हजार घाव की नीति का जवाब 1000 किलो का बम ही है
   दिनांक 03-मार्च-2019
भारत तो पाकिस्तान से 27 साल से जंग लड़ रहा है, आमने-सामने की जंग से ज्यादा नुकसान प्रॉक्सी वॉर (छद्म युद्ध) से हो चुका है.आतंकवादियों की पीठ के पीछे छिपकर किए वार में 2017 तक हमारे 5055 जवान शहीद हो चुके हैं
जंग किसी को नहीं चाहिए. लेकिन हम तो 1990 से लगातार पाकिस्तान के साथ प्राक्सी वॉर (छद्म युद्ध) से लड़ रहे हैं. पाकिस्तान के साथ तीन सीधी जंग 1965, 1971 और 1999 में कारगिल युद्ध में हमारे कुल छह हजार जवानों ने बलिदान दिया था. लेकिन 1990 से अब तक पाकिस्तान के आतंकवादियों की पीठ के पीछे छिपकर किए वार में 2017 तक हमारे 5055 जवान शहीद हो चुके. जिन्हें जंग से दहशत है, वे जान लें कि पिछले 27 साल में जम्मू-कश्मीर में 41 हजार से ज्यादा जान जा चुकी हैं. आप अब भी कहेंगे, ये जंग नहीं.
पाकिस्तान पर किसी भी सीधे प्रहार के समय भारत के अंदर एक तबका खड़ा हो जाता है. इसे आप मोमबत्ती तबके या नो मोर वार गैंग के नाम से जान सकते हैं. ये आपको डराते हैं. युद्ध से क्या हासिल होगा ? युद्ध का मतलब सिर्फ तबाही है ? किसी को जंग से फायदा नहीं होता, जैसे डायलॉग बोलते ये लोग असल में नहीं जानते कि पाकिस्तान के खिलाफ सीधा हमला हो. 1971 की जंग में ऐतिहासिक हार के बाद पाकिस्तान का सैन्य नेतृत्व समझ गया था कि भारत से सीधी जंग में नहीं जीता जा सकता. तब पाकिस्तान की सेना ने भारत को छाया युद्ध यानी बिना सीधे जंग लड़े हजार घाव देकर समाप्त करने की रणनीति बनाई. स्टाफ कॉलेज, क्वेटा में ये रणनीति पाकिस्तान सेना के आला ओहदेदारों ने तैयार की. इसका जिम्मा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को सौंपा गया.
जुल्फिकार अली भुट्टो ने हजार साल तक भारत से जंग की जो बात कही थी, उसे पाकिस्तान के सैन्य तानाशाह जिया उल हक ने हजार घाव की नीति में बदल दिया. मायने ये कि एक जंग शुरू हुई, जो लगातार चल रही है. 26 फरवरी को जब भारतीय वायुसेना ने बालाकोट स्थित जैश ए मोहम्मद के आतंकवादी ठिकाने पर हमला किया, तो सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि 1000 घाव की उनकी नीति का जवाब इसी तरह का 1000 किलो का बम है.
 
एक आरटीआई के जवाब में गृह मंत्रालय ने बताया कि 1990 से 2017 तक जम्मू कश्मीर में 13491 नागरिकों की जान गई है. इस दौरान 5055 जवानों ने बलिदान दिया. कुल 21,965 दहशतगर्द मारे गए. इतनी बड़ी तादाद में जनहानि, सेना को नुकसान और दुश्मन के मारे जाने का आंकड़ा किसी जंग में नहीं है. पिछले 27 साल में अगर आप देखेंगे, तो जम्मू-कश्मीर में रोज 4 जान जा रही हैं. 27 साल में आतंकवादी हमलों की 69820 घटनाएं हुई हैं. सीमा पार से प्रायोजित ये हमले क्या जंग नहीं हैं. 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद आतंकवादी हमलों में तेजी आई. सुरक्षा बलों के अभियान के जवाब में पाकिस्तान ने ज्यादा से ज्यादा आतंकवादी भारत में धकेलने की कोशिश की. नतीजा ये कि पिछले चार साल में सबसे ज्यादा आतंकवादी मारे गए और इसके लिए सबसे ज्यादा जवानों ने बलिदान दिया.
बलिदानी लांस नायक हेमराज जिनका पाकिस्तानी सेना ने अपहरण कर सिर काट दिया था (दाएं) उनकी पत्नी अपने मासूम बच्चों के साथ (फाइल फोटो ) 
अब जरा ये जान लीजिए कि जंग कहते किसे हैं. दो देशों की सेना आमने-सामने आकर लड़े, ये जंग होती है. पिछले 27 साल से जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान से प्रशिक्षण प्राप्त, पाकिस्तान के ठिकानों पर रहने वाले, पाकिस्तानी सीमा से भारत में दाखिल होने वाले आतंकवादी क्या पाकिस्तानी सेना की टीम बी नहीं है. इन्हें भारतीय सीमा में दाखिल कराने के लिए पाकिस्तानी सेना एक्टिव सपोर्ट देती है. गोलाबारी करती है, मार्गदर्शन करती है.
ऐसी दरिंदगी तो जंग में भी नहीं
पाकिस्तानी सेना ने सीमा और नियंत्रण रेखा पर बार्डर एक्शन टीम (बैट) के नाम से एक दस्ता बना रखा है. पाकिस्तान और आतंकवादियों के गठजोड़ का ये सबसे बड़ा सुबूत है. इसमें पाकिस्तान सेना के कमांडो और आतंकवादी शामिल होते हैं. बैट टीम नियंत्रण रेखा और सीमा पर घात लगाकर भारतीय सेना पर हमला करती है. जिन्हें इमरान खान और पाकिस्तान में फरिश्ता दिखता है, जरा शैतान को पहचानिए. जंग में भी शायद वो सब नहीं होता, जो पाकिस्तान की सेना अंजाम देती है. जरा नीचे दी गई घटनाओं पर गौर कीजिए और फिर बताइये कि क्या ये जंग नहीं.
मई 1999- कारगिल में घुसपैठ की सूचना पर भारतीय सेना का एक दल कैप्टन सौरभ कालिया के नेतृत्व में गया. उनके साथ जवान नरेश सिंह, बनवारी लाल, भीखा राम, मूला राम और अर्जुन थे. पाकिस्तानी सेना ने इन बेरहमी से हत्या की. इनके नाक-कान काट लिए गए. कान में लोहे की रॉड घुसा दी गई.
जून 2008- जम्मू-कश्मीर के कैल सेक्टर में जून में रास्ता भटक गए एक भारतीय जवान को पाकिस्तानी सेना ने पकड़ लिया. पाकिस्तानी सैनिक इस जवान का सर काटकर ले गए.
जनवरी 2013- जनवरी में पाकिस्तानी सेना ने दरिंदगी की हर हद पार कर दी. मेंढर में पाकिस्तानी सैनिकों ने लांस नायक हेमराज और लांस नायक सुधाकर सिंह का अपहरण कर लिया. पाकिस्तानी सैनिक हेमराज का सर काटकर ले गए. सुधाकर सिंह के भी शरीर के टुकड़े कर दिए थे.
अक्टूबर 2016- 28 अक्टूबर को कूपवाड़ा जिले के माछिल सेक्टर में मुठभेड़ के दौरान जवान मनदीप सिंह शहीद हो गए. पाकिस्तानी सेना और आतंकवादियों ने मनदीप सिंह के शव को क्षत-विक्षत कर दिया. नवंबर में माछिल सेक्टर में तीन जवान शहीद हुए. पाकिस्तानी सैनिक राजस्थान के जवान प्रभु सिंह का सर काटकर ले गए.
मई 2017- पुंछ जिले की कृष्णा घाटी में हुए पाकिस्तानी हमले में बीएसएफ के हेड कांस्टेबल प्रेम सागर और सेना के नायब सुबेदार परमजीत सिंह शहीद हो गए। बाद में इनके क्षत-विक्षत शव मिले।
2018 सितंबर- सांबा जिले के रामगढ़ सेक्टर में शहीद हुए बीएसएफ जवान नरेंद्र सिंह को पाकिस्तानी सैनिकों ने 9 घंटे तड़पाया था. उनका गला रेता गया. टांग काट डाली. आंखें निकाल लीं. करंट लगाया गया.