये निर्णय ले लिया था कि जो क्षमता पर हासिल कर चुके हैं, उसके परीक्षण की जरूरत नहीं है. अब इस बात से ज्यादा हास्यास्पद क्या हो सकता है कि बिना परखे किस जादू के जोर पर ये पता चल जाता है कि हमारे पास ये ताकत है या नहीं. ये ठीक वैसा ही है कि कोई बिना सौ किलो वजन उठाए इतनी ताकत होने का दावा करे कि मैं सौ किलो वजन उठा सकता हूं. कांग्रेस को बेनकाब करने का काम भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व महानिदेशक वी.के. सारस्वत ने कर दिया. उन्होंने बताया कि हमने तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिव शंकर मेनन और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के समक्ष प्रजेंटेंशन रखा था. हमने बताया था कि सैद्धांतिक रूप से हमारे पर अग्नि मिसाइल और अंतरिक्ष कार्यक्रम के अलग-अलग ब्लॉक को जोड़कर ए-सेट तैयार करने का खाका है. इस पर अगर मंजूरी दी जाए, तो हम ऐसी मिसाइल बना सकते हैं, जो अंतरिक्ष में किसी भी सेटेलाइट को मार गिराएगी. उन्होंने हमारी बात को सुना. लेकिन दुर्भाग्य से हमें यूपीए सरकार के कार्यकाल में इस मिसाइल को तैयार करने की इजाजत नहीं मिली. इसलिए हमने इस परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया.
राहुल गांधी ने अपने नजरिये से वर्ल्ड थियेटर डे की शुभकामनाएं देकर ठीक ही किया. उनके पिता के नाना जवाहर लाल नेहरू ने कश्मीर मसले को संयुक्त राष्ट्र ले जाकर भारत के अभिन्न हिस्से का थियेटर ही तो बना दिया. आज भी हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान नेहरू के इस प्रस्ताव को लेकर शोर मचाता है. यह थियेटर ही तो है कि हजार साल की गुलामी से आजाद हुए मुल्क का पहला प्रधानमंत्री आधिकारिक रूप से ये कहे कि हमें सेना की जरूरत नहीं है. 1962 की जंग में चीन से पराजय हर भारतीय के लिए आज भी एक ताजा जख्म है. आजाद भारत एक ही बार इस तरह अपमानित हुआ है. शिमला समझौते में पाकिस्तान प्रेम में बहकर कश्मीर का मसला हल किए बिना 92 हजार पाकिस्तानी युद्ध बंदियों को रिहा कर देना भी तो थियेटर ही है. सेना ने जंग जीती, लेकिन श्रीमती इंदिरा गांधी ने समझौते की मेज पर मुल्क को हरा दिया. अपने युद्धबंदी तक आजाद नहीं करा पाए, तो आप कौन सी जंग जीते.
18 मई 1974 को भारत ने पहला परमाणु परीक्षण कर लिया था. उस समय दुनिया में न तो परमाणु अप्रसार संधि थी, न ही न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी). इसके बाद कांग्रेस सरकार इस परमाणु ताकत को बम का रूप देने के कार्यक्रम पर कुंडली मारकर बैठी रही. 1995 की बात है. कांग्रेस सत्ता में थी और लाल बहादुर शास्त्री के बाद यह दूसरा मौका था, जब एक परिवार से बाहर कोई व्यक्ति पूर्णकालिक प्रधानमंत्री था. पी.वी. नरसिम्हाराव सरकार ने परमाणु बम के परीक्षण की तैयारी शुरू की. 1995 में परीक्षण से ऐन पहले इसकी भनक अमेरिका को लग गई. भारत में अमेरिकी राजदूत फ्रेंक वाइजनर ने राव सरकार को धमकाया और कांग्रेस सरकार ने एक बार फिर घुटने टेक दिए. आखिरकार इस काम को भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने अंजाम दिया. 2 मई 1998 को पोखरन में पांच परमाणु बमों का परीक्षण किया गया. परीक्षण के बाद अमेरिका समेत तमाम देशों ने भारत की बांह मरोड़ने की कोशिश की. आर्थिक प्रतिबंध लगाए. वाजपेयी सरकार के साथ जब देश इन प्रतिबंधों से बहादुरी से लड़ रहा था, प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस का मत था कि वाजपेयी सरकार ने देश को बहुत बड़े संकट में डाल दिया है. उन प्रतिबंधों को बेअसर करके वाजपेयी सरकार ने आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखी. उसी का नतीजा है कि भारत एक जिम्मेदार परमाणु ताकत के रूप में पूरी दुनिया में स्वीकार्यता रखता है
राहुल गांधी की राजनीतिक समझ और सामान्य विवेक के लिए ये सब थियेटर हो सकता है. लेकिन अब 1951-52 वाले चुनाव की तरह देश की 85 प्रतिशत आबादी निरक्षर नहीं है. उड़ी हमले के बाद भारत 29 सितंबर 2016 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों को तबाह किया, तो हर देशवासी का सीना चौड़ा हो गया. लेकिन राष्ट्रीय गौरव कांग्रेस को नहीं सुहाता. ठीक वैसे, जैसे 26 फरवरी 2019 को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर बालाकोट में जैश ए मोहम्मद के आतंकवादी ठिकाने को तबाह कर दिया, तो इस शौर्य पर सवाल कांग्रेस ने ही खड़े किए. सर्जिकल स्ट्राइक हों या ए-सेट, हर देशवासी खुद को ज्यादा सुरक्षित, शक्तिशाली और गौरवशाली महसूस कर रहा है. कांग्रेस के लिए ये थियेटर हो सकता है, लेकिन देशवासियों के लिए ये गर्व के पल हैं.