मंदिर विध्वंस का दस्तावेज
   दिनांक 19-अप्रैल-2019
रोहित श्रीवास्तव                          
 
राम जन्मभूमि मंदिर के इतिहास पर दो अत्यंत उत्कृष्ट पुस्तकों की लेखिका इतिहासकार मीनाक्षी जैन ने हिंदू मंदिरों के विध्वंस के इतिहास पर एक पुस्तक ‘फ्लाइट आफ डीटीज एंड रीबर्थ आफ टेम्पल्स : एपिसोड्स फ्रॉम इंडियन हिस्ट्री’ लिखी है। इसमें मुस्लिम आक्रांताओं द्वारा तोड़े गए हिंदू मंदिरों की जानकारी दी गई है। लेखिका ने किताब के 15 अध्यायों में मुल्तान, कश्मीर, दिल्ली, मथुरा-वृंदावन, अयोध्या, काशी, मध्य भारत, गुजरात, महाराष्ट्र, पूर्वी भारत और दक्षिण भारत में हुए मंदिरों के विध्वंस के विवरण को शामिल किया है।
विध्वंस के साथ-साथ, यह किताब राजस्थान में व्रज क्षेत्र के मंदिरों के कृष्ण विग्रहों के सुरक्षित रखे जाने और दक्षिण में देवताओं की पुनर्स्थापना का भी विस्तृत विवरण देती है। कई मायनों में यह किताब अनोखी है। जैसे अध्याय 14 में विजयनगर साम्राज्य के समय मंदिरों के निर्माण इत्यादि का विस्तृत विवरण और तिरुपति और गुरुवायुर के संरक्षण का इतिहास। यह जानकारी आज के मंदिरों के संरक्षकों के लिए मार्गदर्शन का काम कर सकती है।
पुस्तक के अनुसार दक्षिण के मुकाबले देश के अन्य भागों में मंदिरों का विनाश अधिक हुआ, और दक्षिण भारत ने हिंदू मंदिरों को पुन: स्थापित किया, जो कहीं और नहीं हो सका। इसके कारणों का अध्ययन किया जाना चाहिए। तकरीबन 400 पृष्ठों में 27 पृष्ठ भारतीय और विदेशी संदर्भ ग्रंथों को समर्पित हैं, जिनका उपयोग इस ग्रंथ को लिखने के लिए किया गया है।
आश्चर्य की बात है कि संदर्भ ग्रंथों में अंग्रेजी शासनकाल के गजट का भी उल्लेख है। इसका तात्पर्य यह है कि अंग्रेजों ने हिंदू मंदिरों के विनाश का अध्ययन किया था। आश्चर्य की बात है कि स्वतंत्र भारत के अंग्रेज-परस्त इतिहासकारों ने इस परंपरा को खत्म कर दिया। आमतौर पर भारतीय इतिहास लेखन पर टिप्पणी करने वाले पश्चिमी विद्वानों ने इसकी कोई आलोचना नहीं की। इससे यह बात तो साबित हो जाती है कि हिंदू विरोध में वामपंथी इतिहासकार और पश्चिमी अकादमिक जगत एक-दूसरे के सहयोगी हैं।
पुस्तक में वामपंथी इतिहासकार इरफान हबीब, जिन्हें कांग्रेस पार्टी का वरदहस्त प्राप्त था, के लेखन का भी उल्लेख है। उन्होंने महमूद गजनवी द्वारा मंदिरों के विध्वंस का कारण उसके सोने और धन के लालच को बताया था, जो इस्लाम के बुतकशी के नियम के अनुरूप नहीं है।
इस्लाम के अनुसार शिर्क या मूर्ति-पूजन का गुनाह मृत्युदंड के योग्य है, सबसे बड़े पापों में से एक है। लेखिका ने इस्लाम के शुरुआती दिनों में हुए मूर्तिभंजन और उससे जुड़े हदीसों का विस्तार से वर्णन किया है। क्या हबीब इकलौते हैं, जिन्होंने इतिहास की गलत व्याख्या की? पुस्तक के अनुसार बिल्कुल नहीं।
औपनिवेशिक लेखकों ने भी इतिहास को मरोड़ा है। हिंदू मंदिरों और स्थानों की पवित्रता को नकारते हुए इन लोगों ने मंदिरों को राजनीतिक संस्था माना, जो सत्य से कितना परे है, यह बताने की आवश्यकता नहीं। औपनिवेशिक लेखक ईसाई थे और हर चर्च पवित्र नहीं होता, परंतु हर चर्च एक राजनीतिक और सामाजिक संस्था होती है, यही बात मस्जिदों पर भी लागू होती है।
हिंदू मंदिरों को सबने अपनी-अपनी तरह से व्याख्यायित किया है। हर कोई जानता है कि मंदिर क्या है, सिवाय किसी हिन्दू के धार्मिक पूजा स्थल के। ऐसा इसलिए है क्योंकि आज भी भारतीय अकादमिक और वैचारिक जगत औपनिवेशिक और इस्लामिक (दोनों अब्राह्मिक) के प्रभाव से मुक्त हुआ है। भारत में आधुनिकता और वामपंथ के नाम पर अब्राह्मिक सोच को ही थोपा जा रहा है। यह हिंदू धर्म के विरुद्ध एक प्रकार की सांस्कृतिक हिंसा है, जिसे लेखिका ने बेनकाब किया है।
विध्वंस के अलावा, दक्षिण में आक्रांताओं से बचाने के लिए धरती के नीचे दबी मूर्तियों की पुनर्स्थापना के कई महत्वपूर्ण उदाहरणों का भी विस्तृत वर्णन है। इनमें प्रमुख है तंजौर, नेल्लोर, चिदंबरम, गंगैकोंडचोलपुरम और नागपट्टिनम के मंदिर।
लेखिका ने अंतिम अध्याय में बताया है कि कैसे आज भी हिंदू मंदिरों का विनाश जारी है जिसे उन्होंने अप्रत्याशित हमला कहा है। यह हमला वहां हो रहा है जहां हिंदू मंदिर आज भी अपने संपूर्ण ऐश्वर्य में खड़े हैं। यानी दक्षिण में यह हमला किसी आक्रांता ने नहीं, बल्कि संरक्षण के नाम पर सरकारी तंत्र द्वारा किया जा रहा है। यह एक प्रकार का षड्यंत्र है जिसे यह किताब कई उदाहरणों से साबित करती है। 1968 में तत्कालीन तमिलनाडु सरकार ने तिरुमंगलककुदि शिव मंदिर की 20 एकड़ कृषि भूमि को घर बनाने के लिए दे दिया और न्यायालय के खाली करने के आदेश को कभी भी लागू नहीं किया। इससे भी गंभीर मामला है चोला नागनथास्वामी मंदिर का जिसे मंदिर बोर्ड ने पुनरुद्धार के नाम पर गिरा दिया। जिन मंदिरों को आक्रांता नहीं तोड़ पाए उन्हें आज सरकारी तंत्र ने तोड़ दिया। यह बात शोचनीय है कि किस प्रकार हिंदू विरोधी ताकतों ने पूरी व्यवस्था पर कब्जा कर लिया है और आम हिंदू इससे अनिभज्ञ है। पुस्तक में तथ्यों और विवेचना के साथ पाठकों को 59 दुर्लभ एवं प्रसिद्ध चित्र मिलेंगे।