जुमले गढ़ने वाले परेशान हैं धरातल पर उतरते नारों से
   दिनांक 01-अप्रैल-2019
जो स्वयं जुमले गढ़ते और उनसे सत्ता पाते आए हैं आज वह धरातल पर उतरते नारों से परेशान हैं। कांग्रेस के खिलाफ जब भी आवाज उठती है वह भ्रम फैलाने लगती कि जुमले गढ़े जा रहे हैं

फोटो वर्ष 2012 के उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के समय की है जब अखिलेश यादव ने बेरोजगारी भत्ता देने की घोषणा की थी। भीड़ इतनी थी कि कानून - व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो गया था. बाद में किसी को भत्ता नहीं मिला 
 
भूमिहार का - भू , राजपूत का - रा , ब्राह्मण का बा और लाला का - ल , इन सबको मिला कर लालू यादव ने बनाया था ‘भूरा बाल’. वैसे जब बात उद्धरण चिन्हों और शब्दकोशों पर चल पड़ी है तो जहां से लालू यादव ने ल उठाया, वहां पर ला होना चाहिए था. लेकिन तब यह जुमला पूरा फिट नहीं बैठता इसलिए ल में आ की मात्रा को छोड़ दिया और सिर्फ ‘ल’ को उठाया. तब लालू यादव ने बिहार में 90 के दशक में जुमला दिया - भूरा बाल साफ़ करो मतलब कि भूमिहार, राजपूत , ब्राह्मण और लाला साफ़ करो. यह वही दौर था जब उतर प्रदेश में बसपा ‘तिलक , तराजू और तलवार इनको मारो जूते चार’ का जुमला देकर हिंदू समाज में फूट डाल रही थी।
जातिगत नफरत को उभार रही थी. इन जुमलों के माध्यम से राजनीति में नफरत को बढ़ाने की परम्परा कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों ने शुरू की थी. अब सेकुलर मीडिया के रविश कुमार को यह क्यों नया लगता है. यह अंदाजा लगा पाना समझ से परे है. सराब और शराब पर उठे विवाद पर रविश कुमार अपने प्राइम टाइम पर इस कदर परेशान थे कि बस उनकी बेचैनी देखते ही बन रही थी. उन्होंने कहा कि “इस बार का चुनाव बस बच गया नहीं तो मुद्दों के बजाय डिक्शनरी पर लड़ा जाने वाला था. राजनीति मुद्दों से भटक गयी और जनता जुमलों में अटक गयी.”
दरअसल, जनता को जुमलों में अटकाने का कारोबार कांग्रेस और जातिगत आधार पर राजनीति करने वाला क्षेत्रीय दल कई दशकों से करते आ रहे हैं. जुमलेबाजी का आरोप लगाने वालों की बातों में तनिक भी सचाई होती तो शीला दीक्षित और पी. चिदम्बरम, नरेन्द्र मोदी की तारीफ़ भला क्यों करते. दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने यह स्वीकार किया कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने में मनमोहन सिंह, नरेन्द्र मोदी जितने दृढ नहीं थे. यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहे पी. चिदंबरम ने भी राजमार्ग निर्माण और गंगा सफाई के कार्यों की प्रशंसा की. चिदंबरम ने कहा कि “जितने किलोमीटर सड़कें हम लोग बनाते थे. उससे ज्यादा सड़कें इस सरकार में बनी हैं और गंगा की सफाई में बड़े पैमाने पर कार्य हुआ है.”
आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान पूरी दुनिया से अलग – थलग पड़ चुका है. अभिनन्दन की वापसी उसका ज्वलंत प्रमाण है. यूपीए सरकार के समय में मुम्बई लोकल ट्रेन में 7 सीरियल बम विस्फोट और ताज होटल पर हमले जैसी आतंकी घटनायें हुई थी. यूपीए सरकार ने सिर्फ इतना किया था कि राजनयिक स्तर की वार्ता पाकिस्तान से बंद कर दिया था. लेकिन आज पाकिस्तान की हालत खस्ता है. वह भारत से युद्ध नहीं चाहता है. अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नारा दिया कि “बूढों को दवाई , किसानों को सिंचाई और नौजवानों को कमाई” , तो इसे धरातल पर उतारा गया है. उत्तर प्रदेश के रायबरेली जनपद में एम्स जैसा अस्पताल बनकर तैयार हुआ. अब वहां पर ओ. पी. डी. भी शुरू हो चुकी है. गोरखपुर में एम्स बन रहा है. आयुष्मान भारत की योजना से करोड़ों लोगों को मुफ्त में इलाज प्राप्त हो रहा है. कैंसर और गंभीर ह्रदय रोग की दवाओं के दाम घटाये गए हैं. आधी सदी से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी भारत के गावों में बिजली के खम्भे नहीं लग पाए थे. आज सभी जगह पर बिजली पहुंचाई गयी है. इसके अतिरक्त विकास कार्यों की लम्बी सूची है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारों को जुमला कह कर घेरने वाले आखिर यह कैसे भूल जाते हैं कि जुमले की बुनियाद उन्हीं लोगों ने रखी थी. वर्ष 2007 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने जुमला दिया – “रोटी कपड़ा सस्ती होगी , दवा और पढ़ाई मुफ्त होगी.” मगर मुलायम सिंह यादव चुनाव हार गए. उस चुनाव में बसपा को सत्ता मिली. बसपा ने जुमला दिया था – “चढ़ गुंडों की छाती पर , अब मुहर लगेगी हाथी पर”. वर्ष 2012 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में जितने भी माफियाओं का टिकट सपा में अखिलेश यादव ने काटा , उन सभी को मायावती ने बसपा का टिकट दे दिया. विपक्ष ने मजाक उड़ाते हुए कहा कि – “चढ़ गए गुंडे हाथी पर. अब मुहर लगेगी बाकी पर.” अखिलेश यादव ने दिया था बेरोजगारी भत्ता का जुमला. सपा को सत्ता में लाने के लिए अखिलेश यादव का बेरोजगारी भत्ता देने का जुमला काम कर गया. प्रदेश में 5 साल सपा की सरकार रही एक बेरोजगार को भत्ता नहीं मिला. वर्ष 2012 में जब अखिलेश यादव ने बेरोजगारी भत्ता की घोषणा की थी तब रोजगार दफ्तर पर इस कदर भीड़ उमड़ पडी थी कि आये दिन पुलिस लाठी चार्ज हो रहा था. अखिलेश की जनसभाओं में उस समय एक जुमला खूब उछलता था – “जिस ओर जवानी चलती है उस ओर जमाना चलता है.”
दरअसल, जुमलों और कविताओं के माध्यम से जनता को सपना बेचने का काम अभी तक इन्हीं कांग्रेसियों और क्षेत्रीय दलों ने किया है. कांग्रेस के खिलाफ जब भी इस प्रकार की आवाज उठती है तब वह यही भ्रम फैलाती हैं कि जुमले गढ़े जा रहे हैं. इंदिरा गांधी ने आपातकाल लागू करके लोकतंत्र की जड़ों को हिलाने का असफल प्रयास किया. जय प्रकाश नारायण ने इंदिरा गांधी के खिलाफ उबल रहे गुस्से की बागडोर को थामा. सिंहासन खाली करो कि जनता आती है। . जे पी मूवमेंट का अपने स्तम्भ में जिक्र करते हुए एक बार डॉ. विद्या निवास मिश्र ने लिखा था “ जब जे. पी. नौजवानों का नेतृत्व करते हुए निकले यह नारा गगन की ऊंचाइयों को छू रहा था .” इतनी भीड़ अपने जीवन में मैंने पहली बार देखी थी.बहरहाल, जुमलों को गढ़ कर जनता को सपना बेचने वाली कांग्रेस परेशान है क्योंकि नरेन्द्र मोदी के नारे धरातल पर उतर रहे हैं.