मुशर्रफ का इकरार: जैश और आईएसआई मिलकर करते हैं भारत पर आतंकी हमले
   दिनांक 06-मार्च-2019
पाकिस्तान मसूद अजहर और जैश के खिलाफ कार्रवाई का जो दिखावा कर रहा है, उसकी पोल उनके ही पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने खोल दी है. मुशर्ऱफ ने कहा है कि जैश और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी मिलकर भारत पर आतंकवादी हमले करती हैं.
टुकड़े—टुकड़े गैंग और सबूतबाजों को ये खबर पसंद नहीं आएगी. पाकिस्तान के पूर्व तानाशाह राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने स्वीकार किया है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और मसूद अजहर का आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद साथ मिलकर भारत में बम धमाकों को अंजाम देते हैं. मुशर्ऱफ का ये इकबालिया बयान ऐसे समय पर आया है, जब पाकिस्तान ने मजबूरन मसूद अजहर के संगठन जमात-उद-दावा व इसके सहयोगी संगठन फलाह-ए-इंसानियत को आधिकारिक रूप से प्रतिबंधित संगठनों की सूची में शामिल कर लिया है. दिखावे के लिए पाकिस्तान ने इस समय कथित रूप से जैश ए मोहम्मद के 44 दहशतगर्दों को हिरासत में लिया हुआ है. पाकिस्तान का कहना है कि इन्हें जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है. लेकिन ऐसे समय पर मुशर्रफ का ताजा बयान पाकिस्तान के चेहरे पर से नकाब हटाता है. साथ ही ये भी साबित करता है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भारत में आतंकवादी हमले करा रही है.
यह सनसनीखेज खुलासा पूर्व तानाशाह मुशर्रफ ने हम टीवी डिजिटल पर नदीम मलिक नामक पत्रकार से बातचीत में किया. एक सवाल के जवाब में मुशर्रफ ने कहा-पाकिस्तान सरकार ने मसूद अजहर के संगठनों पर प्रतिबंध लगाकर सही दिशा में कदम बढ़ाया है. मैं तो लंबे समय से कहता रहा हूं कि ये आतंकवादी संगठन हैं. उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में झंडा चीची पुल पर मुझ पर जानलेवा हमला हुआ था. यह हमला जैश ए मोहम्मद ने ही अंजाम दिया था. मैंने तो हमेशा से इन्हें आतंकवादी माना है. उन्होंने हमले के लिए जो इलाका चुना था, वह सही नहीं था. उन्होंने बटन दबाने में जरा देरी कर दी और उनका हमला विफल हो गया था.
नदीम मलिक ने मुशर्रफ से पूछा कि उन्होंने तो कभी जैश ए मोहम्मद पर पाबंदी लगाने की पहल नहीं की. जिस वक्त की वह बात कर रहे हैं, उस समय वह बहुत ताकतवर थे. 2007 के बाद ही उनकी सत्ता की चमक धूमिल पड़ी. मुशर्रफ ने जवाब दिया-वह दौर दूसरा था. उन्होंने स्वीकार किया कि उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि उन्होंने इस आतंकवादी संगठन पर तब पाबंदी क्यूं नहीं लगाई थी.
इसी बातचीत के क्रम में परवेज मुशर्रफ ने सनसनीखेज खुलासा किया. उन्होंने कहा कि उस समय पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियां जैश ए मोहम्मद के साथ मिलकर भारत में बम धमाकों को अंजाम दे रही थीं. इसलिए जैश ए मोहम्मद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई.
आपको याद दिला दें कि 2001 में संसद पर हुए आतंकवादी हमले में लश्कर ए तैयबा के साथ जैश ए मोहम्मद भी शामिल था. हाल ही में पुलवामा में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी भी जैश ने ली है. इस हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 44 जवानों ने बलिदान दिया. हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान के अंदर बालाकोट में चल रहे जैश के आतंकवादी कैंपों पर हवाई हमला किया था.
इससे पूर्व, पाकिस्तान के विदेश मंत्री स्वीकार कर चुके हैं कि पाकिस्तान की एजेंसियां मसूद अजहर के संपर्क में थीं. यह भी स्पष्ट है कि मसूद अजहर उनकी सुरक्षा में था. अब मुशर्रफ के इस खुलासे से साफ है कि आईएसआई और पाकिस्तान की सरकार भारत में होने वाले आतंकवादी हमलों में शामिल है. पाकिस्तान अब आतंकवाद के खिलाफ जिस कार्रवाई का दिखावा कर रहा है, वह आंख में धूल झोंकने जैसा है. पाकिस्तान और आतंकवाद का नापाक गठजोड़ असल में भारत के खिलाफ उसकी छाया युद्ध (प्राक्सी वॉर) की नीति का हिस्सा है. नए-नए आतंकवादी संगठन खड़े करके पाकिस्तान भारत को हजार घाव देकर हराने की अपनी युद्धनीति को अमल में ला रहा है. लेकिन भारत की एक के बाद एक दो सर्जिकल स्ट्राइक और मोदी सरकार की कूटनीति ने पाकिस्तान को अलग-थलग कर दिया है. आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान इस कदर घिर चुका है कि उसका खास दोस्त चीन भी अब कन्नी काटने लगा है. पुलवामा हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से पारित प्रस्ताव पर ना-नुकूर के बाद भी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का रुख देखते हुए चीन को हस्ताक्षर करने पड़े थे. ऐसे में पाकिस्तान अब आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का दिखावा करते हुए खुद को दहशतगर्दी से पीड़ित मुल्क के रूप में दुनिया के सामने पेश करने की कूटनीतिक चाल चल रहा है.
( साभार इनपुट-़ ऋतम)