एयर स्ट्राइक: और कितने सबूत चाहिए ..
   दिनांक 05-मार्च-2019
- सुमन कुमार                   
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में इस देश के विपक्षी नेता कितना नीचे गिर सकते हैं? पिछले तीन दिनों की मीडिया रिपोर्ट्स को देखें। कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाने वाले पी. च‍िदंबरम, कपिल सिब्‍बल, दिग्विजय सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू और तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी और दिल्‍ली में पार्टी के मुखर नेता डेरेक ओ ब्रायन समेत कई विपक्षी नेताओं ने अचानक बालाकोट में जैश ए मोहम्‍मद के आतंकी प्रशिक्षण शिव‍िर पर भारतीय वायुसेना द्वारा किए गए हमलों का सबूत मांगा है। सूत्रों के अनुसार इन हमलों में 300 के करीब आतंकियों के मारे जाने का अनुमान है। जाहिर है कि पुलवामा में सीआरपीएफ के 44 जवानों के बलिदान का यह बड़ा बदला है मगर विपक्षियों को सबूत चाहिए। अपना हित साधने के लिए वह कितनी भी नीचे गिर सकते हैं।
 
वस्‍तुस्थिति क्‍या है
भारतीय वायुसेना के मिराज 2000 विमानों के एक बेड़े जिसमें करीब 12 विमान शामिल थे, ने पुलवामा हमले के 13वें दिन पाकिस्‍तान के खैबर पख्‍तूनख्‍वा प्रांत के बालाकोट में जैश के आतंकी प्रशिक्षण शिविर पर जोरदार हमला बोला। वायुसेना के ये विमान भारत-पाकिस्‍तान सीमा के अंदर बिना किसी प्रतिरोध के 80 किलोमीटर तक घुसकर अपने टारगेट को निशाना बनाकर सुरक्षित लौट आए। इस हमले की खबर भी भारतीय वायुसेना ने नहीं बल्कि पाकिस्‍तानी सेना के प्रवक्‍ता ने ट्विटर के जरिये दी। खास बात ये रही कि न तो भारतीय सेना और न ही भारत सरकार के प्रवक्‍ता ने ऐसी कोई जानकारी दी कि इस हमले में कितने लोग मारे गए। सूत्रों के हवाले से भारतीय मीडिया ने ये जानकारी दी कि हमले में करीब 300 आतंकी और उनके आका मारे गए हैं। इस आक्रमण के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कई सार्वजनिक सभाओं में हिस्‍सा लिया मगर उन्‍होंने भी कभी ये नहीं कहा कि कितने लोग मारे गए।
विरोधी नेताओं को मिर्च क्‍यों लगी
बालाकोट हमले के बाद पाकिस्‍तान की वायुसेना ने भारतीय सैन्‍य ठिकानों पर हमले की कोशिश की मगर भारतीय वायुसेना ने इसका मुंहतोड़ जवाब दिया और पाकिस्‍तानी विमानों को सीमा से ही वापस लौटना पड़ा। इस दौरान एक पाकिस्‍तानी एफ 16 विमान को भारतीय मिग 21 बाइसन विमान ने मार गिराया और इस प्रक्रिया में ये विमान खुद भी पाक अधिकृत कश्‍मीर में दुर्घटनाग्रस्‍त हो गया। भारतीय विमान के पायलट अभिनंदन वर्तमान को पाक सेना ने बंदी बना लिया। हालांकि भारत सरकार की कूटनीति के कारण सिर्फ एक दिन के अंदर पाकिस्‍तान ने भारतीय पायलट को वापस सौंपने की घोषणा कर दी। जाहिर है कि इससे देश में नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता चरम पर पहुंच गई। सिर्फ उत्‍तर भारत ही नहीं बल्कि दक्षिण भारत में भी मोदी की रैलियों में जैसी भीड़ उमड़ी और जिस तरह तमिलनाडु के मुख्‍यमंत्री ई.के. पलनीस्‍वामी ने मोदी को नरसिंह अवतार की संज्ञा दी उससे समझा जा सकता है कि उनकी लोकप्रियता का क्‍या स्‍तर है। जाहिर है कि देश में एक मजबूत प्रधानमंत्री का होना ऐसे राजनीतिज्ञों को पच नहीं रहा है जो इस देश में हमेशा एक कमजोर नेतृत्‍व देखना चाहते हैं ताकि वह अपनी मनमानी कर सकें जैसा कि वो अतीत में करते रहे हैं।
पूरी दुनिया में ऐसे विदेशी मीडिया संस्‍थानों की कोई कमी नहीं है जो भारत में एक मजबूत सरकार से खतरा महसूस करते हैं। दरअसल ये मीडिया संस्‍थान जिन देशों का प्रतिनिधित्‍व करते हैं, इनके हित उन देशों से जुड़े होते हैं। ऐसे ही कुछ मीडिया संस्‍थानों में शामिल समाचार एजेंसी रॉयटर्स, बीबीसी, अल जजीरा आदि ने बालाकोट हमले पर सवाल उठाते हुए ऐसे आलेख प्रकाशित किए जिनमें दावा किया गया बालाकोट हमले में 300 आतंकियों की मौत की खबरें सही नहीं हैं। हालांकि इन मीडिया संस्‍थानों को हमले के तीन दिन बाद पाकिस्‍तानी सेना अपनी निगरानी में तथाकथित हमला स्‍थल पर ले गईं। जाहिर है कि इन तीन दिनों में 300 क्‍या, 3000 लाशों को ठिकाने लगाना संभव था। देश हित की बात कर करके कथित सेकुलर दल इन खबरों को आधार बनाकर भारत सरकार से हमले के सबूत मांग रहे हैं।
पहली बार नहीं हुआ ऐसा
तीन साल पहले जब उरी में पाकिस्‍तान के भेजे आतंकियों ने सैन्‍य ठिकाने पर हमला किया था तो नरेंद्र मोदी सरकार ने आतंकियों के पाक अधिकृत कश्‍मीर स्थिति ठिकानों को वहां मौजूद आतंकियों समेत ठिकाने लगा दिया था। लोग भूले नहीं होंगे कि तब भी भारत में मौजूद राजनेताओं का एक तबका उस हमले के सबूत मांगने के लिए उठ खड़ा हुआ था। उन नेताओं में देश की सबसे पुरानी पार्टी के वर्तमान अध्‍यक्ष राहुल गांधी भी शामिल थे। हालांकि सरकार ने इन हमलों की पुख्‍ता तस्‍वीरें सार्वजनिक कर देश की सेना का मनोबल तोड़ने वाले इन नेताओं के मुंह पर ताले लगा दिए थे।
सेना पर भी भरोसा नहीं
बालाकोट हमले के बाद पहले भारतीय विदेश सचिव ने मीडिया के सामने ये जानकारी दी कि भारतीय वायुसेना ने जैश के ठिकाने पर हमला कर भविष्‍य में होने वाले हमलों को रोकने के लिए कार्रवाई की है। इसके बाद तीनों सेनाओं के शीर्ष अधिकारियों ने मीडिया को इस बारे में जानकारी दी। अब जबकि एक बार फि‍र इन नेताओं ने सबूत मांगे तो खुद वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ को सामने आना पड़ा। उन्‍होंने स्‍पष्‍ट शब्‍दों में कहा कि वायुसेना का काम लाशें गिनना नहीं है। वायुसेना को बालाकोट में एक लक्ष्‍य पर हमला करने की जिम्‍मेदारी दी गई थी और वायुसेना के विमानों ने लक्ष्‍य को सटीक तरीके से भेद दिया है। एयर चीफ मार्शल धनोआ ने ये भी कहा कि अगर भारतीय वायुसेना के बम जंगल में गिरे होते या उनसे कोई नुकसान नहीं हुआ होता तो पाकिस्‍तानी वायुसेना इस तरह पलटवार करने की कोशिश नहीं करती। जाहिर है कि इसके बाद कहीं किसी स्‍पष्‍टीकरण की आवश्‍यकता ही नहीं रह जाती।
मसूद अजहर के भाई का कथित ऑडियो
इस बीच एक ऑडियो क्लिप पाकिस्‍तान से वायरल हुआ है जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि इसमें मसूद अजहर के भाई की आवाज है। इस ऑडियो में साफ-साफ सुना जा सकता है कि भारत ने जैश ए मोहम्‍मद के आतंकी ट्रेनिंग कैंप पर हमला किया है। यानी प्रभावी हमले की पुष्टि खुद जैश के लोग ही कर रहे हैं।
मोदी विरोध में कितना नीचे गिरेंगे
सवाल है कि भारत के नेताओं के इन बयानों से लाभ किसे हो रहा है? पाकिस्‍तान का मीडिया, वहां की सरकार बार-बार अपना पक्ष मजबूत करने के लिए इन भारतीय नेताओं के बयानों को आधार बना रही है। यानी मोदी का विरोध करते करते ये नेता परोक्ष रूप से पाकिस्‍तान का साथ दे रहे हैं। ऐसा ये अतीत में भी कर चुके हैं और फ‍िर से उसी राह पर चल रहे हैं। जनता ये सब देख रही है और इसका खामियाजा इन्‍हें निश्चित रूप से चुनावों में भुगतना होगा।