राहुल गांधी हैं या राउल विंसी, भारतीय नागरिक हैं या ब्रिटिश
   दिनांक 21-अप्रैल-2019
अमेठी के रिटर्निंग आफिसर ने राहुल गांधी का नामांकन मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया है. उनके ब्रिटिश पासपोर्टधारी होने के आधार पर उनके चुनाव लड़ने की योग्यता पर सवालिया निशान लगाया गया है. साथ ही राहुल गांधी का असली नाम क्या है, ये एक बार फिर चर्चा में है
जहां आग होती है, धुआं वही होता है. फिर एक बार फिर ये सवाल देश के सामने है कि कांग्रेस अध्यक्ष का असली नाम क्या है. राहुल गांधी या राउल विंसी. वह भारत के नागरिक हैं, तो फिर उनके पास ब्रिटिश पासपोर्ट कैसे है. सोनिया गांधी के इटेलियन मूल और इटेलियन पासपोर्ट का सवाल अभी अनसुलझा है. अब उनके बेटे की दोहरी नागरिकता और दो नामों को लेकर सवाल हैं. सवाल तो ये लंबे समय से उठ रहे हैं, संसद की समितियों के सामने जा चुके हैं. लेकिन इस बार लोकसभा चुनाव के दौरान राउल या राहुल का सवाल ज्यादा उनके सामने ज्यादा मुश्किलें खड़ा करने वाला है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने भी केंद्रीय गृह मंत्रालय को राहुल गांधी का नागरिकता के विवाद पर छह महीने के अंदर फैसला लेने का आदेश दिया है.
पहले अमेठी का हाल
अमेठी के रिटर्निंग ऑफिसर राम मनोहर मिश्रा ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नामांकन की जांच को 22 अप्रैल तक स्थगित करने के आदेश दे दिए हैं. निर्दलीय उम्मीदवार ध्रुव लाल ने राहुल गांधी के नामांकन में गलत जानकारियां देने और तथ्य छिपाने का आरोप लगाते हे रिटर्निंग आफिसर के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत के तीन बिंदु हैं-
पहला
ध्रुव लाल की ओर से पेश हुए अधिवक्ता रवि प्रकाश ने कहा- राहुल गांधी ब्रिटेन की एक कंपनी से जुड़े रहे हैं. कंपनी के बाबत दी गई जानकारी में राहुल गांधी ने खुद को ब्रिटेन में ब्रिटिश नागरिक बताया था. जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत विदेशी नागरिक भारत में चुनाव नहीं लड़ सकता. सवाल ये उठाया गया है कि राहुल गांधी ने किस आधार पर खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया. यदि ऐसा है, तो उनको भारतीय नागरिक होने का अधिकार कैसे प्राप्त है.
दूसरा
मामला इसलिए संदिग्ध हो जाता है क्योंकि 2003 से 2009 के बीच राहुल गांधी ब्रिटिश कंपनी से जुड़े रहे. लेकिन चुनावी हलफनामे में उन्होंने इस समयावधि की संपत्तियों एवं निवेश की जानकारी नहीं दी है. शिकायत में इस बिंदू को उठाया गया है कि 2003 से 2009 के बीच राहुल गांधी जिस कंपनी में ब्रिटिश नागरिक की हैसियत से शामिल थे, उसकी संपत्तियों की जानकारी क्यों नहीं दी गई है.
तीसरा
आपत्ति में कहा गया है कि राहुल गांधी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है. असल में इस तरह के तमाम दस्तावेज सामने आते रहे हैं, जिसमें राहुल गांधी को एमफिल में फेल दर्शाया गया है. इन दस्तावेजों से राहुल गांधी के नाम को लेकर भी विवाद पैदा होता है. शैक्षणिक दस्तावेजों में राउल विंसी नाम है. आपत्ति में पूछा गया है कि राहुल गांधी और राउल विंसी क्या एक ही शख्स हैं. यदि एक ही शख्स है, तो असली नाम क्या है.

 
हाईकोर्ट ने केंद्र से कहा-छह महीने में फैसला लो
उधर, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता के प्रकरण को छह माह में निस्तारित करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश दिया है. कोर्ट ने यह निर्देश वरिष्ठ वकील अशोक पांडेय की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए दिया है. याची अशोक पांडेय का आरोप है कि, राहुल गांधी ने लंदन में स्थित अपनी कंपनी का रिटर्न दाखिल करते समय अपनी नागरिकता ब्रिटिश दिखाई है. राहुल गांधी ने खुद को ब्रिटिश नागरिक बताकर भारतीय संविधान के अनुच्छेद-9 और भारतीय नागरिकता कानून का उल्लंघन किया है. भारतीय संविधान में प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे देश की नागरिकता ले लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त मानी जाती है. न्यायाधीश देवेंद्र कुमार अरोड़ा और न्यायाधीश मनीष माथुर की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को छह माह में मामले में निर्णय लेने के निर्देश देते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया.
 
आखिर कैसे सामने आया पूरा विवाद
12 नवंबर 2015 में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की कि राहुल गांधी की नागरिकता समाप्त कर दी जाए. उन्होंने पत्र में दावा किया कि राहुल गांधी ब्रिटेन में एक कंपनी चलाने के लिए खुद को ब्रिटिश नागरिक दर्शाया है. पत्र में स्वामी ने कहा कि मैं 2003 में कंपनी के पंजीकरण और 2009 में विघटन से जुड़े कुछ प्रमाणिक दस्तावेज संलग्न कर रहा हूं. लंदन स्थित इस कंपनी का नाम बैकऑप्स लिमिटेड था. इस कंपनी के निदेशक एवं सचिव राहुल गांधी थे. कंपनी संख्या 4874597 के संयोजन के दस्तावेज रजिस्ट्रार आफ कंपनीज इंग्लैंड एंड वेल्स के समक्ष 21 अगस्त 2003 को जमा किए गए, जबकि कंपनी का विघटन 17 फरवरी 2009 को हुआ. डा. स्वामी ने अपने पत्र में कहा था कि राहुल गांधी के खिलाफ बहुत ठोस साक्ष्य हैं और उनकी नागरिकता तुरंत रद की जाए. आरोप है कि एकतरफ तो राहुल गांधी को कंपनी के दस्तावेजों में भारतीय बताया गया, वहीं 2005, 2006 और 2009 की रिटर्न में उनके ब्रिटिश आवासीय पते के साथ उन्हें ब्रिटिश नागरिक बताया गया.

 
जनवरी 2016 में दिल्ली से भाजपा सांसद महेश गिरि ने लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन को पत्र लिखकर कहा कि राहुल गांधी के विषय में काफी विरोधाभासी तथ्य सामने आ रहे हैं. उनकी नागरिकता अब एक बड़ा रहस्य बन चुकी है. अगर उनके पास दो देशों की नागरिकता है, तो ये एक गंभीर चिता का विषय है. उन्होंने स्पीकर से मांग की थी कि इस पूरे मामले में राहुल गांधी की नागरिकता की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए.
फिर मैदान में उतरे स्वामी
डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी एक बार फिर राहुल गांधी की नागरिकता के मुद्दे पर मुखर हो गए हैं. सुब्रमण्यम स्वामी ने ताजा ट्वीट के सिलसिले में कहा है कि राहुल गांधी अब बच नहीं सकते. दोहरी नागरिकता का मुद्दा उनके आयकर रिटर्न से भी साबित होता है, जिसमें उन्होंने खुद को ब्रिटिश नागरिक करार दिया है.