बुआ और बबुआ सीबीआई के रडार पर
   दिनांक 28-अप्रैल-2019
अभी तक 21 चीनी मिलों के मामले में सी.बी.आई. ने एफ.आई.आर. दर्ज करके सात लोगों को नामजद किया है इसके अलावा मायावती और अखिलेश के राज में हुए आधा दर्जन अन्य घोटालों की जांच कर रही है सी.बी.आई.
बुआ-मायावती और बबुआ - अखिलेश के राज में हुए करीब आधा दर्जन ऐसे मामले हैं जिनकी जांच सी.बी.आई. कर रही है. अब 21 चीनी मिलों के मामले में सी.बी.आई. ने एफ.आई.आर. दर्ज करके सात लोगों को नामजद किया है. सपा की सरकार में उत्तर प्रदेश में खनन घोटाला हुआ. यह मामला विपक्ष के द्वारा उठाया गया था मगर अखिलेश यादव ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया. एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खनन घोटाले की सी.बी.आई जांच के आदेश दिए. सपा सरकार में गोमती रिवर फ्रंट में करोड़ो रूपये का घोटाला किया गया. वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश सरकार की सिफारिश पर गोमती रिवर फ्रंट के घोटाले की जांच सी.बी.आई कर रही है. सपा के राज में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की नियुक्तियों में जमकर धांधली हुई. इस मामले में भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश से सी.बी.आई. जांच हो रही है. सहारनपुर में यमुना एक्सप्रेस-वे के निर्माण में हुई धांधली की जांच सी.बी.आई. कर रही है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत भारत सरकार से 2,900 करोड़ रूपया उत्तर प्रदेश सरकार को मिला था. उस समय प्रदेश में बसपा की सरकार थी. उस घोटाले में एक आई.ए.एस अधिकारी समेत कुछ अभियुक्त आज भी जेल में हैं. जांच अभी जारी है. इन सब के बाद अब , बसपा राज में हुए 21 चीनी मिलों का घोटाला सामने आया है. जांच आगे बढ़ने पर कभी भी बुआ और बबुआ से पूछ-ताछ हो सकती है.
लाभ में थी चीनी मिल , कबाड़ के भाव बेच दी
बता दें कि मायावती के मुख्यमंत्री रहते हुए वर्ष 2010 -11 में उत्तर प्रदेश की 21 चीनी मिलों में घोटाला किया गया था. पहली बार यह घोटाला आडिट रिपोर्ट में पकड़ में आया था. आडिट रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया कि बुलंदशहर की चीनी मिल को खरीदने के लिए वेब इंडस्ट्रीज एवं सहारनपुर की चीनी मिल को खरीदने के लिए पी. बी. एस. फूड्स प्राइवेट लिमिटेड ने ही बोली लगायी थी. मतलब यह कि एक चीनी मिल को खरीदने के लिए एक ही खरीददार बुलाया गया था. यह सब कुछ पहले से तय किया गया था ताकि जब चीनी मिल की बोली लगे तो कोई अन्य वहां पर बोली लगाने के लिए मौजूद ना हो. वर्ष 2012 में सीएजी की रिपोर्ट विधानसभा में पेश हुई थी जिसमे यह साफ़ कहा गया था कि सभी मिलें वर्ष 2009 - 10 तक चालू हालत में थीं. जरवल रोड , सिसवा बाजार और महराजगंज आदि मिलें तो लाभ में थी फिर भी इन ,मिलों को बेचा गया. चीनी मीलों के प्लांट को कबाड़ बताकर उसकी बाजार की कीमत 114.96 करोड़ बताई गयी बाद में इसे घटाकर 32.88 करोड़ कर दिया गया था.
इस मामले में कुछ समय पहले लखनऊ के गोमती नगर थाने में एफ.आई.आर दर्ज कराई गयी थी. उसी समय उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह ) ने इस मामले की जांच सी.बी.आई. से कराने का आग्रह, केंद सरकार से किया था. सी.बी.आई. ने सभी प्राथमिक जानकारी जुटाने के बाद अब एफ.आई.आर दर्ज की है. सी.बी.आई. ने 7 चीनी मिलों के विनिवेश घोटाले का मामला पकड़ा है. इन सातों चीनी मिलों के मामले में सात लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है. अन्य 14 चीनी मिलों को बेचने की प्रक्रिया में गड़बड़ी पायी गयी है. इन 14 चीनी मिलों के प्रकरण में सी.बी.आई. ने प्राथमिक जांच दर्ज की है. प्रारम्भिक जांच में ठोस सबूत मिलने के बाद इन 14 चीनी मिलों के मामले में एफ.आई.आर दर्ज की जा सकती है. अखिलेश और माया के कार्यकाल में हुए आधा दर्जन से अधिक मामलों की जांच सी.बी.आई और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की जा रही है. जो लोग सी.बी.आई. की एफ.आई.आर. में नामजद हुए हैं उनसे पूछतांछ होने पर मायावती की मुश्किलें बढ़ जायेंगी.