पाबंदी के पहले ही दिन हनुमान मंदिर में योगी, चुनाव आयोग से कहा-बजरंग बली में आस्था अडिग
   दिनांक 16-अप्रैल-2019
चुनाव आयोग प्रचार पर 72 घंटे की पाबंदी के पहले दिन ही योगी आदित्यनाथ ने दिन की शुरुआत हनुमान जी के मंदिर में पूजा करके की. दिन भर वह कई हनुमान मंदिर जाएंगे. योगी ने चुनाव आयोग के नोटिस के जवाब में भी कहा था कि बजरंग बली में उनकी आस्था अटूट है. अपनी आस्था नहीं छोड़ सकते.
चुनाव आयोग की प्रचार पर पाबंदी के 72 घंटे का समय शुरू होते ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजरंग बली की पूजा की. बीस मिनट तक पूजा में उन्होंने हनुमान चालीसा का भी पाठ किया. योगी आदित्यनाथ ने चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के संबंध में चुनाव आयोग के नोटिस के जवाब में भी साफ कर दिया था कि किसी को डर लगता हो तो लगता रहे, मैं बजरंग बली में अपनी आस्था नहीं छोड़ सकता.
मंदिर पहुंचे योगी
मंगलवार को योगी सुबह ही लखनऊ के हनुमान सेतु पर बजरंग बली के मंदिर पहुंच गए. योगी ने मंदिर में बीस मिनट बिताए और हनुमान चालीसा का पाठ किया. मंदिर के बाहर मीडिया जुट गया. लेकिन योगी ने मीडिया से बात नहीं की और मुस्कुराते हुए निकल गए. चूंकि प्रचार पर पाबंदी है, इसके चलते 72 घंटे तक योगी आदित्यनाथ किसी भी जनसभा, नुक्कड़ सभा, राजनीतिक बयान, रोड शो आदि ऐसी किसी भी गतिविधि में हिस्सा नहीं ले सकते, जो चुनाव से जुड़ी हो. इस पाबंदी के तहत किसी किस्म का इंटरव्यू देने पर भी रोक है. योगी आदित्यनाथ ने इस रोक को ही अपना हथियार बना लिया है. मंगलवार का पूरा दिन वह अलग-अलग हनुमान मंदिरों में गुजारने वाले हैं.
क्यों लगी पाबंदी
दूसरे चरण के मतदान तक योगी आदित्यनाथ पर प्रचार पाबंदी लगाई गई है. यह कार्रवाई चुनाव आग ने उन्हें आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी मानते हुए की है. इसका असर ये कि दूसरे चरण की वोटिंग के दिन तक सीएम योगी बीजेपी के लिए प्रचार नहीं कर पाएंगे. चुनाव आयोग ने आचार सहिंता के उल्लंघन के मामले में दोषी पाने के बाद यह कार्रवाई की है. सहारनपुर की जनसभा में बसपा सुप्रीमो मायावती ने मुसलमानों से एकजुट होकर गठबंधन के लिए वोट करने की अपील की थी. इसके जवाब में मेरठ में जनसभा में योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि मायावती जी ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें बस मुसलमानों का वोट चाहिए. इसलिए मैं बाकी वोट आपसे मांगने आया हूं. उन्होंने कहा था कि उनके पास अगर अली है, तो हमारे पास बजरंग बली हैं. इसके अलावा उन्होंने कहा था कि ये लोग मंच-मंच पर जाकर अली-अली चिल्लाते हुए केवल एक हरा वायरस इस देश और संस्कृति में भेजना चाहते हैं, लेकिन इस हरे वायरस की चपेट में पश्चिम यूपी को लाने की आवश्यकता नहीं है. योगी एक इस भाषण की शिकायत चुनाव आयोग से की गई थी.
योगी का दो-टूक जवाब
योगी आदित्यनाथ ने चुनाव आयोग को जो जवाब भेजा, उसमें उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया है. जवाब में योगी ने लिखा-मैंने कभी धर्म और जाति के नाम पर वोट नहीं मांगे, बल्कि ये काम विपक्ष ने किया है. योगी आदित्यनाथ ने नोटिस का जवाब देते हुए 11 अप्रैल को यह चिट्ठी लिखी. चिट्ठी में योगी ने लिखा है कि आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए एक विपक्षी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मुसलमानों से उनकी पार्टी के समर्थन में वोट करने की अपील की थी. देश का एक जिम्मेदार नागरिक होने के कारण मेरा फर्ज बनता है कि ऐसे लोगों का पर्दाफाश किया जाए. क्या धर्म के आधार पर मुस्लिमों से वोट मांगना धर्मनिरपेक्षता की श्रेणी में आता है?
बजरंगबली में मेरी अटूट आस्था- योगी
इस चिट्ठी में योगी आदित्यनाथ ने भाषण में बजरंगबली के उल्लेख के बारे में भी बड़ी साफगोई से अपनी बात रखी. योगी ने लिखा कि बजरंगबली में मेरी अटूट आस्था है और किसी को बुरा लगे या कोई इससे अज्ञानतावश असुरक्षित महसूस करता है तो मैं इस डर से अपनी आस्था को नहीं छोड़ सकता. बजरंग बली मेरे आराध्य हैं. मैं सुबह-शाम हर शुभ कार्य में उनका स्मरण करता हूं. साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि मैंने हरे वायरस शब्द का प्रयोग उस सोच, उस संकीर्ण स्तर की राजनीति के लिए किया है, जिसके तहत राजनीतिक लाभ के लिए स्थापित मूल्यों को नजरअंदाज कर धर्म विशेष को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. मैंने आचार संहिता को कोई उल्लंघन नहीं किया है. चुनाव आयोग के लिए मेरे दिल में पूर्ण सम्मान है और मैं आदर्श आचार संहिता के पालन के लिए प्रतिबद्ध हूं.