कांग्रेसी नेताओं के दिल में बसते हैं जिन्ना और पाकिस्तान!
   दिनांक 27-अप्रैल-2019
तो क्या ये मान लिया जाए कि कांग्रेसी होने की एक अहम शर्त पाकिस्तान प्रेमी होना है. एक और खास बात. ये प्रेम चुनाव के दौरान ज्यादा उमड़ता है. लेकिन कांग्रेसी ये क्यों नहीं समझते कि पाकिस्तान का नाम लेकर जिस मुस्लिम मतदाता को वह रिझाने की कोशिश कर रहे हैं, उनकी सोच देशद्रोही नहीं है.
कांग्रेस को पाकिस्तान से इतना प्रेम क्यों है. कांग्रेस नेता तो जब-तब आपको पाकिस्तान, पाकिस्तानी दहशतगर्दों के साथ खड़े दिखाई देते ही हैं. लेकिन ऐसा क्या है कि दूसरी पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने वाला नेता भी तुरंत पाकिस्तान परस्त हो जाता है. नए-नए कांग्रेसी हुए शत्रुघन सिन्हा भी सार्वजनिक मंचों से पाकिस्तान के जन्मदाता मोहम्मद अली जिन्ना को विकास का पर्याय बताने लगे हैं. भाजपा से ही कांग्रेस पहुंचे नवजोत सिंह सिद्धू तो एक आवाज पर दौड़े-दौड़े पाकिस्तान पहुंच जाते हैं. तो क्या ये मान लिया जाए कि कांग्रेसी होने की एक अहम शर्त पाकिस्तान प्रेमी होना है. एक और खास बात. ये प्रेम चुनाव के दौरान ज्यादा उमड़ता है. लेकिन कांग्रेसी ये क्यों नहीं समझते कि पाकिस्तान का नाम लेकर जिस मुस्लिम मतदाता को वह रिझाने की कोशिश कर रहे हैं, उनकी सोच देशद्रोही नहीं है.
जिन्ना को चुनाव में ले आए शत्रुघ्न सिन्हा
कांग्रेस के इस पतनकाल में आपको अभी बहुत कुछ देखना बाकी है. अमेठी में खतरा जानकर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ही मुस्लिम लीग और मुस्लिम मतों के दम पर चुनाव लड़ने के लिए केरल के वायनाड जा पहुंचे हैं. जब पार्टी का अध्यक्ष की चांद-सितारे वाले हरे परचम की छांव में जा बैठा हो, तो आप समझ सकते हैं कि नेताओं की क्या हालत होगी. पटना साहिब सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा शुक्रवार को मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा सीट पर मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे के लिए वोट मांगने पहुंचे. सौसर में चुनावी सभा थी. मुख्यमंत्री कमलनाथ मंच पर मौजूद थे. यहां शत्रुघ्न सिन्हा ने जिन्ना की तारीफ में कसीदे पढ़े. उससे भी ज्यादा आपत्तिजनक ये कि जिन्ना की ही कतार में उन्होंने महात्मा गांधी और सरदार पटेल जैसे महापुरुषों को खड़ा कर दिया. उन्होंने कहा, सरदार पटेल से लेकर नेहरू तक, महात्मा गांधी से लेकर जिन्ना तक, इंदिरा गांधी से लेकर राहुल गांधी तक, भारत की आजादी और विकास में सभी का योगदान है. इसलिए मैं कांग्रेस पार्टी में शामिल हुआ हूं. इस बयान से आप शत्रुघ्न की राजनीतिक समझ को परख सकते हैं. उन्हें गांधी और जिन्ना एक तराजू में नजर आते हैं. इतना ही नहीं, नेशनल हेराल्ड घोटाले में जमानत पर चल रहे कांग्रेस अध्यक्ष भी उन्हें महापुरुषों की कतार में नजर आने लगे हैं. बहरहाल, शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस के जिन्ना और पाकिस्तान प्रेम की नई मिसाल हैं.
सिद्धू की देशद्रोही करतूतें
कांग्रेस में पहुंचते ही नवजोत सिंह सिद्धू तो पाकिस्तान के दीवाने हो गए. पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद जब पूरा देश शोक में डूबा था, देशभर में पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे गूंज रहे थे, वह सिद्धू ही थे, जो पाकिस्तान की हिमायत कर रहे थे. 14 फरवरी 2019 को सीआरपीएफ के 40 जवानों के बलिदान पर सिद्धू का बयान था कि कुछ लोगों की करतूत के लिए पूरे पाकिस्तान को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. पाकिस्तान में इमरान खान के नेतृत्व में नई सरकार के शपथग्रहण में भी सिद्धू भारत से जाने वाले अकेले अहम नेता थे. भारत के खिलाफ होने वाली हर साजिश और हर हमले के लिए जिम्मेदार पाकिस्तान सेना के जनरल कमर जावेद बाजवा को सिद्धू ने गले लगाया. उनका तर्क सुनिए-उन्होंने मुझे कहा कि वे करतारपुर कॉरिडोर खोलने के लिए तैयार हैं. मैं तो उन्हें गले लगाऊंगा, चूमूंगा भी. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को सिद्धू के पाकिस्तान प्रेम पर आपत्ति थी, तो सिद्धू ने धमकाया. उनका बयान सुनिए-मेरे बॉस राहुल गांधी हैं. मैंने जो किया, उनके आदेश पर किया. मतलब ये कि सिद्धू के पाकिस्तान दौरे और पाकिस्तान प्रेम के पीछे उनके बॉस की इच्छा और आदेश है.
पाकिस्तान के सेना प्रमुख कमर बाजवा से गले मिलते सिद्धु 
मोदी को हटाइये, हमें लाइये
पाकिस्तान प्रेम और तुष्टिकरण के कारण 2014 में ऐतिहासिक पराजय का मुंह देखने के बाद भी कांग्रेस नहीं जागी. देश की जनता ने ठुकराया, तो पाकिस्तान की शरण में पहुंच गए. सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खासे करीबी मणिशंकर अय्यर 6 नवंबर 2015 को पाकिस्तान के न्यूज चैनल दुनिया पर चमके. यहां उन्होंने पाकिस्तान से गुहार लगाई कि इनको (यानी मोदी सरकार) को हटाइये, हमें लाइये. और कोई रास्ता नहीं है. यह साफ-साफ न्योता था कि भारत की सरकार को हटाने में पाकिस्तान मदद करे.
और तैयार हो गई पाकिस्तानी साजिश
पाकिस्तान और कांग्रेस के बीच क्या खिचड़ी पक सकती है और ये देश के लिए कितना बड़ा खतरा हो सकता है, इसका पता 2017 में गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान चला. गुजरात चुनाव के दौरान कांग्रेसी नेताओं ने पाकिस्तानी नेताओं व अधिकारियों के साथ गुप्त ढंग से बैठक की. पहले तो कांग्रेस ने ऐसी किसी बैठक के होने से इंकार कर दिया. लेकिन सुबूत पुख्ता थे, तो इसे डिनर का नाम दिया गया. दावा तो ये किया जाता है कि इस बैठक में गुजरात चुनाव को लेकर रणनीति बनी थी. कांग्रेस चाहती थी कि पाकिस्तान की मदद से अहमद पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बनवा दिया जाए. लेकिन देश की खुफिया एजेंसियों ने इस साजिश को बेनकाब कर दिया. गुजरात की जनता ने इस साजिश के लिए एक बार फिर कांग्रेस को सबक सिखाया.
दिग्विजय से लेकर थरूर तक
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राहुल गांधी के अहम रणनीतिकार माने जाने वाले दिग्विजय सिंह ने 21 जनवरी 2013 को आतंकवादी सरगना हाफिज सईद को साहब के संबोधन से नवाजा था. इससे पहले दिग्विजय सिंह दुनिया के सबसे खूंखार आतंकवादी सरगना ओसामा बिन लादेन को भी लादेन जी कहते रहे. दिग्विजय सिंह ने एक अन्य विवादित बयान में जम्मू-कश्मीर को भारत अधिकृत कश्मीर कह डाला था. असल में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के हिस्से को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर कहा जाता है. जब इस बयान की निंदा हुई, देशभर में प्रदर्शन होने लगे तो दिग्विजय को मजबूरी में कहना पड़ा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है. कांग्रेस के एक और वरिष्ठ नेता हैं गुलाम नबी आजाद. ये वही बोलते हैं, जो इस्लामाबाद में बैठे नेता बोलते हैं. पाकिस्तान तो खैर भारतीय सेना पर तमाम इल्जाम लगाता है, लेकिन उन्होंने ने 20 जून 2018 को क्या कहा, गौर कीजिए. उनका कहना था कि चार आतंकवादियों को मारने के लिए 20 नागरिकों को मार दिया जाता है. भारतीय सेना की कार्रवाई आतंकवादियों पर कम, नागरिकों पर ज्यादा होती है. उन्होंने पुलवामा में एक आतंकवादी को मारने के लिए 13 कश्मीरियों को मार दिया. हमारी सरकार थी, तो उसमें कोई सिविलियन नहीं मरता था. आपको लगता है कि ये किसी भारतीय नेता की भाषा है.
गुलाम नबी आजाद के दो दिन बाद के एक और आला कांग्रेसी नेता सैफुद्दीन सोज के बयान को देखिए. उन्होंने बयान दिया था कि मुशर्रफ कह रहे हैं कि कश्मीरी पाकिस्तान के साथ नहीं जाना चाहते. उनकी पसंद आजादी है. मुशर्रफ पहले भी सही कह रहे थे, अब भी सही कह रहे हैं. मैं भी यही कहता हूं कि कश्मीरियों की पहली पसंद आजादी है. कांग्रेस के इसी पाकिस्तान प्रेमी गैंग के एक और सक्रिय सदस्य हैं शशि थरूर. 11 जुलाई 2018 को को शशि थरूर ने सारी हदें पार कर दीं. उन्होंने कहा कि अगर इस चुनाव में में भाजपा जीती तो भारत हिंदू-पाकिस्तान बन जाएगा. दोबारा जीतने पर भाजपा एक नया संविधान लिखेगी. अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन किया जाएगा. भाजपा दोबारा जीतते ही भारत को हिंदू राष्ट्र बना डालेगी.
मुस्लिम वोटों के लिए दो सूत्री रणनीति
कांग्रेस नेताओं के पाकिस्तान प्रेमी बयानों की जड़ अल्पसंख्यकों और खासतौर पर मुसलमानों को लेकर इनकी छोटी सोच है. हर चुनाव में कांग्रेस मुस्लिम वोटों के लिए दो सूत्री रणनीति पर काम करती है. पहली रणनीति है कि भारतीय जनता पार्टी के नाम से मुस्लमानों को डराया जाए. बार-बार झूठ बोलकर साबित करने की कोशिश की जाए कि भाजपा की अगर सरकार बनी तो उन पर कहर ढाया जाएगा. अब पांच साल के नरेंद्र मोदी सरकार के शासनकाल से ये तो साफ हो गया कि ये डर बेमानी है. हर योजना सबका साथ, सबका विकास की नीति पर काम करती है. रणनीति का दूसरा सूत्र है पाकिस्तान परस्ती. न जाने क्यों कांग्रेस और उस जैसी हर विपक्षी पार्टी को भारतीय मुसलमान के विषय में ये गलतफहमी हो गई है कि पाकिस्तान का नाम लेकर, पाकिस्तान जिंदाबाद बोलकर वह मुस्लिमों को खुश कर सकते हैं.