बौखलाई कांग्रेस ओछी राजनीति पर उतरी
   दिनांक 15-अप्रैल-2019
 
रिंग में जब दो खिलाड़ी एक दूसरे लड़ रहे होते हैं तो लड़ाई के कुछ नियम होते हैं। इस दौरान नियमानुसार 'बिलो द बेल्ट' वार नहीं किया जाता। जिस तरीके से चुनाव में राष्ट्रवादी लहर है, भ्रष्टाचार का छींटा तक नहीं है, वहां ऐसे शख्स के खिलाफ लड़ना बहुत मुश्किल हो जाता है. ऐसे में कांग्रेस अपने मूल संस्कार, यानी  'बिलो द बेल्ट' वार करने की रणनीति पर उतर आई है.
एक बार फिर कांग्रेस की बी टीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक्शन में है. ये अवार्ड वापसी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता गैंग के मेंबर हर चुनाव में टर्राते हैं. परदे के पीछे की हकीकत ये है कि सब कांग्रेस की सुनियोजित रणनीति है. इस रणनीति में आपको कुछ जाने-माने नाम देश में खौफ का माहौल बताते मिलेंगे, संविधान की दुहाई देते नजर आएंगे. फिर कुछ फर्जी चिट्ठियों के तूफान उठेंगे और आखिरकार कांग्रेस के नेता गाली पर उतर आएंगे. इस चुनाव में भी यही हो रहा है. जिस तरीके से चुनाव में राष्ट्रवादी लहर है, भ्रष्टाचार का छींटा तक नहीं है, वहां ऐसे शख्स के खिलाफ लड़ना बहुत मुश्किल  है. ऐसे में कांग्रेस अपने मूल संस्कार, यानी 'बिलो द बेल्ट' वार करने की रणनीति पर उतर आई है.
दुश्मनी के भी कुछ उसूल होते हैं. लेकिन कांग्रेस को उसूलों से कुछ लेना देना नहीं है. 55 साल तक राज करते करते कांग्रेस ने देश में दो विकल्प छोड़े थे. या तो आप कांग्रेसी हैं, या फिर आप नहीं हैं. आप कविता नहीं लिख सकते, आप गाने नहीं गा सकते, आप लेख नहीं लिख सकते, यहां तक कि आप कहीं अपनी मर्जी से आ या जा भी तभी सकते थे, जब आप कांग्रेस को पसंद हों. इमरजेंसी में किशोर कुमार के गानों का ब्लैक आउट हो गया था क्योंकि वह आपातकाल के विरोधी थे. जनसंघ संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जम्मू-कश्मीर की जेल में रहस्यमयी मौत हो गई थी क्योंकि वह कांग्रेस की मर्जी के खिलाफ कश्मीर जाना चाहते थे. आज अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पैरोकार भूल गए हैं कि बोफोर्स की खबरें रोकने के लिए प्रेस पर छापे लगे थे.
लेकिन 2014 का साल भारत के इतिहास में कांग्रेस के पतन के तौर पर दर्ज हो चुका है. कांग्रेस 1977 में हारी थी, 1997 में हारी थी, लेकिन 2014 की तरह पस्त नहीं हुई थी. 44 लोकसभा सीटों के साथ कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल बनने के काबिल भी नहीं रह गई थी. 2019 का चुनाव कांग्रेस के अस्तित्व का सवाल है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, उनकी माता सोनिया गांधी, बहन प्रियंका वाड्रा गांधी और जीजा राबर्ट वाड्रा गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे हैं. इस चुनाव प्रचार के दौरान भी राहुल और सोनिया अग्रिम जमानत पर हैं. चुनाव के नतीजे सिर्फ कांग्रेस पार्टी ही नहीं, इस परिवार के भविष्य का भी फैसला करेंगे. ऐसे नाजुक समय पर कांग्रेस के लिए चुनाव में भी कुछ खास बाकी नहीं है. अतीत के हर चुनाव से अलग इस बार भ्रष्टाचार कोई मुद्दा नहीं है. महंगाई है नहीं. गरीबी-बेरोजगारी पर कांग्रेस की बातों को देश की जनता मजाक की तरह लेती है. प्रियंका वाड्रा को महासचिव बनाकर उतारने का कार्ड भी देश के युवा के बीच नहीं चल पाया.
 
सेना के पूर्व अधिकारियों के नाम से फर्जी चिट्ठी
सेना के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर पूर्व सैन्य अधिकारियों की ओर से कथित तौर पर राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखे जाने का मामला कांग्रेस के इस गंदे खेल का सटीक उदाहरण है. कांग्रेस के कुछ मनपसंद मीडिया संस्थानों ने रिपोर्ट उछाली कि 3 सेना प्रमुखों समेत कुल 156 पूर्व सैन्य अधिकारियों ने सेना के नाम के चुनाव में इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए चिट्ठी लिखी है. जब चुनाव राष्ट्रवाद के मुद्दे पर हो, सेना के शौर्य पर सवाल उठाने वालों को जवाब देने का मन देश का मतदाता बना चुका हो, यह चिट्ठी एक हथियार बन सकती थी. लेकिन अब वो जमाना नहीं रहा कि कांग्रेस जो दिखाना चाहती है, वही देश देखे. पूर्व आर्मी चीफ एस.एफ रॉड्रिग्स और एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी ने ऐसी किसी चिट्ठी के लिए अपनी सहमति से इनकार किया है. दोनों के हस्ताक्षर कथित चिट्ठी पर बताए जाते हैं, लेकिन दोनों ने ही स्पष्ट कर दिया कि उन्होंने कहीं कोई दस्तखत नहीं किए. सेना के अंगों के पूर्व प्रमुखों के नकली हस्ताक्षर बना लेने के पीछे कितनी बड़ी साजिश और कितना शातिर दिमाग होगा, जरा सोचिए
 
मुरली मनोहर जोशी ने स्पष्ट किया उन्होंने ऐसी कोई चिट्ठी आडवाणी जी को नहीं लिखी  
जोशी की फर्जी चिट्ठी
शनिवार को भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी की एक कथित चिट्ठी सामने आई. ये भी कमोबेश पूर्व सैन्य अधिकारियों की चिट्ठी जैसा फर्जीवाडा था. सोशल मीडिया पर समाचार एजेंसी एएनआई के लोगो वाली चिट्ठी वायरल की गई. कथित तौर पर यह चिट्ठी 13 अप्रैल 2019 को मुरली मनोहर जोशी ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी को लिखी थी. चिठ्ठी में ये आरोप लगाया गया था कि उन्हें (आडवाणी और जोशी) को घर के लोगों ने अपमानित करके बाहर निकाल दिया. इसमें भाजपा के लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन का दावा भी किया था. लेकिन शाम होते-होते मुरली मनोहर जोशी के दफ्तर ने स्पष्ट कर दिया गया कि यह फेक चिट्ठी है, उन्होंने ऐसी कोई चिट्ठी नहीं लिखी. समाचार एजेंसी एएनआई ने भी स्पष्ट कर दिया कि उसके वॉटर मार्क के साथ जारी की गई चिट्ठी फेक है.
फिल्म कलाकारों के कंधे पर बंदूक
बॉलीवुड में भी हमेशा से एक भाजपा विरोधी खेमा कांग्रेस के इशारे पर काम करता रहा है. एक सप्ताह पहले ही अमोल पालेकर, नसीरूद्दीन शाह, गिरीश कर्नाड, उषा गांगुली समेत बॉलीवुड और थियेटर की 600 से अधिक हस्तियों ने पत्र जारी किया था. इसमें कहा गया था कि भाजपा से भारत और उसके संविधान को खतरा है. लोगों से अपील की गई थी कि इस चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगी दलों को वोट न दें. मीडिया में इस चिट्ठी ने बहुत सुर्खियां बटोरी. लेकिन जवाब में 900 से ज्यादा बॉलीवुड और शास्त्रीय कलाकारों ने नरेंद्र मोदी के पक्ष में चिट्ठी जारी की, तो इसी मीडिया को सांप सूंघ गया. पंडित जसराज, विवेक ओबराय, रूपा गांगुली समेत 900 से अधिक कलाकारों ने एक बयान जारी करके लोगों से भाजपा के लिए वोट देने की अपील की. चिट्ठी में कहा गया है कि देश को मजबूत सरकार चाहिए, ना कि मजबूर सरकार. इसमें शंकर महादेवन, त्रिलोकी नाथ मिश्रा, कोयना मित्रा, अनुराधा पौडवाल और हंसराज हंस जैसे कलाकार शामिल हैं.
दस गालियां, जो वोटर को याद हैं
बौखलाया हुआ कमजोर शख्स और क्या कर सकता है. गालियां देता है. कांग्रेस के नेता देश के कोने-कोने में इस समय प्रधानमंत्री को कोस रहे हैं, गालियां दे रहे हैं. असल में जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ही बदजुबानी पर उतर आए हों, तो उनके खास नेता तो प्रेरणा पाएंगे ही...
1. नौ अप्रैल को गुजरात कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अर्जुन मोढ़वाडिया ने बनासकांठा में कहा कि एक सेहतमंद व्यक्ति का सीना 36 इंच का होता है, बॉडी बिल्डर का सीना 42 इंच का हो सकता है, केवल गधों का सीना 56 इंच का होता है. (आप ही बताइये, इसमें कौन सा चुनावी मुद्दा छिपा है)
2. 18 मार्च को कर्नाटक में कांग्रेस नेता व राहुल गांधी के खास चहेते बी. नारायण राव ने मोदी को लेकर विवादित बययान दिया. बीदर में एक जनसभा में राव ने कहा जो लोग नामर्द हैं वे शादी कर सकते हैं, लेकिन बच्चे नहीं कर सकते. प्रधानमंत्री मोदी शादी कर सकते हैं, लेकिन बच्चे नहीं हो सकते. (यही सवाल अगर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए कर दिया जाता, तो मीडिया ने देश में तूफान खड़ा कर दिया होता)
3. 16 मार्च को कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक टीवी बहस के दौरान मोदी का मतलब आतंकी मसूद अजहर, ओसामा बिन लादेन, दाऊद इब्राहिम और आईएसआई बताया. (वहीं डिबेट में मौजूद लोगों ने खड़े होकर खेड़ा के लिए शेम-शेम के नारे लगाए)
4. 9 मार्च को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तेलंगाना के शमशाबाद में चुनावी सभा में मंचासीन थे. मंच से तेलंगाना की अध्यक्ष विजयाशांति ने कहा कि लोग प्रधानमंत्री मोदी से डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि पता नहीं कब वे बम फेंक दें. वे आतंकी जैसे दिखते हैं. वह लोगों को डराते हैं. (लोगों का तो पता नहीं, लेकिन कांग्रेसियों का डर इस बयान में नजर आता है)
5. 25 जनवरी को राहुल गांधी के दुलारे राशिद अल्वी ने कहा कि प्रधानमंत्री खुद को महलों में रहते हैं, लाखों का सूट पहनते हैं. लेकिन अपनी बुजुर्ग मां को छोटे से कमरे में रखते हैं. (अल्वी उस परंपरा से आते हैं, जहां मां, बेटा, बेटी और दामाद कई एकड़ में फैले बंगलों में रहते हैं)
6. दस जनवरी को सुशील कुमार शिंदे ने नरेंद्र मोदी को हिटलर बताया. कहा कि पीएम मोदी एक तानाशाह की तरह बर्ताव कर रहे हैं. (शिंदे उन वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं में से हैं, जिन्होंने इमरजेंसी देखी है)
7. 7 दिसंबर को कांग्रेस की मीडिया ब्रीफिंग में प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिल्कुल मोहम्मद बिन तुगलक की तरह व्यवहार कर रहे हैं. (बता दें कि तुगलक रोड पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का निवास है)
8. 25 नवंबर 2018 को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खास जिग्नेश मेवाणी ने ट्वीट किया. उनका कहना था कि प्रधानमंत्री मोदी एक नालायक बेटे हैं क्योंकि नोटबंदी को जस्टिफाई करने के लिए उन्होंने 90 साल की मां को कतार में खड़ा कर दिया. (जी हां, नोटबंदी के दौरान कतार में राहुल गांधी भी खड़े हुए थे)
9. 22 नवंबर 2018 को इंदौर की एक चुनावी सभा में कांग्रेस के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष व राहुल गांधी के खास राज बब्बर ने सारी मर्यादाएं ही तोड़ डाली. कहा कि आज डॉलर के सामने रुपया इतना गिर गया है कि पीएम मोदी की मां की उम्र के करीब पहुंचने वाला है. (कितनी घिनौनी तुलना है न ये)
10. राहुल के खास नेताओं द्वारा गालियों का सिलसिला असल में खुद कांग्रेस अध्यक्ष ने 20 सितंबर 2018 को शुरू कर दिया था. राजस्थान के डूंगरपुर में उन्होंने कहा था कि जनता के दिल एक नई आवाज उठ रही है. हिंदुस्तान का चौकीदार चोर है. (राहुल को उम्मीद नहीं होगी कि उनका ये हमला मैं भी चौकीदार जैसे जन-जन में फैले अभियान को जन्म दे देगा).