मायावती के नहले पर योगी का दहला
   दिनांक 10-अप्रैल-2019
चुनावी सभा में मायावती द्वारा मुसलमानों को सपा—गठबंधन को वोट करने की अपील के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जवाब दिया है। उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चुनावी रैलियों में मायावती द्वारा दिए गए इस बयान पर तंज कसते हुए कहा कि आदित्यनाथ ने कहा कि उन लोगों को केवल मुस्लिम वोट चाहिए बाकी वोट नहीं चाहिए. बाकी वोट मुझे चाहिए.
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 1946 में जोगेन्द्रनाथ मंडल ने दलित राजनीति शुरू की और मुस्लिम लीग में शामिल हो गए. जोगेन्द्रनाथ मंडल ने देश के साथ विश्वास घात किया. दलित - मुस्लिम एकता के नाम पर देश का बंटवारा कराने में वो शामिल रहे. मंडल , पाकिस्तान में पहले कानून मन्त्री बने. जोगेन्द्रनाथ मंडल पाकिस्तान में दलितों की दुर्दशा को रोक नहीं सके. उन्होंने दलितों के साथ विश्वास घात किया. अब ठीक वही काम मायावती कर रही हैं. अब आप सभी को सजग रहना है कि देश फिर से किसी षड्यंत्र का शिकार न होने पाए.
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज मुसलमानों का वोट मांगने वाले तब कहां थे जब मुजफ्फरनगर में दंगा हुआ था.दंगे के समय निर्दोष सचिन और गौरव मारे गये थे. उस समय समाजवादी पार्टी की सरकार थी. उस सरकार के मंत्री आज़म खान दंगाइयों को बचाने में लगे हुए थे. उस समय चौधरी अजित सिंह विदेश यात्रा पर गए हुए थे. चौधरी अजित सिंह अपने पिता के आदर्शो को तिलांजलि दे दी. उधर अखिलेश यादव ने अपने पिता को ही बाहर निकाल दिया.
दरअसल अभी तक मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करके ये लोग सत्ता हासिल करते आये हैं. समाजवादी पार्टी ने हमेशा से यादवों और मुसलमानों पर अपना ध्यान केन्द्रित रखा. यही वजह है कि सपा के घोषणा पत्र में अखिलेश यादव ने अहीर रेजिमेंट बनाने की बात कही है ताकि यादव बिरादरी के लोगों को यह एहसास बना रहे कि अखिलेश यादव उनकी दिन रात चिंता करते हैं. लेकिन वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद हिदुस्थान की राजनीति की असलियत बदल चुकी है. अब हिन्दू संगठित हो चुके हैं. अभी तक क्षेत्रीय दल मुसलमान तुष्टीकरण के साथ पिछड़ों , अगड़ो और दलितों के बीच जातिगत नफरत को उभार कर मतों का बंटवारा करा कर चुनाव जितवाने में कामयाब हो जाया करते थे.
वर्तमान समय में परिस्थितियां बदली हुई हैं. अब जातिगत नफरत फैलाने का प्रयास पूरी तरह फेल हो चुका है. क्षेत्रीय दलों का यह बहकावा जनता समझ चुकी है. अब केवल मुसलमान ही बचे हैं जिस पर सपा - बसपा - रालोद अलग अलग ढंग से डोरे डाल रहे हैं. इनके कामयाब न हो पाने की वजह यह है कि बसपा से दलित और सपा से यादव वोट बैंक खिसक चुका है।