''शिक्षा के माध्यम से जगाएं राष्ट्रभक्ति का भाव''
   दिनांक 22-अप्रैल-2019
 
पुस्तक विमोचित करते (मध्य में) श्री भैयाजी जोशी, साथ में हैं अन्य विशिष्टजन
''संघ को केवल अपने बूते काम नहीं करना है, बल्कि सारे समाज को साथ लेकर चलना है। समाज की समस्याओं का समाधान इसी समाज में मिल सकता है, यह संघ का विचार व भूमिका है।'' उक्त बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री भैयाजी जोशी ने कही। वे गत दिनों पुणे में रामकृष्ण पटवर्धन लिखित मराठी पुस्तक 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ-एक विशाल संगठन' का विमोचन कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि समाज में संस्कार स्थापना की सभी पद्धतियों को परे रखकर संघ का काम शुरू हुआ। संघ के काम में कोई औपचारिकता नहीं थी। डॉ. हेडगेवार जी ने हमें कार्य का खाका नहीं दिया, बल्कि केवल लक्ष्य दिया। कैसे करना है, यह नहीं बताया। केवल क्यों करना है, यह बताया। संघ की विचारधारा को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि हमसे अक्सर पूछा जाता है कि नाम में राष्ट्रीय होने के बावजूद आप केवल हिंदुओं के लिए क्यों काम करते हैं? इसका कारण यह है कि इस देश में हर चीज के लिए हिंदू जिम्मेदार है। अगर पतन होता है तो वह भी हिंदुओं के कारण और परम वैभव प्राप्त होगा तो वह भी हिंदुओं के कारण। धर्म का रक्षण करने से ही देश परम वैभव को प्राप्त होगा। धर्म और संस्कृति का रक्षण करके ही हमें आगे बढ़ना है। समाज में बदलाव लाना हो तो हर व्यक्ति को 'मैं ही यह बदलाव लाऊंगा' यह कहते हुए आगे बढ़ना होगा। हमारे मार्ग हमें ही प्रशस्त करने होंगे। इसलिए समस्याओं के लिए हम जिम्मेदार हैं और उनका निराकरण भी हम ही करेंगे। समाज के विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व देना ही संघ का काम है। संघ के स्वयंसेवक कोई भी कार्य प्रतिस्पर्धा की भावना से नहीं करते। कार्यक्रम में उपस्थित श्री जयंत रानडे ने कहा कि आज संघ के लिए सम्मान और उत्सुकता दिखाई देती है। इसलिए रामकृष्ण पटवर्धन ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विस्तार कैसे हुआ, उसका कार्य कैसे चलता है, इसका विवेचन प्रबंधन शास्त्र की दृष्टि से किया है। हालांकि केवल प्रबंधन शास्त्र का चश्मा लगाकर यह पुस्तक नहीं लिखी गई, बल्कि लोगों को इसके द्वारा संघ के बारे में समझाने की कोशिश की गई है। प्रबंधन शास्त्र के अध्येता सारे जग में हैं, इसलिए यह पुस्तक महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
इस अवसर पर विख्यात उद्यमी एवं काइनेटिक उद्योग के प्रमुख अरुण फिरोदिया ने कहा कि हमारे समाज में व्याप्त अलगाव को अंग्रेजों ने बढ़ावा दिया। इसके लिए हम भी काफी हद तक दोषी हैं। किसी समय विश्व के लोग हमारा अनुकरण करते थे, लेकिन पश्चिमी जगत का अंधानुकरण करते हुए हमने अपना स्वत्व खो दिया है। कार्यक्रम में उपस्थित (सेनि.) एयर मार्शल भूषण गोखले ने कहा कि इस तरह की पुस्तकों से युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी। इस पुस्तक से भारतीय संस्कृति और मूल्यों की जानकारी मिलेगी।