ये हैं राहुल गांधी के खोखले दावे
   दिनांक 30-मार्च-2019
स्टार्टअप इंडिया इनीशिएटिव मोदी सरकार की प्रमुख पहलों में एक है। इसमें वे सभी बातें शामिल हैं जिन्हें करने का वादा राहुल गांधी अब कर रहे हैं.
वर्ष 2019 के आम चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा किये जा रहे वादों को पढ़ने-समझने के बाद यह प्रतीत होता है कि राहुल भारतीय राजनीति में हो परिवर्तनों, जरूरतों को समझने में अब तक नाकाम रहे हैं। इसके पीछे वजह यह लगती है कि राहुल भारत सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यों पर नजर रखने में लापरवाह या असमर्थ हैं। राहुल ने हाल ही में ट्विट करके दो वादे किये हैं। एक तो यह कि देश में नयी नौकरियां पैदा करने के लिए वे स्टार्टअप को बढ़ावा देंगे, कैसे बढ़ावा देंगे, इसके लिए उन्होंने अपनी योजना घोषित की है। दूसरे, उन्होंने सत्ता में आने पर नीति आयोग को खत्म करके नया योजना आयोग गठित करने की बात कही है। नीति आयोग खत्म करने के पीछे वे जो बात कहते हैं, वह ठोस कारणों और नयी सोच पर आधारित होने की बजाय विकास को पीछे धकेलने वाले लगते हैं।
कांग्रेस और राहुल गांधी मोदी सरकार पर रोजगार के मोर्चे पर विफल रहने का आरोप लगाते रहे हैं। राहुल और प्रियंका अपनी चुनावी सभाओं में नौजवानों को रोजगार न मिलने को मुद्दा बनाना चाहते हैं। लेकिन जब स्वयं राहुल नौकरियां पैदा करने के लिए अपनी योजना घोषित करते हैं तो उनका खोखलापन सामने आ जाता है। वे उन्हीं योजनाओं को लागू करने की बात करते हैं जिन्हें मोदी सरकार शुरू करके उन पर अमल कर रही है। कांग्रेस राहुल की इस घोषणा को उनकी क्रांतिकारी सोच बता रही है। स्पष्ट है कि राहुल और कांग्रेस को नहीं मालूम की मोदी सरकार कर क्या रही है?
रोजगार बढ़ाने को स्टार्टअप के भरोसे राहुल
आइये देखते हैं, रोजगार सृजित करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश के नौजवानों से क्या वादा किया है। राहुल ने गुरुवार को ट्वीट में कहा, ‘युवा नया कारोबार शुरू करना चाहते हैं? भारत के लिए नौकरियां पैदा करना चाहते हैं? आपके लिए हमारी यह योजना है : 1. किसी नये कारोबार के लिए पहले तीन साल तक कोई अनुमति लेने की जरूरत नहीं, 2. एंजेल टैक्स को गुडबाय, 3. आप कितनी नौकरियां पैदा करते हैं, उसके आधार पर ठोस प्रोत्साहन और टैक्स क्रेडिट, 4. आसान बैंक क्रेडिट।’
राहुल अब कर रहे वादा, मोदी पहले कर चुके पूरा
अब देखिये कि मोदी सरकार ने क्या किया? स्टार्टअप इंडिया इनीशिएटिव मोदी सरकार की प्रमुख पहलों में एक है। इसमें वे सभी बातें शामिल हैं जिन्हें करने का वादा राहुल गांधी वर्षों बाद कर रहे हैं। नया व्यवसाय शुरू करने के लिए स्टार्टअप इंडिया में पहले ही सिंगल विंडो क्लियरेंस का प्रावधान है। इसके साथ ही इसमें एक वेब-पोर्टल और मोबाइल ऐप्प के जरिये विभिन्न श्रम एवं पर्यावरण संबंधी कानूनों के अनुपालन के लिए स्व-सत्यापन की सुविधा है। स्टार्टअप इंडिया स्कीम के तहत पहले तीन वर्षों में श्रम कानूनों के संबंध में किसी निरीक्षण से छूट दी गयी है। नया व्यवसाय शुरू करने के लिए एक वेबसाइट पर महज पंजीकरण करने की आवश्यकता है, इसमें कई पन्नों के फॉर्म भरने और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की कोई जरूरत नहीं है।
स्टार्टअप व्यवसाय को पहले तीन वर्ष तक कर भुगतान से छूट दी गयी है, भले ही उसमें कितने भी कर्मचारी कार्य क्यों न करते हों जबकि राहुल रोजगार सृजन के आधार पर कर छूट का वादा कर रहे हैं। यानी कांग्रेस सरकार आने पर सभी स्टार्टअप उद्यमियों के लिए जारी यह छूट खत्म कर दी जायेगी और इसकी बजाय उनके लिए नियुक्त कर्मचारियों की संख्या के आधार पर कर छूट का जटिल प्रावधान किया जायेगा।
स्टार्टअप को पूंजी के लिए मोदी की योजना
स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत स्टार्टअप्स का सहयोग करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का एक फंड गठित किया गया है जिसका उपयोग इस योजना के तहत पंजीकृत नये उद्यमों द्वारा वेंचर कैपिटल के रूप में किया जा सकता है। मोदी सरकार ने छोटे और मझोले उद्यमों के लिए 59 मिनट की ऋण योजना भी शुरू की है जिसमें नये उद्यमियों को ऑनलाइन आवेदन कर देने पर बिना किसी जमानत के 10 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक का ऋण महज 59 मिनट में उपलब्ध है। 10 लाख रुपये से कम राशि का ऋण मुद्रा योजना से लिया जा सकता है।
 
जिस एंजिल टैक्स को राहुल गांधी गुडबाय बोलने का वादा कर रहे हैं, वह एंजिल टैक्स 2012 के केंद्रीय बजट में यूपीए सरकार ने काला धन रोकने के उद्देश्य से शुरू किया था और इसे आयकर अधिनियम की धारा 56(2)(VIIबी) के दायरे में शामिल किया था। मोदी सरकार ने हाल ही में स्टार्टअप्स के लिए एंजिल टैक्स के मानकों में थोड़ी ढील दी है। स्पष्ट है कि राहुल गांधी को पता ही नहीं है कि स्टार्टअप की दुनिया कहां से कहां पहुंच चुकी है। शायद इसीलिए मोदी सरकार द्वारा रोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से स्टार्टअप को बढ़ाना देने के लिए अमल में लायी जा रही योजनाओं से राहुल अनभिज्ञ हैं और जो हो चुका है, वह करने का वादा कर रहे हैं। स्टार्टअप उद्योग के कई निवेशकों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में राहुल गांधी की नींद देर से खुली है। स्टार्टअप जगत की समस्याओं को मोदी सरकार क्रमवार ढंग से लगातार समाधान की ओर ले जा रही है।
मोदी सरकार राहुल के वादों से भी आगे जाते हुए स्टार्टअप इंडिया के तहत कई अन्य सुविधाएँ दे चुकी है जैसे सरकारी टेंडरों में हिस्सा लेने के लिए स्टार्टअप्स को पूर्व अनुभव और न्यूनतम टर्नओवर की जरूरत नहीं है। स्टार्टअप्स को दीर्घकाल के कैपिटेल गेन टैक्स से छूट मिली हुई है और इनके द्वारा पेटेंट का आवेदन करने पर शुल्क में 80 प्रतिशत की छूट है। इसके अलावा ऐसे व्यवसायों के सफल न होने पर उन्हें बंद करने का प्रावधान भी आसान बनाया गया है।
 
नीति आयोग को खत्म करने का वादा
अब आते हैं, नीति आयोग को खत्म कर नये योजना आयोग का गठन करने के राहुल गांधी के दूसरे वादे पर। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट में लिखा कि अगर उन्हें सत्ता मिली तो वे नीति आयोग को ख़त्म कर देंगे।उन्होंने कहा कि नीति आयोग से कोई भला नहीं हो रहा है, ये सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी के लिए मार्केटिंग प्रेजेंटेशन और झूठे डेटा बनाने का काम करता है। हम नीति आयोग की जगह एक ऐसा योजना आयोग बनायेंगे जिसमें जाने-माने अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों के साथ स्टाफ की संख्या 100 से भी कम होगी।
योजना आयोग की थी सीमित भूमिका
यह ट्वीट पढ़ कर प्रतीत होता है कि राहुल गांधी को पता ही नहीं है कि नीति आयोग क्या है, इसकी संरचना और उद्देश्य क्या हैं? योजना आयोग को खत्म कर क्यों नीति आयोग बनाया गया। योजना आयोग की भूमिका बहुत सीमित थी। इसका गठन पूर्व सोवियत संघ की तर्ज पर देश में पंचवर्षीय योजनाएं बनाने के लिए परामर्श दात्री संस्था के तौर पर 15 मार्च1950 को हुआ था। इसका काम देश के भौतिक, पूंजीगत और मानव संसाधनों का अनुमान लगाना, मानव संसाधन के कुशल एवं संतुलित उपयोग हेतु योजना तैयार करना, योजना के विभिन्न चरणों का निर्धारण करना और प्राथमिकता के आधार पर संसाधनों के आवंटन का प्रस्ताव देना था।
बहुत आगे की सोच है नीति आयोग
मोटे तौर पर देखा जाये तो योजना आयोग योजना बनाकर उनके लिए संसाधन आवंटित कर फारिग हो जाता था। लेकिन संसाधनों को बढ़ाने, इसके लिए तंत्र विकसित करने, योजनाओं के क्रियान्वयन में आयी दिक्कतों से सबक लेकर नयी नीति बनाने, राष्ट्रीय सामाजिक कल्याण के लक्ष्यों की पहचान करना और इन सबसे बढ़कर इस पूरी प्रक्रिया में राज्यों की भूमिका बढ़ाने, रणनीतिक और दीर्धकालिक नीति एवं कार्यक्रम की रूपरेखा और पहलों का डिजाइन तैयार करने और उनकी प्रगति एवं प्रभावकारिता पर नजर रखने पर योजना आयोग का कोई फोकस नहीं था। नीति आयोग देश के कायाकल्प के लिए इन कार्यों को करने के लिए गठित हुआ है। नीति आयोग और योजना आयोग के बीच योजना के दृष्टिकोण में प्रमुख अंतर यह है कि, नीति आयोग राज्यों की भागीदारी को बढ़ाता है जबकि योजना आयोग एक ही आकार में सभी के फिट आ जाने वाले टॉप– डाउन अप्रोच को अपनाता था। एक नये भारत के लिए उदय और विकास के लिए निश्चित रूप से नयी सोच चाहिए जिसे विकसित करने का दारोमदार नीति आयोग पर है। ऐसे में राहुल गांधी का नीति आयोग को खत्म करके नया योजना आयोग बनाने का वादा विकास की दिशा में पीछे ले जाने वाला प्रतीत होता है और नये भारत की नयी सोच और नयी जरूरतों से मेल खाता नहीं दिखता।