योगी के 'धोबीपाट' से विपक्ष चारों खाने चित
   दिनांक 25-अप्रैल-2019
यह तो सभी को मालूम ही है कि अखाड़े में कुश्ती शारीरिक बल के साथ- साथ दाव -पेच से भी लड़ी जाती है. कुश्ती में कई प्रकार के दाव हैं मगर उसमें धोबीपाट दाव सबसे उत्तम माना जाता है. इस दाव में सामने वाले पहलवान को ठीक वैसे ही उठाकर पटकना होता है जिस तरह से धोबी कपड़े को अपनी पीठ की तरफ से उठाकर सामने बने पाट पर लाकर पटकता है. इसीलिए इस दाव का नाम धोबियापाट दाव रखा गया है. पहलवानी की दुनिया में सबसे कठिन दाव माना जाता है. योगी आदित्यनाथ ने इस चुनावी अखाड़े में विपक्ष को कुछ इसी तरह की पटकनी दी है -
उत्तर प्रदेश की गोरखपुर लोकसभा सीट पर उप चुनाव जीत कर विपक्ष ने काफी समय तक भाजपा को घेरने की कोशिश की थी. विपक्ष का आरोप था कि योगी आदित्यनाथ , जिस लोकसभा सीट से लगातार पांच बार सांसद रहे उस लोकसभा सीट पर भाजपा की हार हुई. गोरखपुर लोकसभा सीट पर निषाद बिरादरी के मतदाता खासी संख्या में हैं. इसी को ध्यान में रखकर सपा ने ‘निषाद पार्टी’ चलाने वाले संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद को चुनाव मैदान में उतारा था. उप चुनाव में प्रवीण निषाद सांसद निर्वाचित हुए थे. मगर इस बार के लोकसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष को चारों खाने चित कर दिया है. सपा को ऐन समय पर राम भुआल निषाद को टिकट देना पड़ा. उधर कैसरगंज में बसपा की ऐसी दुर्दशा हुई कि चुनाव नजदीक आने पर उनके प्रत्याशी ने चुनाव लड़ने से ही मना कर दिया.
निषाद बिरादरी हुई योगी के समर्थक
गोरखपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीत जाने के बाद प्रवीण निषाद, सांसद तो बन गए मगर उन्होंने समाजवादी पार्टी से दूरी बना लिया. सांसद प्रवीण निषाद ने निषाद पार्टी की पुरानी मांग को आगे बढ़ाया. निषाद पार्टी बहुत दिनों से इस बात की मांग कर रही थी कि निषाद बिरादरी को 'विमुक्त जाति' का दर्जा जाय. ‘विमुक्त जाति’ के अंतर्गत कुछ जातियों को अनुसूचित जाति की सुविधा मिलती है. प्रवीण निषाद गोरखपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने जाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संपर्क में आये और उन्होंने अपनी पार्टी की सबसे प्रमुख मांग से उन्हें अवगत कराया. सांसद प्रवीण निषाद का कहना है कि "मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निषाद बिरादरी की मांग को स्वीकार कर लिया और गोरखपुर में निषाद बिरादरी को ‘विमुक्त जाति’ का प्रमाण पत्र मिलने लगा." निषाद पार्टी इसी मांग के लिए काफी अरसे से आन्दोलन कर रही थी. इस प्रमाण पत्र के बाद निषाद बिरादरी को अनुसूचित जाति के सभी सरकारी लाभ मिलने लगे हैं. इस मांग को मान लिए जाने के बाद निषाद बिरादरी , योगी आदित्यनाथ के समर्थन में उतर गई है.
उधर , सांसद प्रवीण निषाद की भाजपा में बढ़ती नजदीकियां देख समाजवादी पार्टी सकते में आ गयी. सांसद प्रवीण निषाद के पिता एवं निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने सपा से किनारा कर लिया. इस बीच अखिलेश यादव ने संजय निषाद को मिलने के लिए बुलाया मगर बात नहीं बनी. उसी दिन रात में चिकित्सा मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने संजय निषाद को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलवाया. संजय निषाद से योगी आदित्यनाथ की मुलाक़ात होते ही समाजवादी पार्टी ने राम भुआल निषाद को गोरखपुर लोकसभा सीट से प्रत्याशी घोषित कर दिया.
संजय निषाद ने भाजपा से समझौते में गोरखपुर, महराजगंज और जौनपुर लोकसभा सीट मांगा था. निषाद पार्टी गोरखपुर लोकसभा सीट से प्रवीण निषाद , महराजगंज लोकसभा सीट से संजय निषाद और जौनपुर लोकसभा सीट से बाहुबली नेता धनंजय सिंह को चुनाव मैदान में उतारना चाहती थी मगर योगी आदित्यनाथ के सामने निषाद पार्टी ने अपनी सभी शर्ते वापस ले लीं. निषाद बिरादरी में लोकप्रिय हो चुके योगी आदित्यनाथ के सामने निषाद पार्टी ने एक ही सीट पर संतोष कर लिया. वह भी बकायदा प्रवीण निषाद को भाजपा की सदस्यता दिलाई गयी. प्रवीण निषाद गोरखपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे मगर भाजपा ने उन्हें संत कबीर नगर से प्रत्याशी बना कर चुनाव मैदान में उतारा. प्रवीण निषाद के पिता संजय निषाद को भाजपा ने कहीं से टिकट नहीं दिया.
योगी आदित्यनाथ की कार्यप्रणाली के सामने सपा – बसपा गठबंधन की हवा निकल चुकी है. जिन प्रवीण निषाद को चुनाव जिता कर विपक्ष हवा में उड़ रहा था. अब उसी विपक्ष के प्रत्याशी राम भुआल निषाद की राजनीतिक जमीन खिसक चुकी है. आलम यह है कि भाजपा प्रत्याशी रवि किशन ने बाबा गोरखनाथ मंदिर में दर्शन कर अपना नामांकन दाखिल किया तो इसकी नकल में बुधवार को राम भुआल निषाद ने निषाद मंदिर में दर्शन कर अपना नामांकन दाखिल किया. सांसद प्रवीण निषाद , भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद गोरखपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे मगर भाजपा ने प्रवीण निषाद को संत कबीर नगर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है. संजय निषाद, निषाद पार्टी के सिम्बल पर महराजगंज लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे और साथ ही उनकी यह भी इच्छा थी कि भाजपा उनका समर्थन करे. उन्होंने भी अपनी दावेदारी वापस ले ली है.
कैसरगंज में बसपा प्रत्याशी ने चुनाव लड़ने से किया इन्कार
कैसरगंज लोकसभा सीट का मामला भी बेहद दिलचस्प रहा. भाजपा प्रत्याशी ब्रज भूषण शरण सिंह के खिलाफ बसपा ने संतोष तिवारी को टिकट दिया. बसपा से टिकट मिलने के बाद कुछ दिन तक तो संतोष तिवारी ने कोई चुनाव प्रचार नहीं किया. समय जब नजदीक आया तो उन्होंने मायावती को दो टूक जवाब दे दिया कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे. इसके बाद बसपा ने संतोष तिवारी को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त बता कर पार्टी से निकाल दिय़ा. काफी दिनों तक असमंजस में रहने के बाद बसपा ने चन्द्र देव राम यादव को कैसरगंज से प्रत्याशी बनाया. ऐन समय पर बसपा प्रत्याशी के चुनाव मैदान छोड़ देने से बसपा की हवा निकल गई. राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि कैसरगंज लोकसभा सीट पर बसपा ने हथियार डाल दिए हैं.
गठबंधन जिसको लेकर जनता में लगातार भ्रम फैलाया जा रहा था. उस गठबंधन की हालत यह है कि उनके गोरखपुर सांसद ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली और भाजपा के टिकट पर संतकबीर नगर से चुनाव लड़ रहे हैं. कैसरगंज में बसपा के प्रत्याशी संतोष तिवारी चुनाव मैदान छोड़ कर जा चुके हैं. उत्तर प्रदेश की अधिकतर सीटों पर गठबंधन का यही हाल है.