रिपब्ल्कि टीवी का बड़ा खुलासा, 2G के आरोपियों से राहुल गांधी ने की बिजनेस डील...
   दिनांक 02-अप्रैल-2019
राहुल गांधी 2जी घोटाले में शामिल थे. इसके सुबूत के तौर पर इस रिपोर्ट को पढ़िए. राहुल गांधी 2जी घोटाले के अभियुक्तों के सहकारोबारी यानी पार्टनर हैं. इसके बाद आपको नेहरू गांधी परिवार के घोटालेबाज होने पर कोई शक बाकी नहीं रहेगा.
 
टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला को देश अभी भूला नहीं है। इस घोटाले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। अब इस घोटाले की जांच के तार राहुल गांधी तक पहुंच गए हैं। इस मामले पर रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क ने बड़ी खबर ब्रेक की। चैनल ने उस दस्तावेज को दिखाया है। जिसमें सौदे की शर्ते लिखी हुई हैं।
चैनल के अनुसार राहुल गांधी ने कुख्यात 02 जी स्पेक्ट्रम आवंटन के मुख्य अभियुक्तों में से एक के साथ एक व्यावसायिक संपत्ति के लेन—देन में भागीदारी की थी। इस व्यक्ति का नाम संजय चन्द्रा है। संजय चन्द्रा वही व्यक्ति है जिसकी कंपनी यूनिटेक पर टूजी घोटाला में सबसे अधिक लाभ लेने वाली कंपनी होने का आरोप लगा था। यूपीए के टेलीकॉम मंत्री ए राजा ने 2008 में 22 में से 20 टेलीकम सर्कल इन्हीं श्री चन्द्रा की कंपनी यूनिटेक को दिया था।
दस्तावेज के अनुसार लेन—देन सिर्फ एक बार में नहीं हुआ। बाद में भी यह जारी रहा।
रिपब्लिक टीवी के अनुसार उन्होंने सौदे से संबंधित जो एक दस्तावेज साझा किया है, उस पर वर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के हस्ताक्षर मौजूद हैं। यह सौदा 12 अक्टूबर 2010 को हुआ है। यह सौदा कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष और टूजी घोटाले के आरोपी संजय चन्द्रा के साथ हुई है।
 रिपब्ल्कि टीवी द्वारा किया गया खुलासा
अक्टूबर 2010 में, सुप्रीम कोर्ट ने यूपीए से 2 जी के संबंध में नोटिस का जवाब देने के लिए कहा था और 2 जी पर कैग रिपोर्ट लोकसभा में पेश किए जाने से कुछ हफ्ते पहले, राहुल गांधी ने यूनिटेक के साथ इस यूनिटेक की दो कार्यालय इकाइयों को खरीदने के लिए इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। राहुल गांधी ने इस आलीशान टॉवर में B-007 & B-008 के लिए 1.44 करोड़ रुपये और 5.36 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। राहुल ने यूनिटेक के साथ सौदे के कागज पर हस्ताक्षर किए और सिग्नेचर टावर—02 में आलीशान टावर बी—007 और बी—008 के लिए 1.44 करोड़ और 5.36 करोड़ रूपए दिए। अब सवाल है कि राहुल गांधी ने इतनी बड़ी रकम खर्च की है तो उनकी आय का स्रोत क्या है? क्या राहुल गांधी इस सौदे की जांच के लिए तैयार हैं?
रिपब्ल्कि टीवी द्वारा किया गया खुलासा 
समझौते के पैराग्राफ नंबर 4 में, उन्होंने कथित तौर पर इन दो कार्यालय इकाइयों के लिए 95.27 लाख रुपये और 3.54 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान किया। दिलचस्प है कि अजीब तरह से, राहुल गांधी और यूनिटेक के बीच जो सौदा एक संपत्ति से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है, उस सौदे में कांग्रेस अध्यक्ष को कंपनी द्वारा ब्याज की आय के रूप में 2.92 करोड़ का भुगतान किया जाता है, जो हर साल नाटकीय और असमान रूप से बढ़ता जाता है। यह देखकर कांग्रेस अध्यक्ष पर संदेह होना वाजिब है।
 
राहुल गांधी ने 2010-2011 में कथित रूप से ब्याज से आय के रूप में 22.8 लाख रुपये प्राप्त किए। यह 2011-12 और 2012-13 में 50.62 लाख रुपये हो गया। इसके बाद 2013-14 में ब्याज ने कथित तौर पर 71 लाख रुपये तक की छलांग लगाई और 2014-15 में ब्याज की यह रकम 95.9 लाख रूपए तक पहुंच गई। अप्रैल 2012 में, राहुल गांधी ने कथित रूप से यूनिटेक से प्रति माह 4.2 लाख रुपए पाए और यह राशि दोगुने से अधिक राशि पार कर सितंबर 2014 में 8.85 लाख प्रति माह तक पहुंच गई। मतलब मूल धन से ब्याज की रकम बढ़कर राहुल गांधी तक पहुंची। यह किस गणित से हुआ?
कुछ प्रश्न जिसका जवाब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को देना चाहिए:-
1- क्या राहुल गांधी ने यूनिटेक में पैसा तब लगाया जब वो कंपनी 2जी घोटाले में फंस चुकी थी ?
2- 2 जी घोटाले के आरोपी से प्रॉपर्टी खरीदने के लिए राहुल के पास इतना रुपया कहां से आया ?
3- अगर राहुल यूनिटेक की प्रॉप्रटी में पैसा लगातार नहीं जमा कर रहे थे तो फिर किराए से उनकी रकम लगातार कैसे बढ़ी ?
4- राहुल ने कथित तौर पर यूनिटेक में 2010-2011 में कुल कितना पैसा जमा किया ?
5- 2010 में जब यूनिटेक का नाम घोटाले में आ चुका था तो फिर राहुल ने एक घोटालेबाज कंपनी में कथित तौर पर पैसा क्यों लगाया ?
6- जो कंपनी घोटाले में फंसी हो उसमें कोई आदमी किस तर्क के हिसाब से पैसा लगाएगा ?
7-क्या राहुल गांधी को ये नहीं पता था कि जिस कंपनी में वो पैसा लगा रहे हैं सरकार 2जी घोटाले में उसकी जांच कर रही है ?
 
मजे की बात ये है कि राहुल गांधी ये सब तब कर रहे थे जब 2जी घोटाले के मुद्दे पर वो मनमोहन सिंह का हरसंभव बचाव करने में भी लगे थे। ऐसे में पैसा का लेनदेन राहुल गांधी और यूनिटेक के संजय चंद्रा के रिश्तों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर वो क्या वजह थी कि राहुल ने एक इतने बड़े घोटाले के आरोपी के साथ इस तरह का सौदा किया। 
सवाल ये भी उठता है कि एक 'घोटालेबाज कंपनी' के साथ राहुल गांधी के क्या संबंध हैं। जब घोटाला पूरी दुनिया की नजर में था तब भी राहुल उस कंपनी से अपनी प्रॉपर्टी पर रेंटल इनकम क्यों कमा रहे थे। क्या राहुल को ये नहीं पता था कि उसी कंपनी के पीछे सीबीआई जांच में लगी थी।
सवाल ये भी उठता है कि आखिर जो कंपनी 2जी घोटाले के केन्द्र में थी सिर्फ उसे राहुल ने प्रॉपर्टी क्यों खरीदी और फिर रेंट के लिए उसी को क्यों दे दिया।
2जी स्कैम का खुलासा भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत थी। इस खुलासे के बाद ए राजा को मंत्री पद छोड़ना पड़ा था । लाइसेंस रद्द किए गए थे और इंडिया अगेंस्ट करप्शन का जन्म हुआ।
एक राजनेता जिसकी पार्टी की केन्द्र में सरकार हो उसका इतने बडे कथित घोटालेबाज के साथ इस तरह लेनदेन का संबंध देश को कदापि मंजूर नहीं है। ये उस नेता की निष्ठा पर सवाल खड़ा करता है।
अब जब सबूत सामने हैं, कागजात दिखाए जा चुके हैं तो राहुल गांधी को बताना चाहिए कि उन्होंने इस तरह एक कथित घोखेबाज के साथ लेन देन क्यों किया, उनकी मजबूरी क्या थी?