साध्वी प्रज्ञा पर हुए जुल्मों की कहानी सुनकर आंखों में आंसू आ जाएंगे
   दिनांक 18-अप्रैल-2019
जी हां, वही साध्वी प्रज्ञा जिन्हें कांग्रेस सरकार ने मालेगांव बम धमाके में फर्जी तरीके से फंसाने का प्रयास किया. कांग्रेस राज में अकल्पनीय यातनाओं की मिसाल साध्वी प्रज्ञा आरोपों से बरी होने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर दिग्विजय सिंह से हिसाब बराबर करेंगी. दिग्विजय को चुनाव में चुनौती देने वाले साध्वी प्रज्ञा को कैसी—कैसी यातनाएं दी गईं वह पढ़कर आपकी आंखों में आंसू आ जाएंगे।
श्रीमान दिग्विजय सिंह हिंदुत्व के सत्य से कम वाकिफ हैं. आतंकवादी सरगनाओं को इज्जत बख्शने वाले दिग्विजय सिंह को शायद अब जाकर कर्मफल के हिंदू सिद्धांत की सत्यता का आभास होगा. दुनिया भर में फैली मुस्लिम दहशतगर्दी को जायज ठहराने के लिए काल्पनिर हिंदू आतंकवाद का हौवा खड़ा करने वाली कांग्रेसी मंडली के अहम किरदार दिग्विजय सिंह का मुकाबला भोपाल लोकसभा सीट पर साध्वी प्रज्ञा से होगा. जी हां, वही साध्वी प्रज्ञा जिन्हें कांग्रेस सरकार ने मालेगांव बम धमाके में फर्जी तरीके से फंसाने का प्रयास किया. कांग्रेस राज में अकल्पनीय यातनाओं की मिसाल साध्वी प्रज्ञा आरोपों से बरी होने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर दिग्विजय सिंह से हिसाब बराबर करेंगी.
साध्वी मैदान में
साध्वी प्रज्ञा ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली. साध्वी प्रज्ञा का भाजपा ने खुले दिल से स्वागत किया. भोपाल में भाजपा के आला नेताओं की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली. इसके बाद साध्वी प्रज्ञा ने ऐलान किया कि मैं चुनाव लड़ूंगी और जीतूंगी. भोपाल लोकसभा सीट का गणित समझिए. यह भाजपा का अभेद्य किला है. अंतिम बार कांग्रेस ने यहां 1984 में जीत हासिल की थी. इसके बाद से लगातार भाजपा यहां जीतती रही है. कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह को यहां लाकर फंसा दिया है. दरअसल उन्होंने चुनौती दी थी कि दिग्विजय सिंह को किसी मुश्किल सीट से लड़ना चाहिए. दिग्विजय सिंह भी ये देखकर भोपाल आ गए कि फिलहाल तीन विधानसभा सीटें कांग्रेस के पास हैं. लेकिन अब साध्वी प्रज्ञा के मैदान में उतरने की संभावना से ही कांग्रेसियों की हालत खस्ता है. असल में साध्वी प्रज्ञा के साथ कांग्रेस राज में हुए अन्याय और अत्याचार से हिंदू मन में पीड़ा है.
कौन है साध्वी प्रज्ञा
साध्वी प्रज्ञा का जन्म मध्य प्रदेश के भिंड जिले के एक गांव में हुआ था. उनका असली नाम प्रज्ञा सिंह ठाकुर है. उनके पिता आयुर्वेद के चिकित्सक थे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे. प्रज्ञा का झुकाव बचपन से ही आध्यात्म की ओर था. उनके पिता गीता पढ़ते थे, तो प्रज्ञा साथ बैठती. इतिहास में स्नातकोत्तर की उपाधि लेने के दौरान प्रज्ञा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय रहीं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में आने के बाद उन्होंने संन्यास ले लिया. प्रज्ञा शानदार वक्ता हैं. उस समय उनके भाषण शैली ने उन्हें मशहूर बना दिया. राजनीतिक कार्यक्रमों में भी उनकी मांग होने लगी. कुछ ही समय में साध्वी प्रज्ञा को भाजपा में स्टार प्रचारक का ओहदा मिल गया. महिलाओं के बीच उनकी गहरी पैठ बन गई. जिस तरीके से वह इस्लामिक आतंकवाद, तुष्टिकरण और कश्मीर में बैठे राष्ट्रद्रोहियों पर प्रहार करती थीं, कांग्रेस की आंख में खटकने लगीं.
फंसाया भगवाधारी साध्वी को
29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए बम धमाकों में छह लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक घायल हो गए थे. जुमे की नमाज के वक्त मस्जिद में एक मोटरसाइकिल में रखे बम में ये विस्फोट हुआ था. मालेगांव धमाके के बाद कांग्रेसनीत यूपीए की सरकार ने एक साजिश रची. इस्लामिक आतंकवाद से देश को बचा पाने में नाकाम हो चुकी कांग्रेस सरकार ने भगवा आतंकवाद का नारा गढ़ा. मालेगांव धमाके के असली आरोपियों को छोड़ साध्वी प्रज्ञा को इस मामले के साथ ही संघ के पूर्व प्रचार सुनील की जोशी की हत्या में आरोपी बना दिया गया. कांग्रेस हमेशा की तरह मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति पर थी. यह दर्शाने को आतुर थी कि वह मुसलमानों के लिए किसी को भी फांसी पर चढ़ा सकती है.
जुल्म की कहानी, खुद साध्वी के शब्दों में
10 अक्टूबर 2008. जी हां यही तारीख थी, जहां से यह साध्वी कांग्रेस के भगवा आतंकवाद के भ्रमजाल का मुख्य चेहरा बन गई. पहले साध्वी प्रज्ञा को सूरत बुलाया गया और वहां से मुंबई पुलिस की आतंकवाद निरोधक शाखा (एटीएस) ले गई. 11 अक्टूबर से पुलिसिया कहर की अंतहीन कहानी शुरू हुई. एटीएस के इंस्पेक्टर अरुण खानविलकर ने प्रज्ञा को हिरासत में लिया. वही खानविलकर 2010 में सट्टे में पैसा लेते हुए गिरफ्तार हुआ. बहरहाल 13 दिन तक प्रज्ञा को अवैध हिरासत में रखा गया. इसके बाद पुलिस ने कोर्ट में पेश किया और 11 दिन का रिमांड लिया. कुल 24 दिन-रात लगातार टार्चर के थे. रात दिन पिटाई होती थी. कोई वक्त नही था पिटाई का. साध्वी के शब्दों में- मुझे मारते-मारते मेरे फेफड़े की झिल्ली फट गई. मैं बेहोश हो गयी. फिर मुझे 5 दिन के लिए अस्पताल ले जाया गया. जब होश आया तो देखा कि उनके शरीर से सारा भगवा वस्त्र गायब थे. उसकी जगह उनको एक अलग रंग फ्राक पहनाया गया था. मुझे वेंटिलेटर और ऑक्सीजन पर रखा गया. मैं जरा ठीक हुई थी, पुलिसिया जुल्म फिर शुरू हुआ. पुलिसकर्मी झूले की तरह पटकते थे. जिससे सर जमीन में टकराता था, इसी दौरान मेरी रीढ़ की हड्डी टूट गयी. मुझे बेल्टों से पीटा जाता था.
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साध्वी के शब्दों में- मेरे साथ मेरे एक शिष्य को भी गिरफ्तार करके लाया गया था. पहले उसे बुरी तरह मारा गया, इसके बाद खानविलकर ने मेरे सामने लाकर बुरी तरह पीटा. फिर उसे मेरे सामने लाकर उसे बेल्ट दिया और कहा मार अपने गुरु को. जब वह हिचकिचाया तो मैं बोली मारो मुझे. शिष्य ने मजबूरी में मारा तो जरुर मुझे, लेकिन शिष्य का हाथ सख्त कैसे होता. तब खानविलकर ने शिष्य से बेल्ट छीनी और शिष्य को बेरहमी से मारते हुए बोला ऐसे मारा जाता है. इसके बाद छह सात पुलिसकर्मियों ने एक घेरा बनाया और बारी-बारी से मुझे बेल्टों से पीटने लगे. ठाणे के पुलिस कमिश्नर ने तो उस वक्त मुझे तब तक बेल्टों से पीटा कि जब तक वो थक नहीं गया और मैं गिर नहीं पड़ी. उस दौरान सिर्फ एक महिला पुलिसकर्मी थी जिसने सिर्फ एक डंडा मुझे मारा.
सुनवाए जाते थे अश्लील वीडियो
साध्वी के मुताबिक- एक दिन कुछ पुरुष‎ कैदियों के साथ मुझे खड़ी करके अश्लील और गन्दा आडियो सुनाया जा रहा था. मेरे शरीर पर इतनी मार पड़ी थी कि मेरे लिए खड़ी हो पाना मुश्किल था. मैंने कहा कि मैं बैठ जाऊं तो पुलिस वाले बोले कि शादी में आई है क्या कि बैठ जायेगी. मेरी आंखें बंद होने लगी और मैं अचेत हो गई. उस वक्त जब एक कैदी ने पुलिसवालों से कहा कि साध्वी हैं, इनको अश्लील ऑडियो मत सुनवाइये तो उस पुलिस ने बेरहमी से उस कैदी की पिटाई की.
कैसे होती थी पिटाई
साध्वी ने बताया कि मेरे दोनों हाथों को सामने फैलवाकर एक चौड़े बेल्ट से मारते थे. मेरे दोनों हाथ सूज जाते थे. अंगुलियां भी काम नही करती थीं, तब गुनगुना पानी लाया जाता था. मैं अपने हाथ उसमें डालती कुछ आराम होता तो मुझे कागज हाथ में पकड़वाकर हाथों को दीवारों पर पटकवाया जाता था. जब उंगलिंयां हिलने-डुलने लगती थी, तो फिर से उसी तरीके से मुझे पीटा जाता था.
 
कांग्रेस का षडयंत्र
साध्वी ने कहा- भगवा के प्रति उनका द्वेश था. फूटी आंख भी भगवा को नहीं देखना चाहते थे. भगवा को बदनाम करने का कांग्रेस ने एक सुनियोजित षडयंत्र तैयार किया था. राहुल गांधी के उपाध्यक्ष बनने के दौरान मंच से चिदम्बरम , दिग्विजय सिंह व सुशील शिंदे द्वारा बार बार मेरा व भगवा आतंकवाद का नाम लेना ये साबित कर रहा था. एक बार स्वामी अग्निवेष मुझसे मिलने जेल में आया और बोला कि आप सह्योग करो तो चिदंबरम और दिग्विजय हमारे मित्र हैं. मैं आपको छुड़वा दूंगा. मैंने कहा- मैं सत्य के साथ रहूंगी. अग्निवेश बोले कि फिर भी मैं उनसे जाकर क्या बोलूं तो मैंने कहा कि- अगर आपकी उनसे घनिष्ठता है और सच में हमें छुड़ाना चाहते हो, तो चिदंबरम से जाकर बोलो की ईमानदारी से जांच करवा लें तो आप मुझे बाहर ही पाएंगे अंदर नहीं, क्योंकि मैं निर्दोष हूं.
कितने केस लगाए
हैदराबाद ब्लास्ट:
मई 2007 को हैदराबाद के चार मीनार इलाक़े के पास स्थित मस्जिद में बम विस्फोट हुआ. इसमें 9 लोग मारे गए थे और 58 लोग घायल हुए थे. शुरुआत में इस धमाके को लेकर चरमपंथी संगठन हरकत उल जमात-ए-इस्लामी यानी हूजी पर शक था. लेकिन कांग्रेस तो भगवा आतंकवाद का हौवा खड़ा करने में लगी थी. तीन साल के बाद यानी 2010 में पुलिस ने ‘अभिनव भारत’ नाम के संगठन से जुड़े स्वामी असीमानंद को गिरफ्तार किया. स्वामी असीमानंद के अलावा इस संगठन से जुड़े लोकेश शर्मा, देवेंद्र गुप्ता और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को धमाके का अभियुक्त बनाया गया. कोई सबूत न होने पर कोर्ट ने सभी को बरी किया.
अजमेर शरीफ़ ब्लास्ट:
11 अक्तूबर, 2007 को राजस्थान के अजमेर शहर में रोज़ा इफ़्तार के बाद अजमेर शरीफ़ दरगाह परिसर के क़रीब बम धमाका हुआ. इस धमाके में तीन लोग मारे गए थे और 17 लोग घायल हुए थे. धमाके के तीन साल बाद राजस्थान के तत्कालीन गृह मंत्री शांति धारीवाल ने षडयंत्र रचा. इस मामले में भी 8 मार्च 2017 को स्पेशल एनआईए कोर्ट ने मुख्य अभियुक्त रहे स्वामी असीमानंद और पांच अन्य को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया.
सुनील जोशी की हत्या
रा.स्व.संघ. के प्रचारक सुनील जोशी की हत्या मध्य प्रदेश के देवास में 29 दिसंबर 2007 को की गई थी. जोशी की हत्या का मामला भी 2011 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपा गया था. मकसद वही था, भगवा आतंकवाद का हौवा खड़ा करना. इसमें साध्वी प्रज्ञा ठाकुर सहित हर्षद सोलंकी, रामचरण पटेल, वासुदेव परमार, आनंदराज कटारिया, लोकेश शर्मा, राजेंद्र चौधरी और जितेंद्र शर्मा को आरोपी बनाया गया था. इन सभी पर हत्या, साक्ष्य छुपाने और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था. लेकिन कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा सहित सभी को फरवरी, 2017 में बरी कर दिया.
समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट:
भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में 18 फ़रवरी 2007 को हरियाणा के पानीपत के नज़दीक धमाका हुआ था. इस धमाके में 68 लोग मारे गए थे और 12 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. इस धमाके में मरने वालों में ज़्यादातर पाकिस्तानी नागरिक थे. 26 जुलाई 2010 में जब ये मामला एनआईए को सौंपा गया तब जांच एजेंसी ने दावा किया था कि उनके पास दक्षिणपंथी संगठन से जुड़े स्वामी असीमानंद के ख़िलाफ़ पुख़्ता सबूत हैं और वो ही इस मामले में मास्टरमाइंड थे. इन धमाकों के सिलसिले में आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार से भी पूछताछ की गई थी. इस मामले की सुनवाई धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है क्योंकि एनआईए को पाकिस्तान के उन 13 गवाहों का इंतज़ार है जो इन धमाकों के चश्मदीद रहे.
 मालेगांव विस्फोट
महाराष्ट्र के नासिक ज़िले के मालेगांव में 8 सितंबर 2008 को जुमे की नमाज़ के ठीक बाद कुछ धमाके हुए और इनमें 37 लोगों की मौत हुई. मुंबई पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते ने इस मामले की जांच की और सात लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया. इसमें दो पाकिस्तानी नागरिकों का नाम भी था. लेकिन राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की चार्जशीट में एटीएस और सीबीआई के दावे ग़लत साबित हुए. एनआईए ने अपनी जांच के अनुसार चार लोगों को गिरफ़्तार किया जिनके नाम थे लोकेश शर्मा, धन सिंह, मनोहर सिंह और राजेंद्र चौधरी.
इसी दौरान मालेगांव शहर के अंजुमन चौक तथा भीकू चौक पर 29 सितंबर 2008 को सिलसिलेवार बम धमाके हुए जिनमें 6 लोगों की मौत हुई और 101 लोग घायल हुए थे. रमज़ान के महीने में हुए इन धमाकों की शुरुआती जांच महाराष्ट्र पुलिस की एटीएस ने की. इस मामले में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित समेत सात अन्य लोग अभियुक्त थे. बाद में इस मामले की जांच की ज़िम्मेदारी एनआईए को सौंप दी गई थी. अप्रैल 2017 में बांबे हाईकोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को जमानत दे दी. अगस्त 2017 में कर्नल पुरोहित 9 साल बाद जेल से बाहर आए. दिसंबर 2017 में मालेगांव ब्लास्ट मामले में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित पर से मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण क़ानून) हटा लिया गया है.