'चौकीदार चोर है' बयान पर फंसे राहुल, सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब
   दिनांक 15-अप्रैल-2019
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार तक उन्हें जवाब देने के लिए कहा है. राहुल गांधी ने मनगढंत तरीके से ये कहा था कि अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया है कि चौकीदार चोर है. अवमानना याचिका पर अगर अदालत राहुल गांधी के जवाब से संतुष्ट नहीं हुई, तो कांग्रेस अध्यक्ष बड़ी मुश्किल में फंस सकते हैं.
जब कोई लगातार झूठ बोलता है, तो एक दिन पकड़ा जाता है. राफेल मामले पर हवाई आरोपों के जहाज उड़ाते-उड़ाते कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की आज यही स्थिति हो गई. सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार तक उन्हें जवाब देने के लिए कहा है. चुनाव से पहले ही राहुल गांधी ने फ्रांस के साथ लड़ाकू विमानों की खरीद के इस सौदे को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने शुरू कर दिए थे. सभी आरोप औंधे मुंह गिरने के बाद राहुल गांधी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के पुनर्विचार याचिका पर विचार के लिए कुछ दस्तावेजों को स्वीकार कर लेने के बाद एक बार फिर चौकीदार चोर है का राग अलापा था. इस बार उन्होंने गलती बड़ी कर दी. कहा कि सुप्रीम कोर्ट कह रहा है कि चौकीदार चोर है. ये कहना राहुल को भारी पड़ गया और सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी से सात दिन में इस संबंध में जवाब मांग लिया।
दरअसल 10 अप्रैल को राफेल मामले सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका की सुनवाई में उन दस्तावेजों पर विचार करने का फैसला किया था, जिसे केंद्र ने गोपनीय बताकर पेश करने से एतराज किया था. ये राफेल डील से जुड़े रक्षा मंत्रालय के गोपनीय दस्तावेजों की छायाप्रतियां हैं. केंद्र सरकार का एतराज इनके विशेषाधिकार को लेकर था. सुप्रीम कोर्ट ने बस इतना कहा था कि वह इन दस्तावेजों पर विचार का अधिकार रखता है. सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका इसलिए दाखिल की गई क्योंकि पूर्व में दाखिल याचिका को सुप्रीम कोर्ट राफेल सौदे से संतुष्ट होकर खारिज कर चुका है. सुप्रीम कोर्ट से ये मामला खारिज होने के बाद भी राहुल गांधी राफेल में घोटाले में शोर मचाते रहे, लेकिन देश ने इसकी ओर ध्यान नहीं दिया. पुनर्विचार याचिका में कुछ फोटोस्टेट दस्तावेजों पर गौर करने के अदालत के आदेश को राहुल गांधी ने अपनी जीत के तौर पर पेश किया. उन्होंने चुनावी सभाओं में ऐलानिया कहा कि अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया कि चौकीदार ने ही चोरी कराई.
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की इसी टिप्पणी को लेकर अगले सोमवार तक सफाई मांगी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ''हम यह स्पष्ट करते हैं कि राफेल मामले में दस्तावेजों को स्वीकार करने के लिए उनकी वैधता पर सुनवाई करते हुए इस तरह की टिप्पणियां करने का मौका कभी नहीं आया.'' जाहिर है, सुप्रीम कोर्ट इस बात से नाराज है कि जो टिप्पणी उन्होंने की ही नहीं, वह राहुल गांधी कैसे इस तरह के जनता के सामने पेश कर सकते हैं. बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने 12 अप्रैल को राहुल गांधी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की थी. लेखी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ की जानकारी में ये मामला लाते हुए कहा कि अदालत की कार्यवाही को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष ने टिप्पणी की थी कि ‘‘अब सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया, चौकीदार चोर है.’’ अवमानना याचिका में गया है कि चौकीदार चोर है के अपने बयान को राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के बयान की तरह पेश किया. इस प्रकार उन्होंने राफेल मामले में गोपनीय दस्तावेज को भी बहस का हिस्सा बनाने के कोर्ट के फैसले को गलत तरीके से पेश किया.
“राफेल को लेकर राहुल गांधी लगातार गलतबयानी करते रहे हैं, जनता को गुमराह करने की कोशिश करते रहे हैं. उनके झूठ की फेहरिस्त बहुत लंबी है. भाजपा भी इस फेहरिस्त को तथ्यों के साथ जारी कर चुकी है.”
1. राहुल ने फ्रांस की मीडिया की रिपोर्ट को तोड़-मरोड़कर पेश करते हुए यह बताने का प्रयास किया कि दसॉल्ट को भारत से डील करने के लिए अंबानी को ऑफसेट पार्टनर बनाना पड़ा. असलियत ये कि सुप्रीम कोर्ट और दसॉल्ट के सीईओ ने कहा है कि ऑफसेट पार्टनर के चयन में भारत सरकार का कोई हाथ नहीं था.
2. राहुल गांधी ने यह भ्रम फैलाने का प्रयास किया की कि देश की शीर्ष अदालत ने इस सौदे में गंभीर खामियां पाईं हैं. कोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज करते हुए कहा था कि इस सौदे में कुछ भी गलत नहीं किया गया है.
3. कांग्रेस अध्‍यक्ष ने दावा किया कि रक्षा मंत्रालय के एक बड़े अफसरों को राफेल डील के विरोध करने के लिए मोदी सरकार ने सजा दी. असलियत ये कि राहुल का यह झूठ उस समय बेनकाब हो गया जब अधिकारी ने खुद मीडिया से बातचीत में किसी भी तरह की सजा से इनकार किया.
4. राहुल ने सनसनीखेज तरीके से दावा किया था कि फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ओलांद ने प्रधानमंत्री मोदी को चोर कहा और भारत सरकार ने उनसे रिलायंस को सौदे में शामिल करने के लिए कहा. राहुल गांधी के इस आरोप के तुरंत बाद फ्रांस सरकार ने अपने आधिकारिक बयान इन आरोपों को खारिज कर दिया.
5. राहुल ने संसद में भी झूठ बोले और कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रो ने उनसे स्वयं कहा कि इसमें कोई गोपनीय धारा नहीं है. इसके बाद एक बार फिर फ्रांस की सरकार को सामने आना पड़ा. फ्रांस सरकार ने उनके झूठ को खारिज करते हुए बयान जारी किया और कहा कि समझौता किसी भी पक्ष को गोपनीय जानकारी साझा करने की इजाजत नहीं देता.
6. राहुल ने यूपीए के दौरान इस डील की कई कीमतें गिनाईं, जैसे - संसद में उन्होंने कहा 520 करोड़ -कर्नाटक में कहा 526 करोड़ -राजस्थान में कहा 540 करोड़ -दिल्ली में कहा 700 करोड़. बीजेपी का कहना है कि झूठ बोलने के मामले में राहुल नोबेल के हकदार हैं.
7. राहुल ने कहा कि मोदी की सरकार ने सैन्य सौदों के नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दायर याचिकाओं को खारिज करने के अपने आदेश में कहा- हम इस बात से सहमत हैं कि इस प्रक्रिया पर वास्तव में संदेह करने का कोई मौका नहीं है.
8. राहुल ने कहा कि यूपीए ने 526/520/540 रुपये में डील की जबकि मोदी सरकार ने यह डील 1600 करोड़ रुपये में की. भाजपा के मुताबिक वे सेब की तुलना संतरे से कर रहे हैं. मोदी सरकार द्वारा बातचीत के जरिये तय की गई कीमत पूरे परिचालन पैकेज के साथ राफेल विमान की है.
9.राहुल ने कहा कि 36 विमान खरीदने का निर्णय वायुसेना को नुकसान पहुंचाने और दोस्त को फायदा पहुंचाने के लिए लिया गया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह निर्णय सैन्य तैयारियों को ध्यान रखते हुए लिया गया और वायुसेना खुश है.