क्या 30 करोड़ में टिकट बेच रहीं हैं मायावती
   दिनांक 13-अप्रैल-2019
“मायावती के बेहद करीबी रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने मायावती पर लगाया टिकट बेचने का आरोप”

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा नेता दया शंकर सिंह ने मायावती पर टिकट बेचने का आरोप लगाया था. इस बयान पर बसपा ने भूचाल खड़ा कर दिया था. मायावती इस कदर आग - बबूला हुईं कि उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सन्देश कहलवाया कि “उस भाजपा नेता को जेल भिजवा दो.” बसपा के कार्यकर्ता उग्र हो गए. दया शंकर सिंह के खिलाफ एफ.आई.आर दर्ज हुई, वह जेल भेजे गए. इस बार के लोकसभा चुनाव में मायावती के बेहद करीबी रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी (अब कांग्रेस में) ने उनके ऊपर टिकट बेचने का खुलेआम आरोप लगाया है. एक वीडियो में नसीमुद्दीन सिद्दीकी चुनाव प्रचार के दौरान लोगों से यह कह रहे हैं कि एक प्रत्याशी से पैसा लिया जाता है और जब दूसरा प्रत्याशी उससे ज्यादा पैसा देने के लिए तैयार हो जाता है तो पहले वाले का टिकट काट दिया जाता है.
वीडियो में नसीमुद्दीन कह रहे हैं “मै मस्जिद से नमाज पढ़ कर आ रहा हूँ ''अल्लाह मेरी नमाज मेरे मुंह पर मार दे . मैंने कसम खा रखा था कि अगर इकबाल का टिकट होगा तो मैं चुनाव नहीं लडूंगा. एक बार इकबाल का टिकट हुआ दस करोड़ में , इसके बाद उसका टिकट काट कर उसे पार्टी से बाहर निकाल दिया. दोबारा किसी और का 15 करोड़ में हो गया. इसके बाद उसका भी काट दिया. 20 करोड़ में फिर इकबाल भाई का टिकट कर दिया. उसके बाद 25 वाले आ गए. इकबाल का टिकट फिर काट कर के 25 करोड़ वाले का हो गया. उसके बाद 30 करोड़ वाला आ गया. अरे मेरे दोस्तों ! ये 30 करोड़ किस बात के हैं. ये 30 करोड़ रूपये में हमारे आपके वोट की कीमत लगाई जा रही है.''
 
बता दें कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी मायावती के बेहद करीबी रहे हैं. मायावती जब - जब मुख्यमंत्री बनी, सबसे महत्वपूर्ण विभाग, नसीमुद्दीन को ही दिए गए. वर्ष 2007 में जब बसपा को पूर्ण बहुमत मिला था उस समय मायावती ने नसीमुद्दीन को लोक निर्माण विभाग समेत आधा दर्जन महत्वपूर्ण विभागों का मंत्री बनाया था. जनसभाओं एवं कार्यक्रम आदि में नसीमुद्दीन परछाई की तरह मायावती के साथ रहते थे. नसीमुद्दीन के अलावा भी कई ऐसे नेता रहे जो मायावती के बेहद विश्वसनीय समझे जाते थे मगर बहुत लम्बे समय तक उन लोगों की मायावती से नहीं निभ पाई. बाबू सिंह कुशवाहा, मायावती के बंगले पर ‘टेलीफोन ड्यूटी‘ का काम देखते थे. बसपा सरकार में मंत्री बनने के बाद भी बाबू सिंह कुशवाहा ने ‘टेलीफोन ड्यूटी’ की सेवा को नहीं छोड़ा था. मंत्रालय की पत्रावली बंगले पर ही मंगा लिया करते थे. मगर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए आये 2900 करोड़ रूपये के घोटाले में मायावती ने तुरंत पल्ला झाड़ लिया और बाबू सिंह कुशवाहा जेल चले गए. कभी बसपा में रहे स्वामी प्रसाद मौर्या की भी ज्यादा समय तक नहीं निभी. ऐसे कई उदाहरण हैं मगर नसीमुद्दीन ही ऐसे नेता थे जिनसे मायावती कभी नाराज नहीं हुई थीं. बसपा के सभी नेता यह मानते थे कि मायावती,नसीमुद्दीन पर बहुत भरोसा करती हैं. मगर नोटबंदी के कारण दोनों के संबंधों में खटास आ गई. नकद पैसे के हिसाब - किताब में मायावती ने नसीमुद्दीन पर दबाव बनाया कि जो भी घाटा हुआ है उसको पूरा किया जाए. जिस समय विवाद हुआ था उस समय का एक आडियो टेप वायरल हुआ था जिसमे नसीमुद्दीन मायावती से कह रहे हैं " बहन जी मैं अपनी प्रापर्टी बेच कर के पैसा दे दूंगा, बहनजी ! आप परेशान मत होइए.” उसी के बाद बसपा छोड़ कर नसीमुद्दीन कांग्रेस में चले गए. आश्चर्य की बात है कि अभी तक मायावती ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी के इस आरोप का कोई खंडन नहीं किया और ना ही कोई एफ.आई.आर दर्ज कराई है .