श्रीलंका बम धमाके- अब दक्षिण सीमा पर आ बैठा इस्लामिक आतंकवाद का दानव
   दिनांक 22-अप्रैल-2019
यह भारतीय सीमा का वो सिरा है, जिसको लेकर हाल तक भारत ऐसे किसी खतरे को महसूस नहीं करता था. धमाके श्रीलंका में हुए हैं, लेकिन चुनौती भारत के लिए भी कम बड़ी नहीं है. याद रखना होगा कि राजीव गांधी की हत्या की साजिश और सामान इसी छोर से आया था.
श्रीलंका में सिलसिलेवार आठ बम धमाकों में तीन सौ से ज्यादा लोगों की मौत के साथ एक बार फिर इस्लामिक आतंकवाद अपने वीभत्स रूप में दुनिया को चुनौती दे रहा है. सुनियोजित तरीके से एक के बाद एक बम धमाके बताते हैं कि भारत के दक्षिण छोर पर भी इस्लामिक आतंकवाद ने संगठित रूप ले लिया है. यह भारतीय सीमा का वो सिरा है, जिसको लेकर हाल तक भारत ऐसे किसी खतरे को महसूस नहीं करता था. धमाके श्रीलंका में हुए हैं, लेकिन चुनौती भारत के लिए भी कम बड़ी नहीं है. याद रखना होगा कि राजीव गांधी की हत्या की साजिश और सामान इसी छोर से आया था. आज देश में आतंकवाद को लेकर जागरूकता है. घाटी में आतंकवाद के साथ चल रही जंग से अलग हटकर देखें तो पिछले पांच साल में हमारे नागरिक आतंकवादी हमलों से महफूज रहे हैं. लेकिन दक्षिण का तट अब नई चुनौती बनकर उभरा है.
क्या हुआ श्रीलंका में
श्रीलंका में जैश ए मोहम्मद और अल कायदा के पैटर्न पर रविवार को ईस्टर के पर्व के दौरान सिलसिलेवार तरीके से आठ धमाके हुए. चर्च और होटलों को निशाना बनाया गया, जिसमें तीन सौ से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. 450 से ज्यादा लोग जख्मी हैं. श्रीलंका में दस साल पहले लिट्टे के सफाए के बाद यह आतंकवादी हमले की पहली घटना है. फिलहाल श्रीलंका में आपातकाल जैसे हालत हैं. पहला बम धमाका श्रीलंका की राजधानी कोलंबो स्थित ऐतिहासिक रोमन कैथोलिक चर्च पर स्थानीय समय के हिसाब से पौने नौ बजे हुआ. चर्च में ईस्टर सर्विस शुरू ही होने वाली थी कि बम फट गया. धमाका इतना जबरदस्त था कि चर्च की छत ही उड़ गई. उत्तरी कोलंबो नेगोंबो में सेंट सेबेस्टियन कैथोलिक चर्च में दो बम धमाके हुए. पूर्वी किनारे पर स्थित बट्टीकलोआ में प्रोटेंस्टेंट जियोन चर्च में बम फटा. इसके तुरंत बाद राजधानी के तीन सबसे आलीशान होटल सिनेमोन ग्रांड, शांग्रीला और किंग्सबरी बम धमाकों से दहल उठे. चंद घंटों के बाद ही कोलंबी के दहीवाला जिले के चिड़ियाघर में बम धमाका हुआ. आठवां बम धमाका कोलंबो के एक घर में हुआ, जिस पर पुलिस ने छापा मारा था.
पूरी दुनिया की सहानुभूति
दुनिया के सभी देशों ने श्रीलंका में हुए हमले पर दुख जताया है. आतंकवाद के खिलाफ सभी देश एक सुर में बोल रहे हैं. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं इन हमलों की कड़ी निंदा करता हूं. हमारे क्षेत्र में इस तरह की बर्बरता के लिए कोई जगह नहीं है. भारत इस मुश्किल वक्त में श्रीलंका के लोगों के साथ एकजुटता के साथ खड़ा है. पीएम नरेंद्र मोदी ने इन सिलसिलेवार बम धमाकों पर श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे से टेलीफोन पर बात की और हमले में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति भारत की ओर से शोक संवेदना जताई. प्रधानमंत्री ने कहा कि ये हमले दुनिया भर में आतंकवाद द्वारा मानवता के सामने रखी गई गंभीर चुनौती को दर्शाते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन, ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरेसा मे समेत सभी पश्चिमी देशों ने श्रीलंका का आतंकवाद के खिलाफ साथ देने की बात कही है.
क्या है आबादी का संतुलन
26 साल तक गृह युद्ध की आग में जले श्रीलंका ने एक लाख से ज्यादा जान गंवाई. दस साल पहले लिट्टे के सफाए के साथ ही श्रीलंका में शांति का दौर शुरू हुआ था. इस देश की आबादी कुल 2.3 करोड़ है. इनमें से दो तिहाई सिंहली बौद्ध हैं. दूसरी तादाद तमिलों की है, जिनकी आबादी 15 प्रतिशत है. मुस्लिमों की आबादी दस फीसद और ईसाई आबादी छह प्रतिशत है. पिछले एक दशक में श्रीलंका के मुस्लिमों के बीच वहाबी विचारधारा की पकड़ मजबूत हुई है. धार्मिक प्रतीक और चिह्नों का प्रदर्शन बढ़ा है. मुस्लिमों के बीच कट्टरपंथ बढ़ा, तो श्रीलंका में बौध भिक्षु एकजुट होने लगे. 2018 में बौद्ध और मुस्लिमों के बीच टकराव हुआ था.
 
क्यों है भारत को खतरा
भारत की समुद्री सीमा श्रीलंका के बहुत करीब है. श्रीलंका के अंदरूनी हालात का सीधा असर भारत के दक्षिण हिस्से पर पड़ता है. श्रीलंका में गृह युद्ध के दौरान भी भारत के तमिलों पर इसका सीधा असर पड़ा था. चूंकि श्रीलंका एक मित्र देश है और पिछले दस साल से वहां शांति है, इसलिए समुद्री सीमा पर उस किस्म की पहरेदारी की जरूरत इस घटना से पहले नहीं थी. श्रीलंका में बम धमाकों से दस दिन पहले ही भारतीय खुफिया एजेंसियों ने नई दिल्ली को ऐसी किसी साजिश की जानकारी दे दी थी. भारत ने श्रीलंका को इन धमाकों के बारे में दस दिन पहले ही आगाह कर दिया था. इन धमाकों के पीछे श्रीलंका में सक्रिय कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन तौहीद जमात (टीजे) का हाथ माना जा रहा है. चिंताजनक बात ये कि ये संगठन भारत के दक्षिणी राज्यों में मुस्लिमों के बीच खासी सक्रिय है. कई दक्षिणी टेलीविजन चैनलों पर तौहीद जमात के धार्मिक प्रसारण चलते हैं. श्रीलंका में अभी तक इन धमाकों के सिलसिले में 24 गिरफ्तारियां हुई हैं. ये गिरफ्तारियां भी इस हमले में इस्लामिक संगठन के शामिल होने का इशारा कर रही हैं. विशेषज्ञों की राय है कि इतने बड़े पैमाने पर बम धमाके बाहरी मदद और ट्रेनिंग के बिना नहीं किए जा सकते. इसके तार अल कायदा या इस्लामिक स्टेट से जुड़ते नजर आ रहे हैं.
क्राइस्ट चर्च और चीन
मार्च में न्यूजीलैंड के क्राइस्ट चर्च में पिछले दिनों एक कट्टरपंथी ईसाई ने स्वचालित हथियारों से दो मस्जिदों पर हमला करके 49 लोगों की हत्या कर दी थी. अब जरा श्रीलंका के परिप्रेक्ष्य में इसे देखते हैं. श्रीलंका में ईसाइयों की आबादी छह प्रतिशत है. यहां मुस्लिमों का टकराव सिंहलियों के साथ रहा है. ईसाइयों से उनके टकराव का कोई इतिहास नहीं है. ऐसे में गिरजाघरों पर ईस्टर के दिन हमले के पीछे क्राइस्ट चर्च में हुई घटना के बदले के तौर पर देखा जा रहा है. जिन होटलों पर हमला किया गया है, वे भी विदेशी सैलानियों के मनपसंद ठिकाने हैं. अमेरिका और यूरोप के कई नागरिकों की इन हमलों में मौत हुई है. ईसाई कट्टरपंथी संगठनों ने इसे ईसाइयत के खिलाफ जिहाद कहना शुरू कर दिया है. एक आशंका यह भी जाहिर की जा रही है कि जिन देशों में ईसाई आबादी कम है और मुसलिम आबादी ज्यादा है, वहां इस तरह के हमले अंजाम दिए जा सकते हैं. श्रीलंका में इन हमलों के बीच एक कूटनीतिक पेच भी है. श्रीलंका के सबसे बड़े बंदरगाह पर चीन का कब्जा है. चीन की निगाह इस समय छोटे और अस्थिर देशों को निगलने पर है. ऐसे में भारत के लिए यह भी चुनौती है कि वह चीन को ऐसे किसी मौके का लाभ न उठाने दे.